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Maharashtra Politics: गद्दारी, गदर और खोखे के बीच शिंदे और ठाकरे तलाश रहे 'हिंदुत्व की जमीन'

Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Thu, 06 Oct 2022 07:38 PM IST
सार

Maharashtra Politics: महाराष्ट्र की राजनीति बीते कुछ दिनों से एक बार फिर से गर्म हो गई है। इस बार गर्म हुई महाराष्ट्र की राजनीति के पीछे दशहरे पर होने वाला वह बड़ा कार्यक्रम था, जब पहली बार दो बड़े नेता एक ही राजनीति और एक ही मुद्दे को लेकर अपना अपना दावा ठोक रहे थे...

Maharshtra Politics- Uddhav Thackeray Vs Eknath Shinde
Maharshtra Politics- Uddhav Thackeray Vs Eknath Shinde - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

दशहरे पर मुंबई के दो बड़े मैदानों से जब दो बड़े नेताओं ने जुबानी जंग छेड़ी, तो महाराष्ट्र ही नहीं बल्कि दिल्ली की राजनीति में भी तपिश शुरू हो गई। कहने को तो यह लड़ाई महाराष्ट्र की सरजमीं पर सरकार समेत असली और नकली शिवसेना को लेकर थी, लेकिन इस पूरी लड़ाई में मसला हिंदुत्व की जमीन तलाशने का था। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे हो या पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे।



दोनों लोगों ने जब जुबानी जंग शुरू की, तो उस जंग की शुरुआत से लेकर आखिर तक सिर्फ और सिर्फ हिंदुत्व को तलाशने और असली हिंदूवादी नेता और हिंदुत्ववादी पार्टी होने का दम भरा जाता है। राजनैतिक विश्लेषक भी मानते हैं कि महाराष्ट्र में असली और नकली शिवसेना के साथ असली हिंदुत्ववादी नेता का ठप्पा लगना ही आने वाले चुनावों में हार-जीत का सर्टिफिकेट होगा।

असली-नकली की लड़ाई या कुछ और

दरअसल महाराष्ट्र की राजनीति बीते कुछ दिनों से एक बार फिर से गर्म हो गई है। इस बार गर्म हुई महाराष्ट्र की राजनीति के पीछे दशहरे पर होने वाला वह बड़ा कार्यक्रम था, जब पहली बार दो बड़े नेता एक ही राजनीति और एक ही मुद्दे को लेकर अपना अपना दावा ठोक रहे थे। महाराष्ट्र की राजनीति को करीब से समझने वाले रोमेश तलपड़े कहते हैं कि महाराष्ट्र में जितनी लड़ाई असली और नकली शिवसेना की है उससे कहीं ज्यादा लड़ाई असली और नकली हिंदुत्ववादी नेता और पार्टी की भी है। तलपड़े कहते हैं कि दशहरे पर शिवाजी पार्क और बीकेसी में हुई रैली का सार अगर आप निकालेंगे तो पता चलेगा कि सारी लड़ाई हिंदुत्ववादी छवि को उजागर करके आने वाले दिनों के चुनावों में हिंदूवादी नेता और पार्टी के तौर पर उभरने की ही रही है।

वह कहते हैं कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अपने संबोधन में खुलकर कहा कि उन्होंने शिवसेना के पितामह बाला साहब ठाकरे के सपनों को साकार करने के लिए ही भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाई है। वह कहते हैं बाला साहब ठाकरे ने ही कश्मीर में 370 हटाने और राम मंदिर बनाने का सपना देखा था। वह सपना नरेंद्र मोदी की सरकार ने पूरा किया है। उनका कहना है कि बालासाहब ठाकरे के सपनों को पूरा करने वालों के साथ अगर वह नहीं होंगे, तो असली हिंदुत्ववादी कौन होगा। शिंदे ने खुलकर गद्दार और खोखे जैसे लगाए जाने वाले आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वह कोई गद्दार नहीं है, बल्कि उन्होंने तो गदर किया है, क्रांति की है हिंदुत्ववादी नेता बाला साहब ठाकरे के सपनों को साकार करने के लिए।

