बेहतर अनुभव के लिए एप चुनें।
INSTALL APP

जिहाद के नाम पर 72 हूरों का लालच देकर युवाओं को किया गुमराह, आतंकी पाठशाला के लिए पीएफआई पर गंभीर आरोप

डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Tue, 01 Dec 2020 07:27 AM IST
विज्ञापन
Popular Front of India
Popular Front of India - फोटो : Social media
ख़बर सुनें
अपनी विवादित गतिविधियों को लेकर कई केंद्रीय जांच एजेंसियों के रडार पर रहने वाला पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) दोबारा चर्चा में आ गया है। पहले भी इस संगठन पर देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन इस बार सूफी इस्लामिक बोर्ड ने इस संगठन को सीधे तौर पर आतंक समर्थित संस्था बता दिया है। बोर्ड के राष्ट्रीय महासचिव शाह सय्यद हसनैन बकाई के मुताबिक, पीएफआई के लोग अपनी राजनीतिक शाखा एसडीपीआई के जरिए युवाओं को गुमराह कर रहे हैं।
विज्ञापन


वे तथाकथित जिहाद के नाम पर युवाओं को 72 हूरों का लालच दिखा रहे हैं। इस लालच में फंसने वाले युवाओं को देश विरोधी गतिविधियों में लगा दिया जाता है। पीएफआई पर यह आरोप भी लगा है कि ये संगठन आतंक की पाठशाला चला रहा है। हसनैन बकाई ने इस संगठन के तार कुख्यात वैश्विक आतंकी संगठन आईएसआईएस से जुड़े होने की बात कही है।



सूफी इस्लामिक बोर्ड के अध्यक्ष का कहना है कि पीएफआई से जुड़े लोग अल-कायदा के सहयोगी संगठनों की बैठकों में भाग लेते रहते हैं। नाराथ में आर्मी ट्रेनिंग कैंप, अपहरण, फिरौती के लिए हत्या, आरएसएस और सीपीआईएम के कार्यकर्ताओं का मर्डर और बंगलुरु दंगों में भी इस संगठन की कथित संलिप्तता पाई गई है। पीएफआई अपने छुपे एजेंडे में तुर्की की विभाजनकारी योजना को भारतीय उपमहाद्वीप में फैलाना चाहता है।

इसके चलते 2016 में पीएफआई ने तुर्की राष्ट्रपति एरडोगन के तख्ता पलट को प्रेस वक्तव्य के जरिए बयान देकर अपना समर्थन दिया था। कर्नाटक दंगों की जांच के दौरान पुलिस ने 48 जगह छापेमारी की थी, जिसके तहत एसडीपीआई के दफ्तरों से भारी मात्रा में हथियार मिले थे। तुर्की के अल-कायदा समर्थक आतंकी संगठन आईएचएच के साथ पीएफआई के तार जुड़े रहे हैं। यह संगठन 73 बैंक शाखाओं में जमा कराए गए 120 करोड़ रुपये की राशि का इस्तेमाल देश विरोधी गतिविधियों में कर रहा है।

सूफी इस्लामिक बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष मंसूर खान और राष्ट्रीय प्रवक्ता सूफी मोहम्मद कौसर हसन मजीदी ने पीएफआई को अखिल भारतीय स्तर पर प्रतिबंधित किए जाने की मांग को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री को पत्र लिखा है। इसमें कहा गया है कि इस संगठन पर प्रतिबंध नहीं लगता है तो वे आंदोलन पर मजबूर होंगे। दूसरी तरफ दरगाह हजरत निजामुद्दीन औलिया के सूफी संस्कृति संगठन के महासचिव सयैद फरीद अहमद निजामी ने भी दिल्ली के एलजी अनिल बैजल को एक पत्र भेजकर पीएफआई के साथ अपने संबंधों को लेकर सफाई दी है। पिछले दिनों ऐसे आरोप लगे थे कि ऑल इंडिया सूफी सज्जादानशीं काउंसिल और पीएफआई के आपसी संबंध हैं।

निजामी ने पत्र में लिखा है कि दरगाह हजरत निजामुद्दीन औलिया सूफीवाद का आठ सौ साल पुराना केंद्र है। यह केंद्र हमेशा से सामाजिक एवं सांस्कृतिक एकता का प्रतीक रहा है। दूसरी ओर पीएफआई जैसे संगठन की भूमिका संदिग्ध रही है। वह कई जांच एजेंसियों के निशाने पर है। उस संगठन को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। हमारी भारत सरकार से मांग है कि सूफी संस्कृति के इस केंद्र को मदद प्रदान करें। उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, जो धर्म को एक टूल की तरह इस्तेमाल कर कट्टरता फैला रहे हैं।

पीएफआई के खिलाफ ताजा मामला अक्तूबर में सामने आया था। इसमें आरोप लगे थे कि मॉरिशस से पीएफआई को 50 करोड़ रुपये का फंड मिला है। जांच एजेंसी ने हाथरस मामले को लेकर उत्तर प्रदेश में जातीय दंगा भड़काने की साजिश रचे जाने की आशंका जताई थी। ईडी ने इस मामले में जांच शुरु की है। इस संबंध में दिल्ली से हाथरस जा रहे चार लोगों को गिरफ्तार किया गया था। यूपी सरकार ने दावा किया था कि उसके पास खुफिया एजेंसियों के पर्याप्त इनपुट हैं।

इनसे पता चलता है कि प्रदेश में जातीय हिंसा भड़काने की साजिश रची जा रही है। यह संगठन एनआईए के रडार पर भी रहा है। पिछले साल तमिलनाडु में एक हत्या के मामले में पीएफआई के 19 ठिकानों पर तलाशी ली गई थी। उक्त आरोपों के संबंध में पीएफआई के दिल्ली स्थित कार्यालय में फोन कर पक्ष लेने का प्रयास किया गया, लेकिन बात नहीं हो सकी।

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us