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Parliament: ओवैसी ने हाफिज सईद और मसूद अजहर को भारत लाने की उठाई मांग, अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति पर सरकार को घेरा

Wed, 11 Feb 2026 11:52 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु चंदेल Updated Wed, 11 Feb 2026 11:52 PM IST
सार

लोकसभा में ओवैसी ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए ऑपरेशन इंसाफ शुरू कर आतंक आरोपियों को भारत लाने, कुलभूषण जाधव की वापसी और गाजा दौरे की मांग की। उन्होंने सेना में संसाधनों की कमी, दिव्यांग सैनिकों के टैक्स लाभ खत्म करने और अग्निपथ योजना पर सवाल उठाए। आइए विस्तार से जानते हैं ओवैसी संसद में क्या कुछ कहा।

Lok Sabha AIMIM chief Asaduddin Owaisi on Hafiz Saeed Masood Azhar PM visit gaza ops sindoor Muslims education
सासंद ओवैसी - फोटो : ANI
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विस्तार

    लोकसभा में आज एआईएमएम प्रमुख और सांसद ओवैसी ने केंद्र सरकार पर कई मोर्चों पर सीधा हमला बोला और राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति, सशस्त्र बलों की स्थिति और अल्पसंख्यक शिक्षा जैसे मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने सरकार से आतंकवाद से जुड़े आरोपियों को भारत लाने, कुलभूषण जाधव को वापस लाने और फलस्तीन के गाजा क्षेत्र का दौरा करने की अपील की। उनके भाषण के दौरान सदन में काफी हलचल भी देखने को मिली।



    ओवैसी ने कहा कि सरकार को ऑपरेशन इंसाफ शुरू करना चाहिए, जिसके तहत हाफिज सईद, मसूद अजहर और लखवी जैसे लोगों को भारत लाया जाए। उन्होंने कहा कि तभी असली न्याय होगा। उन्होंने कुलभूषण जाधव का मुद्दा उठाते हुए पूछा कि उन्हें वापस लाने के लिए क्या कदम उठाए गए। साथ ही उन्होंने कहा कि जब प्रधानमंत्री इस्राइल जा रहे हैं तो उन्हें गाजा भी जाना चाहिए और वहां की स्थिति देखनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि वहां बड़ी संख्या में फलस्तीनियों की मौत हुई है।

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    ऑपरेशन इंसाफ और विदेश नीति पर सवाल
    ओवैसी ने अपने भाषण में कहा कि आतंकवाद से जुड़े मामलों में केवल बयानबाजी से काम नहीं चलेगा, ठोस कार्रवाई जरूरी है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों पर भारत विरोधी गतिविधियों के आरोप हैं, उन्हें भारत लाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव बनाया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कुलभूषण जाधव का मामला अब चर्चा से बाहर होता जा रहा है, जो चिंता की बात है। उनके मुताबिक सरकार को इस मुद्दे पर स्पष्ट नीति बतानी चाहिए।

    सेना की ताकत और संसाधनों की कमी का मुद्दा
    ओवैसी ने सशस्त्र बलों से जुड़े मुद्दों को भी उठाया। उन्होंने कहा कि पहले दिव्यांग सैनिकों को आयकर में छूट मिलती थी, लेकिन सरकार ने वह लाभ वापस ले लिया। उन्होंने इसे अन्याय बताया। उन्होंने कहा कि पिछले 11-12 साल में वायुसेना के स्क्वाड्रन की संख्या घटकर 29 रह गई है। मिड-एयर रिफ्यूलर और एडब्ल्यूएसीएस विमानों की संख्या भी नहीं बढ़ पाई है। उन्होंने कहा कि पनडुब्बियों की कमी है और तीसरे एयरक्राफ्ट कैरियर का मुद्दा भी आगे नहीं बढ़ रहा। उन्होंने अग्निपथ योजना की समीक्षा और चीन सीमा मुद्दे पर बहस की मांग की।

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    अल्पसंख्यकों की छात्रवृत्ति पर भी उठाए सवाल
    ओवैसी ने अल्पसंख्यक शिक्षा के आंकड़े पेश करते हुए कहा कि 2016-17 में शिक्षा में मुसलमानों की हिस्सेदारी 4.87 प्रतिशत थी, जो 2019-20 में बढ़कर 5.45 प्रतिशत हुई, लेकिन 2021 में घटकर 4.64 प्रतिशत रह गई। उन्होंने पूछा कि यह गिरावट क्यों आई। उन्होंने कहा कि तीन छात्रवृत्ति योजनाएं हैं, लेकिन आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति से पांच साल से मंजूरी नहीं मिली। बजट पास होता है, लेकिन फंड जारी नहीं होता।

    विकसित भारत के दावे पर उठाए सवाल
    ओवैसी ने कहा कि सरकार विकसित भारत की बात करती है, लेकिन अगर बड़ी आबादी को शिक्षा और सामाजिक रूप से मजबूत नहीं किया जाएगा तो यह लक्ष्य पूरा नहीं होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि योजनाएं कागज पर हैं, लेकिन जमीन पर उनका असर नहीं दिख रहा। उन्होंने कहा कि देश तभी मजबूत बनेगा जब हर वर्ग को बराबर अवसर मिलेगा। उनके बयान के बाद सदन में पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी प्रतिक्रिया भी देखने को मिली।


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