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Edible Oil price: मदर डेयरी ने दी राहत, सोयाबीन और राइस ब्रान तेल के दाम प्रति लीटर 15 रुपये घटाए

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Thu, 07 Jul 2022 10:00 PM IST
सार

वैश्विक कीमतों में गिरावट के बीच सरकार ने बुधवार को खाद्य तेल निर्माताओं को एक सप्ताह के भीतर आयातित खाना पकाने के तेलों के दाम घटाने को कहा था। 

खाने का तेल
खाने का तेल - फोटो : pixabay
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विस्तार

मदर डेयरी ने गुरुवार को कहा कि उसने सोयाबीन और चावल की भूसी का (राइस ब्राइन) तेल की कीमतों में 15 रुपये प्रति लीटर तक की कटौती की है। एक दिन पहले ही सरकार ने खाद्य तेल कंपनियों को वैश्विक खाना पकाने के तेल की कीमतों में गिरावट का लाभ उपभोक्ताओं को देने का निर्देश दिया था। दिल्ली-एनसीआर में प्रमुख दूध आपूर्तिकर्ताओं में से एक मदर डेयरी, धारा ब्रांड के तहत खाद्य तेल बेचती है। कंपनी ने कहा, उपभोक्ताओं को सरकार के फैसले का लाभ देते हुए हमने धारा सोयाबीन तेल और धारा राइसब्रान ऑयल के एमआरपी को 15 रुपये प्रति लीटर तक कम कर दिया है, जो अगले सप्ताह तक बाजार में उपलब्ध होगा। 



सूरजमुखी तेल के दाम भी घटने की उम्मीद 
अगले 15-20 दिनों में सूरजमुखी तेल की एमआरपी (अधिकतम खुदरा मूल्य) में कमी की उम्मीद है। 16 जून को मदर डेयरी ने वैश्विक बाजारों में कीमतों में नरमी के साथ अपने खाना पकाने के तेल की कीमतों में 15 रुपये प्रति लीटर तक की कमी की थी। वैश्विक कीमतों में गिरावट के बीच सरकार ने बुधवार को खाद्य तेल निर्माताओं को एक सप्ताह के भीतर आयातित खाना पकाने के तेलों के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) में 10 रुपये प्रति लीटर तक की कटौती करने और उसी ब्रांड के समान एमआरपी बनाए रखने का निर्देश दिया था।


12 जुलाई से आटा-मैदा के भी निर्यात पर प्रतिबंध
भारत सरकार ने अब आटा और मैदा समेत कई चीजों के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है। गुरुवार को इसे मंजूरी दे दी गई। विदेशी व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने 6 जुलाई को एक अधिसूचना में कहा कि अब आटे के निर्यात के लिए गेहूं निर्यात को लेकर बनी अंतर मंत्रालयीन कमिटी से मंजूरी लेनी जरूरी होगी। इससे पहले सरकार ने मई में गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया था। लेकिन उसके बाद से आटा और मैदा का निर्यात अचानक बढ़ा गया, जिसकी वजह से यह फैसला लिया गया है। नया फैसला 12 जुलाई से लागू किया जाएगा। 6 से 12 जुलाई के बीच सिर्फ उन्हीं निर्यात को मंजूर मिलेगी, जो या तो शिप पर लोड किए जा चुके हैं, या फिर कस्टम को हैंडओवर किए जा चुके हैं।

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