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Exit Polls: उत्तर प्रदेश में भाजपा ने बचा ली अपनी जमीन, सपा-बसपा को झटका

चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 20 May 2019 07:44 AM IST
उत्तर प्रदेश एग्जिट पोल
उत्तर प्रदेश एग्जिट पोल - फोटो : Amar Ujala
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इधर, 19 मई को शाम 6 बजे मतदान खत्म हुआ, उधर एग्जिट पोल का दौर शुरू हो गया। सबकी नजर इस ओर थी कि क्या भाजपा यूपी में 2014 वाला करिश्मा दोहरा पाएगी। एग्जिट पोल में वैसारुझान तो नहीं दिखा, लेकिन सर्वे के मुताबिक भाजपा को वैसा नुकसान होता नहीं दिख रहा है जैसा की अनुमान जताया जा रहा था। अधिकतर एजेंसियां भाजपा को 50 से ज्यादा सीटें दे रही हैं। अगर अनुमान सही साबित हुआ तो भाजपा को बहुमत तक पहुंचने में आसानी होगी।  

सपा-बसपा पर भारी भाजपा 

एग्जिट पोल नतीजे बता रहे हैं कि भाजपा ने सपा-बसपा गठबंधन को न सिर्फ जबरदस्त टक्कर दी है बल्कि उस पर भारी पड़ी है। चुनाव से पहले जब सपा-बसपा गठबंधन ने आकार लिया था तो सभी ने यही मान लिया था कि भाजपा 20-30 सीटें भी लाई पाई तो बड़ी बात होगी। लेकिन भाजपा फिलहाल इसे गलत अनुमान ही साबित करती नजर आ रही है। 
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यूपी में इस बार भाजपा-सहयोगियों और सपा-बसपा गठबंधन में जबरदस्त घमासान मचा है। सपा-बसपा ने चुनाव से ऐन पहले गठबंधन कर भाजपा की पूरी रणनीति को बिगाड़ दिया। सपा-बसपा के साथ रालोद भी जुड़ गया। हालांकि कांग्रेस अलग थलग पड़ गई, लेकिन उसने प्रियंका गांधी को पूर्वी उत्तर प्रदेश की कमान देकर लड़ाई को दिलचस्प बना दिया। प्रियंका ने न सिर्फ यूपी बल्कि पूरे देश में कांग्रेस के लिए प्रचार व रोड शो किया जिसमें जबरदस्त भीड़ उमड़ी। 

2014 लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में भाजपा-सहयोगियों ने मोदी लहर में 73 सीटें जीती थीं। सपा को पांच, कांग्रेस को दो सीटें मिली थीं। बसपा को सबसे बड़ा झटका लगा था और उसका खाता तक नहीं खुल पाया था। इस बार सपा-बसपा ने गठबंधन कर भाजपा की लड़ाई को मुश्किल बना दिया। 
 
भाजपा को केंद्र की सत्ता तक पहुंचाने में यूपी ने ही सबसे बड़ी भूमिका निभाई थी। लेकिन इस बार भाजपा के खिलाफ सपा-बसपा का गठबंधन अस्तित्व में आया। ये गठबंधन भाजपा को गोरखपुर, फूलपुर और कैराना लोकसभा उपचुनाव में जबरदस्त झटका दे चुका था। भाजपा के लिए ये तीनों सीटें प्रतिष्ठा की सीटें थीं। गोरखपुर सीट यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ जबकि फूलपुर की सीट डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के इस्तीफा देने से खाली हुई थी।

यूपी में भाजपा की सहयोगी रही ओमप्रकाश राजभर की पार्टी भी चुनाव से पहले अलग हो गई।  ऐसे में अमित शाह ने भी चुस्त रणनीति बनाते हुए सपा के कई बड़े नेताओं को भाजपा में शामिल कराया। अपना दल से चतुराई भरा गठबंधन किया। अपना दल ने 2014 में दो सीटें जीती थीं।

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