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नारदा मामला: तृणमूल के चारों नेताओं की जमानत पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने लगाई रोक

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Tanuja Yadav Updated Tue, 18 May 2021 02:18 AM IST

सार

नारदा स्टिंग मामले में टीएमसी के चार नेताओं की गिरफ्तारी के बाद वहां राजनैतिक भूचाल मच गया है। सीबीआई की इस कार्रवाई के बाद टीएमसी कार्यकर्ता भारी संख्या में दफ्तर के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। वहीं, मामले में सीबीआई अदालत ने गिरफ्तार गिए गए चारों तृणमूल नेताओं को जमानत दे दी। लेकिन दूसरी कलकत्ता हाईकोर्ट ने इस पर रोक लगा दी। सीबीआई ने कोलकाता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए कहा था कि वह यहां ठीक तरह से काम नहीं कर पा रही है और उसकी जांच पर असर पड़ रहा है।
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सीबीआई दफ्तर के बाहर टीएमसी कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन
सीबीआई दफ्तर के बाहर टीएमसी कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन - फोटो : ANI

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विस्तार

कलकत्ता हाईकोर्ट ने 17 मई की देर रात नारदा केस में टीएमसी नेताओं को जमानत दिए जाने वाले आदेश पर रोक लगा दी है। इसके पहले इन चारों नेताओं को सीबीआई ने नारदा केस में गिरफ्तार किया था और इन्हें जमानत भी मिल गई थी। अब मामले में अगली सुनवाई 19 मई को होगी। केंद्रीय जांच एजेंसी ने इसके पहले हाईकोर्ट का रुख किया था और एजेंसी ने कोर्ट में कहा कि वो यहां ठीक से काम नहीं कर पा रहे हैं और उनकी जांच प्रभावित हो रही है।
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सीबीआई दफ्तर से निकले टीएमसी नेता 
टीएमसी नेता फिरहाद हाकिम, सुब्रत मुखर्जी, मदन मित्रा और सोवन चटर्जी सीबीआई दफ्तर से निकले, उन्हें प्रेसीडेंसी जेल ले जा गया। बता दें कि कलकत्ता हाईकोर्ट ने इनकी जमानत रद्द कर दी है। मदन मित्रा ने कहा कि केंद्र के दो नेता प. बंगाल की जनता का जनादेश स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। 

 

ममता बोलीं, अदालत सुनाएगी फैसला
वहीं, शाम को सीबीआई दफ्तर से निकलीं बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ज्यादा कुछ न बोलते हुए इतना ही कहा कि मामले में अदालत फैसला सुनाएगी। दूसरी ओर सीबीआई ने इस मामले में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। एजेंसी ने अदालत से कहा है कि वह यहां ठीक से काम नहीं कर पा रही है और इस वजह से जांच पर असर पड़ रहा है।
 

इसके पहले टीएमसी कार्यकर्ताओं को प्रदर्शन करने से रोकने के लिए पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज किया था। ऐसा बताया जा रहा है कि सीबीआई के दफ्तर के बाहर सैकड़ों की संख्या में टीएमसी कार्यकर्ता मौजूद थे और टीएमसी कार्यकर्ताओं की ओर से पथराव भी किया गया। वहीं दफ्तर के अंदर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी लंबे समय तक मौजूद रहीं। तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों ने यहां झंडे लहराए और सीबीआई तथा केंद्र की भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। सीबीआई का दफ्तर निजाम पैलेस में केंद्र सरकार के कार्यालय परिसर में स्थित है। यहां पर बड़ी संख्या में सीआरपीएफ के जवान तैनात हैं तथा परिसर में अवरोधक लगाए गए हैं। कोलकाता पुलिस के जवान भी बड़ी संख्या में यहां मौजूद हैं।



सीबीआई ने सोमवार को तृणमूल कांग्रेस के नेता फरहाद हकीम, सुब्रत मुखर्जी और मदन मित्रा के साथ पार्टी के पूर्व नेता शोभन चटर्जी को नारदा स्टिंग मामले में कोलकाता में गिरफ्तार किया। नारदा स्टिंग मामले में कुछ नेताओं द्वारा कथित तौर पर धन लिए जाने के मामले का खुलासा हुआ था।
 
संविधान का पालन करें ममता- राज्यपाल
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल  जगदीप धनखड़ ने ट्वीट कर इस मुद्दे पर चिंता जाहिर की है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि पुलिस राज्य में कानून व्यवस्था को बनाए रखने की कोशिश करे। इसके अलावा उन्होंने ममता बनर्जी से अपील करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी संविधान का पालन करें। 

इसके अलावा जगदीप धनखड़ ने कहा कि कोलकाता पुलिस मूकदर्शक बनकर देख रही है। इलाके में स्थिति पूरी तरह से अराजक हो चुकी है। राज्यपाल ने कहा कि इलाके में पुलिस कानून व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश करे।

टीएमसी कार्यकर्ताओं की मांग है कि पार्टी के टॉप चार नेताओं को जल्द से जल्द राहत किया जाए। बता दें कि साल 2014 में हुए नारदा स्टिंग ऑपरेशन की कार्रवाई के तहत सीबीआई ने इन चार नेताओं को गिरफ्तार किया है। हालांकि इस पर ममता बनर्जी ने नाराजगी जताते हुए कहा था कि अगर गिरफ्तारी करनी है तो मुझे भी गिरफ्तार कीजिए।

मंत्री हकीम, मुखर्जी, मित्रा और चटर्जी के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी लेने के लिए सीबीआई ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ का रुख किया था। वर्ष 2014 में कथित अपराध के समय ये सभी मंत्री थे।धनखड़ ने चारों नेताओं के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी थी जिसके बाद सीबीआई अपना आरोपपत्र तैयार कर रही है और उन सबको गिरफ्तार किया गया।

नारद टीवी न्यूज चैनल के मैथ्यू सैमुअल ने 2014 में कथित स्टिंग ऑपरेशन किया था जिसमें तृणमूल कांगेस के मंत्री, सांसद और विधायक लाभ के बदले में कंपनी के प्रतिनिधियों से कथित तौर पर धन लेते नजर आए। यह टेप पश्चिम बंगाल में 2016 के विधानसभा चुनाव के ठीक पहले सार्वजनिक हुआ था। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने स्टिंग ऑपरेशन के संबंध में मार्च 2017 में सीबीआई जांच का आदेश दिया था।

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