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मणिपुर विधानसभा चुनाव: इन मुद्दों पर आधारित रहेगी चुनावी जंग, सहयोगी दलों की नाराजगी से भाजपा को होगा नुकसान!

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंफाल Published by: गौरव पाण्डेय Updated Fri, 14 Jan 2022 04:45 PM IST

सार

उत्तर-पूर्वी राज्य मणिपुर में दो चरणों में विधानसभा चुनाव होने हैं। इस बार जंग कांग्रेस और भाजपा के बीच तो है ही, पिछली बार भाजपा के सहयोगी रहे दो स्थानीय दल भी भगवा दल के खिलाफ उतरने की तैयारी में हैं। 
मुख्यमंत्री एन बिरेन सिंह (फाइल फोटो)
मुख्यमंत्री एन बिरेन सिंह (फाइल फोटो) - फोटो : Facebook
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विस्तार

हाल में हुए आतंकी हमलों के बीच 60 सदस्यीय विधानसभा वाला उत्तर-पूर्वी राज्य मणिपुर विधानसभा चुनावों के लिए तैयार है। यहां कांग्रेस जहां सत्ताधारी भाजपा की अगुवाई वाले गठबंधन को हराने की कोशिश में है, जिसकी राजनीतिक दीवार में कई दरारें देखने को मिल रही हैं। ऐसा गठबंधन के छोटे हिस्सेदारों की ओर से भाजपा के खिलाफ उम्मीदवार खड़े करने के फैसले की वजह से हुआ है। 

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राज्य में मुख्य चुनावी लड़ाई कांग्रेस और भाजपा के बीच है। इस चुनाव में पार्टियों के मुख्य एजेंडा में कानून और व्यवस्था के अलावा विवादित सशस्त्र बल विशेष शक्तियां अधिनियम (अफ्स्पा) और आर्थिक चुनौतियों के शामिल रहने की उम्मीद है। प्रदेश में दो चरणों में चुनाव होने हैं। पहले चरण का मतदान 27 फरवरी और दूसरे चरण का तीन मार्च को होगा। वहीं, परिणाम 10 मार्च को आएंगे।

पिछले चुनाव में भाजपा ने जीती थीं 21 तो कांग्रेस ने 28 सीटें
2017 के विधानसभा चुनाव में यहां पर भाजपा ने 21 सीटों पर जीत हासिल की थी जबकि कांग्रेस के खाते में 28 सीटें आई थीं। इसके बाद भी भाजपा ने दो स्थानीय पार्टियों एनपीपी (नेशनल पीपल्स पार्टी) और एनपीएफ (नगा पीपल्स फ्रंट) से हाथ मिलाते हुए सरकार बना ली थी। इस बार भाजपा का दावा है कि वह आगामी विधानसभा चुनाव में दो तिहाई सीटों पर जीत हासिल करने वाली है।

इस बार 40 सीटें जीतने के लक्ष्य के साथ चल रही है भाजपा
मणिपुर भाजपा के उपाध्यश्र चिदानंद का कहना है कि हमारी पार्टी का लक्ष्य 40 सीटों पर जीत हासिल करने का है। गठबंधन में रार की खबरों को लेकर उन्होंने कहा कि राज्य के पर्वतीय इलाके में मुख्य लड़ाई भाजपा और एनपीएफ के बीच रहेगी। इस क्षेत्र में एनपीएफ का वर्चस्व है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 31 विधायक अथवा पूर्व विधायकों समेत 160 लोग टिकट की दावेदारी कर रहे हैं।

एनपीएफ और एनपीपी की नाराजगी बढ़ा सकती है समस्या
एनपीएफ और एनपीपी, दोनों ने ही भाजपा के खिलाफ अपने-अपने प्रत्याशी खड़े करने का फैसला किया है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि भाजपा के भीतर आए मतभेद और एनपीपी व एनपीएफ के सहयोगियों के बीच इसके हिंदुत्व कार्ड को लेकर नाखुशी ने गठबंधन के भागीजारों के बीच समस्याएं पैदा कर दी हैं। इसके चलते राज्य में भगवा दल की संभावना पर असर पड़ सकता है।

चुनाव के बाद बन सकती है गठबंधन की संभावना
समाचार एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार मणिपुर के लेखक, संपादक और उत्तर-पूर्व पर विशेषज्ञ प्रदीप फंजउबाम का कहना है कि यद्यपि अभी किसी चुनाव पूर्व गठबंधन की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन संभव है कि हम चुनाव के बाद एक गठबंधन की स्थित देखने को मिले। उन्होंने कहा कि किसी पार्टी की स्पष्ट जीत के आसार अभी भी नहीं हैं और ऐसा सरकार का गठन करने के लिए किया जा सकता है।
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