नीति आयोग की बैठक में पीएम: भारत को 2024 तक 5 हजार अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Sat, 15 Jun 2019 09:41 PM IST
नीति आयोग (फाइल फोटो)
नीति आयोग (फाइल फोटो) - फोटो : Facebook
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नई सरकार के गठन के बाद आज नीति आयोग की पहली बैठक हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में कई राज्यों के मुख्यमंत्री और उप-राज्यपाल शामिल हुए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के साथ नीति आयोग संचालन परिषद की बैठक शुरू हुई। बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा- सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास के मंत्र को पूरा करने में नीति आयोग की महत्वपूर्ण भूमिका। भारत को 2024 तक 5,000 अरब डालर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य चुनौतीपूर्ण पर राज्यों के संयुक्त प्रयास से इसे हासिल किया जा सकता है।
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लेकिन बैठक में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव इसमें शामिल नहीं हुए। हालांकि अमरिंदर सिंह ने वित्त मंत्री को भेजा। 

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि देश को 2024 तक 5,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य चुनौतीपूर्ण है लेकिन राज्यों के साथ संयुक्त प्रयास से इसे हासिल किया जा सकता है। प्रधानमंत्री ने साथ में हर भारतीय को अधिकार सम्पन्न बनाने और लोगों की जिंदगी अधिक सुगम बनाने के कार्य पर भी जोर दिया। मोदी नीति आयोग संचालन परिषद की पांचवीं बैठक के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। इसका आयोजन राष्ट्रपति भवन के सांस्कृतिक केंद्र में किया गया।



  पत्र सूचना कार्यालय की एक विज्ञप्ति के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी ने टीम इंडिया के रूप में आयोजित इस सम्मेलन में अपने प्रारंभिक संबोधन में देश में गरीबी, बेरोजगारी, सूखा, बाढ़, प्रदूषण भ्रष्टाचार और हिंसा आदि के खिलाफ सामूहिक लड़ाई का आह्वान किया। मोदी ने 17वीं लोक सभा के चुनाव को दुनिया में लोकतंत्र का सबसे बड़ी कवायद बताया और कहा कि अब समय है कि सब मिल कर भारत के विकास में लग जाएं।  

उन्होंने आयोग की संचालन परिषद के सभी सदस्यों से सरकार का ऐसा ढांचा तैयार करने में मदद का आह्वान किया जो कारगर हो और जिसमें लोगों का भरोसा हो। सहयोगपूर्ण संघवाद के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि देश को 2024 तक 5,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना चुनौतीपूर्ण है, लेकिन इसमें राज्यों के संयुक्त प्रयास के साथ इसे हासिल किया जा सकता है। 

देश के विकास में निर्यात की अहमियत को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने के लिये केंद्र तथा राज्यों दोनों को निर्यात में वृद्धि की दिशा में काम करना चाहिए। पूर्वोत्तर समेत कई राज्यों में निर्यात के क्षेत्र में काफी संभावना है जिसका उपयोग नहीं हुआ है। 

उन्होंने कहा कि राज्यों के स्तर पर निर्यात पर जोर से आय और रोजगार को गति मिलेगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि यहां बैठे सभी लोगों का 2022 तक नया भारत बनाने का एक साझा लक्ष्य है। 

ममता ने लिखा था पत्र 

इससे पहले सात जून को ममता ने प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखा था। जिसमें उनका कहना था कि नीति आयोग के पास कोई वित्तीय शक्तियां नहीं हैं और राज्य की योजनाओं का समर्थन करने की शक्ति नहीं है। इस वजह से मेरे लिए बैठक में शामिल होने का कोई मतलब नहीं है। पिछले कार्यकाल में भी ममता नीति आयोग की बैठकों से दूर ही थीं। वहीं आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी ने स्पष्ट कर दिया कि वह राज्य को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग करेंगे। इसी विषय पर उन्होंने गृहमंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की थी।

