पाकिस्तान की नई चाल: कश्मीर में जानबूझ कर भर्ती कर रहा स्थानीय आतंकी, ताकि मरते ही मचे 'बवाल'

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Thu, 25 Nov 2021 07:30 PM IST

सार

पुलिस अधिकारी के अनुसार, पाकिस्तान की आईएसआई ने कश्मीर में बड़े स्तर पर बवाल मचाने की साजिश रची है। घाटी के गुमराह युवाओं को नए आतंकी संगठनों में शामिल कर उन्हें सिविल किलिंग या नाका पार्टी पर हमला, जैसे टारगेट दिए जाते हैं। इनकी मदद के लिए ओवरग्राउंड वर्कर होते हैं। अगर कोई विदेशी आतंकी मारा जाता है तो स्थानीय लोगों की वैसी प्रतिक्रिया नहीं मिलती, जो किसी स्थानीय आतंकी के मारे जाने के बाद दिखाई पड़ती है....
श्रीनगर में सुरक्षाबल
श्रीनगर में सुरक्षाबल - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

आतंक के मुद्दे पर भारत की ओर से 'पड़ोसी' को सुधारने के लिए लगातार चेतावनी दी जा रही है, मगर पाकिस्तान अपनी शरारत से बाज नहीं आ रहा। वह आए दिन 'कश्मीर' घाटी में आतंकी हमलों को अंजाम देने की साजिश रचता रहता है। अब पाकिस्तान ने भारत में आतंक को बढ़ावा देने के लिए नई चाल चली है। पाकिस्तान ने अब पुराने आतंकी संगठन, जो 'यूएनओ' जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों की सूची में हैं, उनकी छोटी शाखाएं खोल दी हैं। इसके पीछे पाकिस्तान का मकसद, सुरक्षा एजेंसियों और दूसरे मुल्कों को गुमराह करना है।
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दूसरा, पड़ोसी ने अब जम्मू-कश्मीर में स्थानीय युवाओं की भर्ती पर खासा जोर दिया है। यहां भी वह चाल चल रहा है। एक वार से दो फायदे लेना चाहता है। स्थानीय युवकों को गुमराह कर उन्हें नए आतंकी समूहों में शामिल करता है। उन्हें बिना किसी बड़ी ट्रेनिंग के 'सिविल किलिंग' जैसे आसान टारगेट देता है। उसके बाद जब वे आतंकी मुठभेड़ में मारे जाते हैं तो स्थानीय स्तर पर बवाल मचवाने की साजिश करता है। श्रीनगर में एक दिन पहले हुई मुठभेड़ के दौरान तीन स्थानीय आतंकी मारे गए थे। सुरक्षा एजेंसियों को कश्मीर और दूसरे इलाकों में संभावित 'उपद्रव' की सूचना मिली, जिसके चलते गुरुवार को तीस से अधिक स्थानों पर मोबाइल इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है।

टीआरएफ के तीन आतंकी मारे गए थे

सुरक्षाबलों ने रामबाग फ्लाईओवर के नीचे एक कार में जा रहे लश्कर-ए-ताइबा के सहयोगी समूह 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' (टीआरएफ) के टॉप कमांडर मेहरान यासीन शल्ला व उसके दो साथियों को मार गिराया था। आतंकी मेहरान के बारे में बताया गया है कि वह श्रीनगर के ईदगाह इलाके में एक शिक्षक व महिला प्रिंसिपल की हत्या में शामिल था। मुठभेड़ में मारे गए अन्य दो आतंकियों के नाम मंजूर अहमद मीर और अराफात शेख हैं। खास बात ये है कि इन तीनों आतंकियों का कोई लंबा रिकॉर्ड नहीं है। ये तीनों इसी साल सक्रिय हुए थे।

मेहरान यासीन शल्ला की मिसिंग रिपोर्ट 'डीडीआर नंबर 22' 19 जून को दर्ज की गई थी। वह 'सी' श्रेणी का आतंकी था और 18 जून से सक्रिय बताया गया है। 'सी' श्रेणी के आतंकी मंजूर अहमद मीर की मिसिंग रिपोर्ट 'डीडीआर नंबर 27' 22 जून की है। तीसरे आतंकी की जानकारी भी कुछ इसी तरह की बताई जा रही है। शिक्षक दीपक चंद और सिख महिला प्रिंसिपल सुपिंदर कौर की हत्या के अलावा 'टीआरएफ' कमांडर मेहरान की दूसरे निर्दोष नागरिकों की हत्या में शामिल होने की बात कही गई है। पुलिस के मुताबिक, इन तीनों में ऐसा कोई आतंकी नहीं था, जो सीमा पार ट्रेनिंग के लिए गया हो।

कश्मीर में बवाल मचाने की बड़ी साजिश

पुलिस अधिकारी के अनुसार, पाकिस्तान की आईएसआई ने कश्मीर में बड़े स्तर पर बवाल मचाने की साजिश रची है। घाटी के गुमराह युवाओं को नए आतंकी संगठनों में शामिल कर उन्हें सिविल किलिंग या नाका पार्टी पर हमला, जैसे टारगेट दिए जाते हैं। इनकी मदद के लिए ओवरग्राउंड वर्कर होते हैं। अगर कोई विदेशी आतंकी मारा जाता है तो स्थानीय लोगों की वैसी प्रतिक्रिया नहीं मिलती, जो किसी स्थानीय आतंकी के मारे जाने के बाद दिखाई पड़ती है। स्थानीय आतंकी अगर मुठभेड़ में मारा जाता है, तो उस पर जमकर बवाल मचाने का प्रयास होता है। यहां तक कि पथरबाजों को दोबारा से सक्रिय करने की बात सामने आई है। ये अलग बात है कि सुरक्षा बलों की सख्ती से अभी तक इस तरह की घटना नहीं हो सकी है।

बुधवार को मारे गए तीन आतंकी स्थानीय थे, इसलिए पुलिस को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ी। ऐसे अलर्ट मिले थे कि तीन आतंकियों की मौत पर घाटी के विभिन्न हिस्सों में बवाल मच सकता है। यही वजह रही कि पुलिस ने श्रीनगर के फतेह कदल, ईदगाह, कमरवारी, करण नगर, सौरा, रैनावारी, बग्यास, नौहट्टा, हब्बाकदल, खनियार, सैयद पोरा, जम्मलत्ता, हजरतबल, बुशपोरा, हवल, नूरबाग, जकूरा व नवाकदल आदि तीस इलाकों में एहतियात के तौर पर मोबाइल सेवा बंद करा दी है।

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