'किसान रेल' बदल देगी हजारों किसानों की जिंदगी, होंगे ये बड़े फायदे

अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Updated Wed, 12 Aug 2020 10:19 AM IST
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'किसान रेल' को हरी झंडी दिखाते रेल मंत्री पियूष गोयल
'किसान रेल' को हरी झंडी दिखाते रेल मंत्री पियूष गोयल

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भारत की पहली ‘किसान रेल’ कृषि विकास और भारतीय रेल के इतिहास में नई इबारत लिखने जा रही है। देश की इस पहली किसान स्पेशल पार्सल रेल के कारण अगर 50 फीसदी उपज का भी ट्रांसपोर्टेशन किया जाता है तो इससे लगभग 45 करोड़ रुपये की हानि को रोका जा सकेगा। सुपर फास्ट गति से चलने वाली  यह ट्रेन सप्ताह में दो बार शुक्रवार और सोमवार को महाराष्ट्र के देवलाली से बिहार के दानापुर तक और वापसी में बिहार से महाराष्ट्र तक चल रही है।
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किसान रेल के चलने से इस इलाके में पैदा होने वाली फल और सब्जी की उपज का 50 फीसदी बचाया जा सकेगा। कृषि कल्याण मंत्रालय के मुताबिक इस रेल के चलने से किसानों की राह आसान होगी और उनकी उपज नष्ट होने से बचेगी  एवं उन्हें सही कीमत मिल सकेगी। इससे उनकी आय को 2022 तक दोगुना करने का लक्ष्य को प्राप्त करने में भी आसानी होगी।  
देश में अपनी तरह की यह पहली ट्रेन शुक्रवार को पहली बार रवाना हुई। पूरी तरह से यात्रियों रहित किसानों के लिए चलने वाली इस ट्रेन में फल-सब्जियां, मछली-मांस, दूध और जल्द खराब होने वाली खाद्द सामग्री की ढुलाई की जाएगी।  इसके अलावा हर साल इस मौसम में होने वाली प्याज की फसल की किल्लत से भी निजात मिलेगी। बता दें कि नासिक इस मौसम में सबसे ज्यादा प्याज का उत्पादन करता है।
लेकिन मजबूत परिवहन के साधन न होने के कारण लगभग 50 फीसदी उपज सड़ कर चली जाती है। अब किसान रेल के चलते यह प्याज आसानी से यूपी, बिहार समेत अन्य राज्यों तक पहुंच सकेगा।
सप्ताह में दो बार यह ट्रेन 64 घंटे में 33,38 किलोमीटर का सफर तय करेगी।  वातानूकुलित डिब्बों के कारण इसमें रखे सामान जल्द खराब होने से भी बचेंगे। साथ ही इनकी निर्बाध आपूर्ति में भी सहायता मिलेगी।

चार राज्यों से होकर गुजरने वाली ट्रेन बिहार, मध्य प्रदेश , यूपी और महाराष्ट्र जाएगी। जहां इसका पहला पड़ाव नासिक रोड इसके बाद मनमांड, भुस्सावल, बुहानपुर, खंडवा इटारसी, जबलपुर, सतना, माणिकपुर,  प्रयागराज चौकी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन और बक्सर स्टेशनों से होते हुए अपने गंतव्य पर पहुंचेगी।

रेल मंत्री पीयूष गोयल ने ट्रेन के संचालन को एतिहासिक करार दिया था उन्होंने कहा था कि यह रेल खेती करने वाली आय को दोगुना करने में न केवल मदद करेगी बल्कि इसकी मदद से खाद्द पदार्थों की निर्बाध आपूर्ति  भी सुनिश्चित होगी। उन्होंने कहा था कि  1853 में शुरु हुई पहली रेलगाड़ी से किसान रेल तक का सफर भारतीय रेल के शानदार सफर की कहानी बंया करता है।

आइसीएआर सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्ट हार्वेस्ट इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी सीआईपीएचईटी ने 9 अगस्त 2016 को एक रिपोर्ट जारी की थी।  इसके मुताबिक हर साल तकरीबन 92 हजार के खाद्द पदार्थ खराब हो जाते हैं। इसमें  दूध, मीट, मछली, अंडा, अनाज, फल, सब्जी, आदि खाद्य उत्पादों की बात करें तो इसमें से देश भर में हर साल औसतन 40,811 करोड़ रुपए के खाद्य उत्पाद खराब हो जाते हैं।  

इसमें सबसे अधिक 1235 करोड़ रुपये के मीट, 4315 करोड़ की समुद्री मछली और 4409 करोड़ के दूध और उससे बने उत्पाद एवं 3877 करोड़ की दालें शामिल हैं। परिवहन से लेकर कोल्ड स्टोरेज, बारिश पानी, गर्मी और मौसमी मार के चलते होने वाली हानि शामिल है। जो अब इस ट्रेन के चलने से एक अनुमान के मुताबिक खासी कम हो जाएगी। केंद्र सरकार की योजना इसी तरह की और ट्रेन चलाने की है। किसान इसके लिए पहले से बुकिंग करा सकेंगे।
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