नीति आयोग में इन मुद्दों पर चर्चा होगी:-

1. नदियों को पुनर्जीवित करने के प्रयासों के संबंध में
2. कृषि क्षेत्र में केंद्र द्वारा नए प्रयास करने की आवश्यकता के संबंध
3. वन अधिनियम में संशोधन करने की आवश्यकता जिससे आदिवासियों को रोका जा सके और उनके जीवन में तब्दीली लाई जा सके
4. नक्सल प्रभावित क्षेत्रों /आदिवासी क्षेत्रों में ऐसी नीति बनाई जाने की आवश्यकता जिससे वहां प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के बजाय वहां निवेश/ निवेश आकर्षित किए जाने के प्रयासों के संबंध में

माना जा रहा है कि कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री केंद्र सरकार और नीति आयोग के सामने अपने-अपने राज्यों की आवश्यकताओं के अनुरूप मांग उठाएंगे। इसकी रणनीति तैयार करने के लिए शुक्रवार शाम को मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपने दिल्ली स्थित आवास पर कांग्रेसी मुख्यमंत्रियों को रात्रिभोज  पर बुलाया था।
 

दूसरी ओर, प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक का एजेंडा तय हो चुका है। बैठक में जल प्रबंधन, कृषि, नक्सलवाद और सुरक्षा विषय पर राज्यों से विचार-विमर्श किया जाएगा। बैठक में  वित्त, गृह, रक्षा, कृषि, वाणिज्य और ग्रामीण विकास मंत्री मौजूद रहेंगे। इसके अलावा नीति आयोग के उपाध्यक्ष, सीईओ और सदस्य भी बैठक में शामिल होंगे।

आयोग की बैठक में पांच सूत्रीय एजेंडे पर चर्चा होगी। जिसमें महत्वाकांक्षी जिला स्तरीय कार्यक्रमों, खेती किसानी में क्रांति, सुरक्षा संबंधित मुद्दे और वामपंथी उग्रवाद की चपेट में आए जिलों पर चर्चा होगी। इसकी वजह लेफ्ट विंग के चरमपंथी समूह का देश की सुरक्षा के लिए खतरा बने रहना है।

जगनमोहन ने विशेष राज्य के दर्जे का मुद्दा उठाया

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाई एस जगनमोहन रेड्डी ने शनिवार को केंद्र के समक्ष कर्ज के बोझ से दबे प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने का मुद्दा उठाया। रेड्डी ने नीति आयोग संचालन परिषद की पांचवीं बैठक को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ‘उदारता’ दिखाते हुए संसद में और भाजपा के 2014 के चुनाव घोषणापत्र में किए गए वादे को पूरा करने को कहा। 

राज्य पर बढ़ते कर्ज के बोझ और रोजगार सृजन में भारी गिरावट पर चिंता जताते हुए रेड्डी ने कहा कि विशेष श्रेणी का दर्जा (एससीएस) मेरे राज्य के लिए एक आवश्यक जीवन का सहारा बन गया है। जब हम विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने को लेकर कई तरह की अफवाहें और बहाने सुनते हैं तो काफी दुख होता है। 
 

कुमारस्वामी ने जीएसटी मुआवजे की अवधि पांच साल से आगे बढ़ाने की अपील की

कर्नाटक के मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी ने केंद्र से जीएसटी मुआवजे की अवधि पांच साल से आगे बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि मुआवजे की अवधि 2022 में खत्म होने के बाद राज्य को “गंभीर आर्थिक संकट” का सामना करना पड़ेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में यहां हुई नीति आयोग संचालन परिषद की पहली बैठक में कुमारस्वामी ने यह कहा। माल एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू करते वक्त केंद्र ने राज्यों को पांच वर्ष, यानि 2022 तक उन्हें होने वाले नुकसान की भरपाई करने का आश्वासन दिया था।

बैठक के बाद नीति आयोग के वाइस चेयरमैन राजीव कुमार ने ब्यौरा दिया। उन्होंने कहा कि पीएम ने सुधारों के लिए उच्च स्तरीय टास्क फोर्स का गठन करने का एलान किया। 



 
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