भाजपा के प्लान ए और बी से घबराई महबूबा, पीडीपी बचाने में जुटी

शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 11 Jul 2018 10:18 PM IST
Mehbooba Mufti Fear from BJP plan, try to protect PDP
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जम्मू-कश्मीर में राजनीति का नया रंग देखने में आ रहा है। पीडीपी की प्रमुख महबूबा के सामने पार्टी को टूट-फूट से बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है। एक के बाद एक नाराज विधायक सामने आ रहे हैं। पीपुल्स कॉन्फ्रेंस पार्टी के सज्जाद लोन भी सक्रिय हैं। इसी के साथ-साथ पीडीपी के बागी विधायकों की संख्या बढ़ने के संकेत हैं। घाटी के सूत्र इसके लिए भाजपा को जिम्मेदार मान रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि पीडीपी में बागियों को भाजपा से आक्सीजन मिल रहा है। इस बीच जम्मू-कश्मीर में भाजपा के अध्यक्ष रविंदर रैना और महबूबा सरकार में उप मुख्यमंत्री रहे निर्मल सिंह ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से भेंट की। समझा जा रहा है कि इस दौरान प्रधानमंत्री ने दोनों नेताओं से राज्य के ताजा हालात की जानकारी ली।
इससे पहले निर्मल सिंह और रैना ने जम्मू-कश्मीर के प्रभारी और पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री राम माधव और संगठन मंत्री राम लाल से भी भेंट की थी। राम माधव जम्मू-कश्मीर के मामले में लगातार सक्रिय हैं। पीडीपी के साथ गठबंधन में भी उनकी अहम भूमिका थी। एक सप्ताह पहले राम माधव और भाजपा के कुछ नेताओं मे पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के सज्जाद लोन ने भी भेंट की थी। इस भेंट को इसलिए भी अहम माना जा रहा है कि पीडीपी में लगातार बागियों की संख्या बढ़ रही है। ऐसे में घाटी और जम्मू दोनों स्थानों में नई सरकार के गठन की भी चर्चा तेजी से चल रही है। वहां के अखबारों में भाजपा के साथ गठबंधन की नई सरकार बनने की संभावना पर खबरें आ रही हैं। 

हालांकि राम माधव खुद ट्वीट करके इस तरह के कयास को खारिज कर चुके हैं। पार्टी के जम्मू-कश्मीर में सक्रिय सूत्र के अनुसार जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन है। केन्द्र में भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार है। ऐसे में राज्य में भाजपा फिर से सरकार बनाने को पहली वरीयता में क्यों रखेगी? सूत्र का कहना है कि फिलहाल इस तरह का कोई प्रयास नहीं चल रहा है। लेकिन भविष्य में यदि वातावरण अुनकूल रहा तो इस तरह की संभावना से कोई परहेज भी नहीं है।

बढ़ रहे हैं पीडीपी के बागी

इमराज रजा अंसारी, आबिद अंसारी, मोहम्मद अब्बास वानी और जावेद वेग महबूबा मुफ्ती के ऊपर पार्टी में परिवार वाद बढ़ाने का आरोप लगाकर लगातार बागी तेवर अपनाए हैं। कुल पांच विधायकों के बागी रुख अख्तियार करने के संकेत हैं। हालांकि इन विधायकों का दावा है कि उन्हें 14 अन्य विधायकों का भी समर्थन हासिल है। समय आने पर ये 14 विधायक उनके साथ पार्टी को छोड़ सकते हैं, लेकिन अभी इनमें से किसी भी विधायक ने पीडीपी की प्रथमिक सदस्यता से इस्तीफा देकर पीडीपी को छोड़ा नहीं है। जम्मू-कश्मीर में पीडीपी के कुल 28 विधायक हैं। 

इस तरह से पार्टी की प्रमुख महबूबा मुफ्ती के सामने नया संकट खड़ा हो गया है। वह पार्टी में प्रभाव बनाने के लिए लगातार डैमेज कंट्रोल में जुटी हैं। महबूबा के करीबी सूत्र पार्टी की इस स्थिति के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। उनका कहना है कि भाजपा के समर्थन वापस लेने के बाद वह पीडीपी को कमजोर करने की कोशिश में जुटी हुई है।
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