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नंदुरबार मॉडल: कोरोना को मात दे रहा महाराष्ट्र का यह जिला, यहां 'ऑक्सीजन नर्सें' करती हैं सांसों की निगरानी

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नंदुरबार Published by: प्रियंका तिवारी Updated Sun, 09 May 2021 08:32 AM IST

सार

डॉ. भरुड़ ने समय रहते आने वाले संकट को भांप लिया था और पिछले साल दिसंबर से ही कारगर सिस्टम खड़ा करने की तैयारी शुरू कर दी थी। इस सिस्टम को नंदुरबार मॉडल नाम दिया गया जो आज काफी कामयाब है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

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विस्तार

कोरोना की दूसरी लहर भारत में हर जगह कहर बरपा रही है। अस्पतालों में बेड, दवाओं व मेडिकल ऑक्सीजन के अभाव में रोज बड़ी संख्या में मौतें हो रही हैं, लेकिन महाराष्ट्र के एक आदिवासी जिले नंदुरबार में ऐसी स्थिति नहीं है। यहां पर हालात काबू में हैं और यह जिले के डीएम डॉ. राजेंद्र भरुड़ के कारण संभव हो पाया। दरअसल, डॉ. भरुड़ ने समय रहते आने वाले संकट को भांप लिया था और पिछले साल दिसंबर से ही कारगर सिस्टम खड़ा करने की तैयारी शुरू कर दी थी। इस सिस्टम को नंदुरबार मॉडल नाम दिया गया जो आज काफी कामयाब है। इस मॉडल के तहत उन्होंने जिले में कई महत्वपूर्ण काम कराए जिसमें से एक ऑक्सीजन सिलेंडरों के बेहतर उपयोग के लिए हर छोटे-बड़े अस्पताल में ऑक्सीजन नर्सों की तैनाती करना भी शामिल है। 
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पूरे महाराष्ट्र में लागू हुआ  नंदुरबार मॉडल
बता दें जिले में नंदुरबार मॉडल की सफलता के बाद पिछले सप्ताह इसे पूरे महाराष्ट्र में लागू कर दिया गया। राज्य के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि ऑक्सीजन नर्सों की नियुक्ति से ऑक्सीजन सिलेंडर का उपयोग प्रभावी तरीके से हो पा रहा है। जिला कलेक्टर डॉ. राजेंद्र भरुड़ ने कहा कि संकट को भांपते हुए प्रशासन ने प्रत्येक 50 बिस्तरों के लिए एक नर्स नियुक्त किया है, जिनका काम है कि वह प्रत्येक मरीज के ऑक्सीजन स्तर की जांच करें। 

 
ऑक्सीजन नियंत्रण करती हैं नर्सें
उन्होंने आगे कहा, ‘नर्स यह देखती हैं कि सभी जरूरतमंद मरीज ऑक्सीजन मास्क पहनें और यदि कोई मरीज अपना ऑक्सीजन मास्क उतारता है, तो नर्स आग्रह करती हैं कि वे इसे पहनें। यदि मरीज की स्थिति में सुधार हो रहा है और उनके ऑक्सीजन का स्तर बढ़ रहा है, तो नर्स सिलेंडर से ऑक्सीजन के प्रवाह को कम कर देती हैं। वहीं, अगर किसी रोगी का ऑक्सीजन स्तर कम हो रहा होता है तो वे जरूरत के हिसाब से ऑक्सीजन के प्रवाह को बढ़ा देती हैं। ऐसा करना हमारे लिए फायदेमंद हुआ क्योंकि इससे ऑक्सीजन की निरंतर निगरानी सुनिश्चित हो सकी और इस तरह से हम ऑक्सीजन का बेहतर ढंग से उपयोग कर पा रहे हैं।’

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