Eknath Shinde
Eknath Shinde - फोटो : ANI

असली लड़ाई शिवसेना से ज्यादा हिंदुत्व की

महाराष्ट्र के वरिष्ठ पत्रकार हिमांशु कहते हैं कि दरअसल आने वाले दिनों में महाराष्ट्र में म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के चुनाव होने हैं। बीएमसी का होने वाला चुनाव महाराष्ट्र में खासकर मुंबई में चलने वाली सरकार के बराबर ताकत रखता है। ऐसे में असली लड़ाई शिवसेना से ज्यादा हिंदुत्व की है। हिमांशु कहते हैं कि सिर्फ एकनाथ शिंदे ही नहीं, बल्कि शिवाजी पार्क में दशहरा रैली को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने भी असली हिंदुत्व की बात कही। उद्धव ठाकरे ने कहा उन्होंने बालासाहब के विचारों को नहीं छोड़ा है। उन्होंने भाजपा को चुनौती देते हुए कहा कि वह एक मंच पर आकर हम से चर्चा करें, तो बताया जाएगा कि उनका हिंदुत्व क्या है। शिवाजी पार्क में लोगों को संबोधित करते हुए जब उद्धव ठाकरे यह कह रहे थे कि भाजपा का साथ छोड़ने का मतलब हिंदुत्व छोड़ना नहीं होता है तो सीधे तौर पर यह साबित करना चाह रहे थे कि उन्होंने हिंदुत्व का ना तो साथ छोड़ा है ना हिंदुत्व छोड़ा है।

आदित्य ठाकरे, उद्धव ठाकरे
आदित्य ठाकरे, उद्धव ठाकरे - फोटो : ANI

हिंदुत्व का असली झंडाबरदार बताने की कोशिश

दरअसल शिवसेना के नेता रहे एकनाथ शिंदे ने जब से महाराष्ट्र में भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाई है, तब से लड़ाई असली और नकली शिवसेना के साथ-साथ असली और नकली हिंदुत्व का दम भरने वाले नेता और पार्टी की भी चल रही है। वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक हिमांशु कहते हैं कि शिवसेना की जड़ में हिंदुत्व है। बाला साहब ठाकरे ने पार्टी का गठन किया तो उन्होंने उसी हिंदुत्व के सहारे अपनी पार्टी को आगे बढ़ाना शुरू किया, जो आज की तारीख में भाजपा के मुद्दे भी हैं। हिमांशु कहते हैं कि यही वजह है कि शिवसेना और भाजपा मिलकर हिंदुत्व के मुद्दे पर राजनीति करते रहे और प्रमुख मुद्दों पर एक राय होकर आगे की रणनीति भी बनाते रहे। क्योंकि बीते कुछ दिनों में ऐसे हालात बने जिसमें 2019 की सरकार में वर्षों से चले आ रहे गठबंधन को झटका लगा और शिवसेना भाजपा से अलग हो गई।

वह कहते हैं, जब शिवसेना ने महाराष्ट्र में एनसीपी और कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाई थी, तभी से यह चर्चा होने लगी थी कि शिवसेना ने अपने जड़ में पड़ी हिंदुत्ववादी राजनीति को छोड़ना शुरू कर दिया है। लेकिन पूरी कसर बीते कुछ महीने पहले एकनाथ शिंदे ने तब पूरी कर दी, जब वह शिवसेना से विधायकों को तोड़कर भाजपा के साथ मिलकर नई सरकार बना ले गए। राजनीतिक विश्लेषक अमोल शितोले कहते हैं कि महाराष्ट्र में हिंदुत्ववादी एजेंडा और मुद्दा शुरुआत से ही हावी रहा है। यही वजह है कि एकनाथ शिंदे और ठाकरे परिवार खुद को हिंदुत्व का असली झंडाबरदार बताने की कोशिश कर रहा है। यही कारण है कि दशहरे पर अलग-अलग मैदानों में हुई दशहरा रैली में दोनों नेताओं ने ताल ठोक कर खुद को असली हिंदुत्ववादी नेता और असली हिंदुत्ववादी पार्टी के तौर पर पेश करने की कोशिश की।
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