एक्सक्लूसिव: एनआरसी लिस्ट में 9.85 लाख से ज्यादा भारतीयों के नाम कट गए

जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली Updated Wed, 08 Aug 2018 06:25 PM IST
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नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन (एनआरसी) द्वारा हाल ही में जारी की गई जिस सूची के कारण सड़क से लेकर संसद तक बवाल मचा है, उसमें करीब 10 लाख नाम तो भारतीयों के ही कट गए हैं। चूंकि अब उनका नाम इस लिस्ट में नहीं है तो उन्हें भी बाकी लोगों की तरह घुसपैठिया कहा जाने लगा है। असम में बहुत परिवार तो ऐसे हैं जो आजादी या उससे पहले से ही भारत में रह रहे हैं, लेकिन एनआरसी के दस्तावेज में उनका नाम शामिल नहीं हैं। इसके अलावा असम के सीमावर्ती जिलों में जहां मुस्लिम समुदाय की तादाद ज्यादा है, वहां पर तो 85 फीसदी परिवार घुसपैठियों की श्रेणी में आ गए हैं। 
गृह मंत्रालय में उत्तर पूर्व के मामले और खासतौर पर, एनआरसी की प्रक्रिया देख रहे एक विश्वस्त अधिकारी ने यह खुलासा किया है। उनके मुताबिक, एनआरसी ने अपने दस्तावेज में भले ही 40 लाख लोगों का नाम काटकर उन्हें एक झटके में घुसपैठिया बना दिया है, लेकिन ऐसा नहीं है। इस सूची को तैयार करने के दौरान बहुत सी तकनीकी गलतियां हुई हैं। करीब 10 लाख भारतीय जो किसी दूसरे राज्य से कामकाज या नौकरी के चलते असम में जाकर बस गए थे, उनका नाम भी एनआरसी दस्तावेज में गायब है।

बहुत से परिवार ऐसे भी हैं जो आजादी के समय या उससे पहले से यहां रह रहे हैं, उन्हें भी एनआरसी ने असम का नागरिक नहीं माना है। ऐसे लोगों ने एनआरसी को अपना आवेदन भेजना शुरू कर दिया है। हालांकि अभी तक एनआरसी की तरफ से उनके पास बातचीत या अपना पक्ष रखने के लिए बुलावा नहीं आया है। दूसरे भारतीय राज्यों के नागरिक जो असम में जाकर बसे थे और अब उन्हें बाहरी बताया जा रहा है, उनमें पश्चिम बंगाल पहले नम्बर पर है। दूसरे स्थान पर उत्तरप्रदेश, तीसरे पर बिहार, चौथे पर राजस्थान और पांचवे पर उत्तरपूर्व के राज्य आते हैं। 
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