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कुरुक्षेत्र: कांग्रेस और योगी आदित्यनाथ दोनों पर पड़ी भाजपा के 'ऑपरेशन जितिन' की दोहरी मार

Vinod Agnihotri विनोद अग्निहोत्री
Updated Thu, 10 Jun 2021 07:21 PM IST

सार

भाजपा के ऑपरेशन जितिन ने एक तरफ तो कांग्रेस और सोनिया राहुल प्रियंका को चोट दी है, तो दूसरी तरफ पार्टी के भीतर ही बगावती मूड में चल रहे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इस कदर असहज किया कि अगले दिन ही यानी गुरुवार की दोपहर योगी आदित्यनाथ को अचानक दिल्ली आकर गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक जाने को मजबूर होना पड़ा है...
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कांग्रेस नेता जितिन प्रसाद और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।
कांग्रेस नेता जितिन प्रसाद और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। - फोटो : Amar Ujala (File)
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विस्तार

आखिरकार पूर्व केंद्रीय मंत्री और उत्तर प्रदेश के प्रमुख नेताओं में शुमार जितिन प्रसाद ने भी कांग्रेस का दामन छोड़कर उस संघ परिवार के अनुषांगिक संगठन भाजपा का दामन थाम लिया, जिससे कभी उनके पिता जितेंद्र प्रसाद यानी बाबा साहब और दूसरे पूर्वज लड़ते रहे हैं। जितिन प्रसाद का एकाएक ऐसे मौके पर भाजपा में शामिल होना जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय नेतृत्व के बीच घमासान जगजाहिर हो चुका है, सिर्फ चौंकाता ही नहीं है बल्कि यह संकेत भी देता है कि प्रसाद को लाकर भाजपा के केंद्रीय रणनीतिकारों ने एक ऐसा दांव खेला है जिससे एक तरफ कांग्रेस और उसके प्रथम परिवार की ताकत घटी है तो भाजपा के भीतर योगी खेमा भी बैकफुट पर आ गया है।
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भाजपा के ऑपरेशन जितिन ने एक तरफ तो कांग्रेस और सोनिया राहुल प्रियंका को चोट दी है, तो दूसरी तरफ पार्टी के भीतर ही बगावती मूड में चल रहे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इस कदर असहज किया कि अगले दिन ही यानी गुरुवार की दोपहर योगी आदित्यनाथ को अचानक दिल्ली आकर गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक जाने को मजबूर होना पड़ा है।


जितिन कार्ड ने योगी को क्यों असहज किया है इसका सबसे बड़ा संकेत है कि बुधवार को दिल्ली में जब जितिन प्रसाद को भाजपा में शामिल किया गया तो उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह या प्रदेश भाजपा का कोई भी अन्य पदाधिकारी उस संवाददाता सम्मेलन में मंच पर मौजूद नहीं था। जबकि आमतौर पर जब भी किसी प्रदेश का कोई बड़ा नेता अगर दिल्ली में पार्टी में शामिल होता है तो केंद्रीय नेताओं के साथ उस प्रदेश के अध्यक्ष या कोई अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी जरूर मंच पर मौजूद रहते हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में शामिल होने पर मध्यप्रदेश के भाजपा नेता और प. बंगाल के नेताओं के भाजपा में आने पर प. बंगाल भाजपा के अध्यश्र दिलीप घोष और अन्य नेता मौजूद रहते रहे हैं।
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