ताकत के दम पर यथास्थिति बदलने की चीन की कोशिश का दिया ठोस जवाब: रक्षा मंत्रालय

एजेंसी, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Wed, 06 Jan 2021 02:05 AM IST

सार

  • वार्षिक समीक्षा में किया पड़ोसी देश की तरफ से लद्दाख में गैर पारंपरिक हथियारों के इस्तेमाल का जिक्र
भारत-चीन (फाइल फोटो)
भारत-चीन (फाइल फोटो) - फोटो : ANI
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विस्तार

वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर एक से ज्यादा स्थानों पर ताकत के जरिये यथास्थिति बदलने के लिए चीनी सेना की एकतरफा और भड़काऊ कार्रवाई का ठोस जवाब दिया गया। यह बात रक्षा मंत्रालय ने अपनी वार्षिक समीक्षा रिपोर्ट में कही है। साथ ही मंत्रालय ने पूर्वी लद्दाख में चीनी सेना की तरफ से गैर पारंपरिक हथियारों का इस्तेमाल करने की बात भी स्वीकार की है। 
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रिपोर्ट में कहा गया है कि चीनी सेना के किसी भी दुस्साहस का मुकाबला करने के लिए भारतीय सैनिकों को अच्छी तरह तैनात किया गया है। भारतीय सेना किसी भी हालात से निपटने के लिए पूरी तरह तैया है। हालांकि इस मुद्दे को सौहार्दपूर्ण ढंग से हल करने के लिए चीन के साथ बातचीत भी आगे बढ़ रही है।


एलएसी पर मौजूदा तनाव के लिए चीन को दोषी ठहराते हुए मंत्रालय ने कहा है कि भारतीय सेना ने दोनों देशों के बीच सभी प्रोटोकोल और समझौतों को बनाए रखा है, जबकि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने गैर परंपरागत हथियारों और भारी संख्या में सैनिकों की तैनाती के जरिये हालात को भड़काने का प्रयास किया है। 

भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में आठ महीने से तीखा सीमा गतिरोध चल रहा है, जिसने उनके बीच के संबंधों में अहम दरार पैदा कर दी है। दोनों पक्षों ने विवाद को हल करने के लिए राजनयिक व सैन्य वार्ताओं की लंबी शृंखला चलाई है, लेकिन गतिरोध खत्म करने में कोई मदद नहीं मिली है। रक्षा मंत्रालय ने कहा, भारतीय वायुसेना की सहायता से भारतीय सेना ने बेहद कम समय में जवानों समेत भारी तोपों व टैँकों और हथियारों, राशन व कपड़ों को तैनात करने में सफलता हासिल की है। मंत्रालय का कहना है कि एलएसी पर कई जगह यथास्थिति को बदलने के लिए चीन द्वारा एकतरफा और उत्तेजक कार्रवाई की गई, लेकिन उन्हें इसका मजबूती से जवाब दिया गया।

गलवां घाटी की घटना का किया है जिक्र
गलवां घाटी में 15 जून को हुए टकराव का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया कि गलवां में एक अहम टकराव में 20 बहादुर भारतीय जवानों ने हमारी सीमा में घुसपैठ कर रहे पीएलए के जवानों को रोकते समय अपनी जान गवां दी। चीनियों को भी भारी संख्या में जवानों का नुकसान उठाना पड़ा। रिपोर्ट में 28 और 29 अगस्त की घटना का जिक्र भी है। साल के अंत की समीक्षा में यह ब्योरा भी दिया गया है कि चीनी सैनिकों के साथ 28 और 29 अगस्त को कैसे तनाव बढ़ा और अन्य भारतीय  क्षेत्रों पर चीनी सेना की ओर से कब्जे के प्रयास किए गए। इतना ही नहीं एलएसी पर हवा में गोलियां भी चलाई गईं। 28/29 अगस्त को एहतियात के तौर पर भारतीय सैनिकों द्वारा एक काउंटर ऑपरेशन में पैन्गोंग झील के दक्षिणी किनारे पर अहम चोटियों पर कब्जा करने का भी ब्योरा दिया गया है। रिपोर्ट में है कि खराब मौसम का बहादुरी से सामना करते हुए भारतीय जवान लगातार इन ऊंचाइयों पर डटे रहना चाहते हैं।

पाक के सीजफायर उल्लंघनों का भी जिक्र
रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर किस तरह भारतीय जवानों की उच्चस्तरीय सतर्कता ने कश्मीर घाटी में आतंकियों की घुसपैठ कराने के पाकिस्तान के इरादे विफल किए हैं। साथ ही पाकिस्तानी सेना की तरफ से किए जाने वाले सीजफायर उल्लंघनों का भारतीय जवानों की तरफ से मुंहतोड़ जवाब देने के कारण पड़ोसी देश की सेना को पहुंचे नुकसान की भी बात रिपोर्ट में दी गई है।

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