जाधव मामले में पाक का दावा चार साल से चले आ रहे झूठ का हिस्सा : विदेश मंत्रालय

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 09 Jul 2020 07:22 PM IST
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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव - फोटो : एएनआई

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भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से गुरुवार को प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। इस वार्ता में मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने इस महीने होने वाले भारत-यूरोपीय शिखर सम्मेलन और कोरोना वायरस के चलते विदेशों में फंसे भारतीयों को लाने के लिए शुरू किए गए वंदे भारत मिशन समेत कई मामलों पर जानकारी दी। 

प्रेस वार्ता के प्रमुख बिंदु

  • विदेशों में फंसे भारतीय नागरिकों को वापस लाने के लिए शुरू किए गए वंदे भारत अभियान का चौथा चरण चल रहा है। इस चरण में 637 अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का निर्धारण पहले ही किया जा चुका है और ये उड़ानें भारत के 29 एयरपोर्ट से संचालित होंगी। 
  • आठ जुलाई 2020 तक के डाटा के अनुसार विदेशों में फंसे छह लाख 61 हजार 352 भारतीय नागरिकों ने देश वापस आने के लिए पंजीकरण कराया था। अब तक इस अभियान के तहत पांच लाख 80 हजार से ज्यादा लोग वापस आ चुके हैं। 
  • कुलभूषण जाधव के मामले में पाकिस्तान का दावा उसके चार साल से चले आ रहे झूठ का हिस्सा है। पाक ने दावा किया था कि उसने 17 जून 2020 को जाधव को उनकी सजा पर पुनर्विचार के लिए एक याचिका दायर करने के लिए आमंत्रित किया था, लेकिन जाधव ने इससे इनकार कर दिया था।
  • जाधव के मामले में अंतरराष्ट्रीय अदालत के फैसले का पूरी तरह से और प्रभावी क्रियान्वयन हो इसके लिए हम राजनयिक माध्यमों से आगे बढ़ रहे हैं।भारत जाधव को बचाने और सुरक्षित वापसी के लिए हर संभव कोशिश करेगा।
  • अमेरिका के एफ-1 वीजा को लेकर आए दिशानिर्देश पर श्रीवास्तव ने कहा, हम इस संभावना को लेकर चिंतित हैं कि इससे अमेरिका में पढ़ रहे बड़ी संख्या में भारतीय छात्र वापस आ सकते हैं। हमने इस संबंध में अमेरिका को अपनी चिंताओं से वाकिफ कराया है।
  • केरल में तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर सोना मिलने के मामले में उन्होंने कहा कि यूएई की एम्बेसी को इसकी जानकारी दे दी गई है। यूएई मिशन ने इस मामले की जांच के लिए सीमा शुल्क अधिकारियों को हर संभव सहयोग उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है। जांच चल रही है।
  • पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच सीमा विवाद की स्थिति को लेकर मंत्रालय ने कहा कि सैन्य और राजनयिक अधिकारी सैनिकों की संख्या घटाने की प्रक्रिया को लेकर वार्ताओं का दौर जारी रखेंगे। हम सीमा क्षेत्रों में शांति के लिए और बातचीत के माध्यम से मतभेदों के समाधान के लिए आश्वस्त हैं।
  • भारत अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता सुनिश्चित करने के लिए दृढ़ता से प्रतिबद्ध है। एलएसी का हर स्थिति में सम्मान होना चाहिए और निगरानी होनी चाहिए क्योंकि यह सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति का आधार है। 
  • चीनी विदेश मंत्री के साथ बातचीत में, एनएसए अजीत डोभाल ने गलवां घाटी सहित एलएसी के साथ भारत के घटनाक्रम से अवगत कराया। डोभाल ने इस दौरान कहा था कि सीमा प्रबंधन को लेकर भारतीय सैनिकों का रुख हमेशा जिम्मेदारी भरा होता है। 
  • श्रीवास्तव ने कहा कि सीमा के सवाल पर पर भारत और चीन के विशेष प्रतिनिधियों ने पांच जुलाई 2020 को टेलीफोन पर बातचीत की थी। उन्होंने माना कि सीमा क्षेत्र में शांति द्विपक्षीय संबंधों के समग्र विकास के लिए भी आवश्यक है। 
  • दोनों देशों के प्रतिनिधि इस बात पर भी सहमत हुए कि दोनों पक्षों को भविष्य में किसी भी अप्रिय और तनाव बढ़ाने वाली घटना से बचने के लिए मिलकर काम करना चाहिए ताकि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति भंग की स्थिति न आए।
  • श्रीवास्तव ने कहा कि भारत-चीन सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय के लिए कार्य तंत्र (डब्ल्यूएमसीसी)की अगली बैठक जल्द ही होने की उम्मीद है।
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