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क्या है एनआरसी विवाद, क्यों असम में ही शुरू की गई बांग्लादेशियों की गणना, जानिए इससे जुड़ी हर बात

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 07 Aug 2018 05:00 PM IST
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असम में एनआरसी के ताजा ड्राफ्ट पर गरमाई राजनीति से पूरा देश तप रहा है। इसकी बड़ी वजह यह है कि इस ड्राफ्ट में 40 लाख से ज्यादा लोगों के नाम इसमें से गायब हैं। ऐसा माना जा रहा है कि जिनके नाम इस ड्राफ्ट में नहीं हैं इसमें अधिकतर लोग वह हैं जो अल्पसंख्यक और अवैध बांग्लादेशी हैं। हालांकि एनआरसी ड्राफ्ट को अंतिम रूप दिया जा रहा है। सरकार ने इस बात का भरोसा दिया है कि जो भारतीय हैं उनका नाम इसमें जुड़ जाएगा। इस बीच मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई और आरएफ नरीमन ने असम राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर समन्वयक प्रतीक हाजेला और पंजीयक शैलेश को एनआरसी ड्राफ्ट के अंतिम रूप देने के लिए अपनाई जा रही प्रक्रिया के बारे में मीडिया से बात करने पर फटकार लगाई है। 
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हालांकि, अवैध बांग्लादेशियों की समस्या से पूरा भारत जूझ रहा है। लेकिन एक बात चौंकाती है कि जब इन समस्या से पूरा भारत जूझ रहा है तो फिर इस तरह की गणना असम में ही क्यों हुई?

पढ़िए वो सबकुछ जो आप एनआरसी के बारे में जानना चाहते हैं।
 
नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन यानी एनआरसी के संशोधित ड्राफ्ट में असम के 2.89 करोड़ लोगों को नागरिक मान लिया गया है। मगर 40,07,708 लोगों के नाम इसमें शामिल नहीं हैं। इसलिए कि वे अपनी पहचान फिलहाल साबित नहीं कर पाए और इनमें अधिकतर अवैध बांग्लादेशी होने की आशंका है। हालांकि अवैध बांग्लादेशियों की समस्या सिर्फ असम में नहीं है। केंद्र सरकार दो करोड़ से ज्यादा अवैध बांग्लादेशियों के भारत में होने की बात कह चुकी है। 2016 में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरण रिजीजू ने राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में यह आंकड़ा पेश किया था। इधर, खुफिया विभाग की रिपोर्ट है कि 55 लाख बांग्लादेशी तो पश्चिम बंगाल में ही हैं। यानी एनआरसी ड्राफ्ट में असम के जितने लोग नागरिकता साबित नहीं कर सके उनसे 15 लाख ज्यादा। 

क्या है एनआरसी ड्राफ्ट

1951 में नागरिकों तथा उनके घरों की गिनती के उद्देश्य से कार्यक्रम नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन (एनआरसी) चलाया गया। तब 80 लाख लोगों को वहां का नागरिक माना गया था। लंबे समय से असम में स्थायी नागरिक संगठनों की मांग रही है कि इस गणना को अपडेट किया जाए। 1985 में भी इस मांग ने जोर पकड़ा तब देश के प्रधानमंत्री राजीव गांधी थे। लेकिन बाद में 2010 में पायलट प्रोजेक्ट के तहत राज्य के दो जिलों में एनआरसी अपडेट करने की प्रक्रिया शुरू हुई। हालांकि कुछ समूह इसके विरोध में उतर आए। विरोध में प्रदर्शन भी हुए। बारपेटा जिले में पुलिस को उग्र प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई करनी पड़ी, इसमें 4 लोगों की मौत हो गई। तब नए सिरे से गणना के काम को रोक दिया गया। 2013-14 में सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद एनआरसी को अपडेट करने का काम फिर शुरू हुआ। 

ऐसा माना जाता रहा है कि देश में दो करोड़ से ज्यादा अवैध बांग्लादेशी हैं जिसमें से 55 लाख बंगाल में और 15 लाख से ज्यादा असम में हैं। लेकिन इनका 40 लाख होना अंचभित करता है। 
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यह गणना सिर्फ असम में ही क्यों

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