Farmers Protest: किसान नेताओं को एनआईए समन के बाद और बढ़ी 'कड़वाहट'

सार

  • पंजाब के 32 किसान संगठनों की बैठक में ट्रैक्टर परेड की बनी रणनीति में तीन विकल्पों पर चर्चा
  • संयुक्त किसान मोर्चा की रविवार की बैठक में देश भर के किसान संगठन करेंगे मंथन
  • सुप्रीम कोर्ट की सोमवार की सुनवाई और मंगलवार की सरकार से वार्ता के आधार पर बदलेगा 'ट्रैक्टर परेड का गियर'
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Dev Kashyap हरि वर्मा, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप
Updated Sun, 17 Jan 2021 12:39 AM IST
किसान आंदोलन
किसान आंदोलन - फोटो : अमर उजाला

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विस्तार

किसान आंदोलन में एनआईए समन के बाद अब 'कड़वाहट' और बढ़ गई है। आंदोलन से जुड़े 20 किसान नेताओं समेत करीब सौ लोगों को एनआईए ने फंडिंग से लेकर अन्य 'लिंक' को लेकर पूछताछ के लिए समन भेजा है। इनमें किसान नेताओं के अलावा धार्मिक और सामाजिक संगठनों के प्रमुखों के साथ-साथ कलाकार, ट्रांसपोर्टर, आढ़तिए, पेट्रोल पंप संचालक, जत्थेदार व कई संदेह के दायरे वाले शामिल हैं।
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इनसे पूछताछ के सिलसिले की शुरुआत एनआईए रविवार से अलग-अलग तारीखों पर करने जा रही है। उधर, शनिवार को ही पंजाब से जुड़े 32 किसान संगठनों की बैठक में 26 जनवरी के ट्रैक्टर परेड, एनआईए के ताजा समन, शुक्रवार की सरकार से हुई वार्ता और दसवें दौर की 19 जनवरी को होने वाली वार्ता पर चर्चा हुई। ट्रैक्टर परेड के तीन विकल्पों पर मंथन हुआ, जो सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर निर्भर है।


करीब सौ को एनआईए का समन
एनआईए ने फंडिंग को लेकर करीब सौ लोगों को समन भेजा है। भाकियू डकौंदा के बूटा सिंह बुर्जगिल का दावा है कि इनमें जत्थेदार भी शामिल हैं। एनआईए समन पर पंजाब के किसान संगठनों की शनिवार की बैठक में चर्चा हुई और सरकार के रवैये पर चिंता जताई गई। तय हुआ कि सरकार से 19 की प्रस्तावित वार्ता में इस पर सवाल किए जाएंगे। पिछली बैठक मे भी आंदोलनकारी किसानों और समर्थकों पर 'दमन' के खिलाफ सरकार के सामने विरोध जताया गया था। तब सरकार से 'भरोसा' मिला था।

किसान नेताओं का मानना है कि आनन-फानन में रविवार को एनआईए ने पूछताछ के लिए तलब किया है, ताकि इसे सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में आधार बनाया जा सके। इसी आधार पर सरकार सुप्रीम कोर्ट में 'खलिस्तान की घुसपैठ' का हलफनामा दाखिल कर सकती है। बूटा सिंह बुर्जगिल का मानना है कि सरकार और एनआईए की नोटिस के आधार पर सुप्रीम कोर्ट नोटिस देकर पक्ष जान सकता है। किसान संगनों की बैठक में इससे जुड़े कानूनी पहलुओं पर मंत्रणा हुई। वे इस घटनाक्रम को आंदोलन को तोड़ने की सरकार की साजिश करार देते हैं।

ये भी तलब
एनआईए ने किसान नेता व लोक भलाई इंसाफ वेलफेयर सोसायटी के प्रधान बलदेव सिंह सिरसा और उनके बेटे मेहताब सिंह सिरसा को रविवार 17 जनवरी को एनआईए मुख्यालय, दिल्ली में बुलाया गया है। भाकियू कादिया के नेता हरमीत सिंह कादिया को भी समन किया गया है। इनके अलावा सिख यूथ फेडरेशन भिंडरावाला के वरिष्ठ उपाध्यक्ष भाई रणजीत सिंह दमदमी टकसाल, मनदीप सिद्धू, कलाकार दीप सिद्दू के भाई, नोहजीत सिंह बुलोवाल, प्रदीप सिंह लुधियाना, परमजीत सिंह अकाली, पलविंदर सिंह अमरकोट, गुरमत प्रचार सेवा के सुरिंदर सिंह ठिकरीवाला, बंदी सिंह रिहाई मोर्चा के नेता मोजंग सिंह लुधियाना आदि को भी एनआईए ने 21 जनवरी को पूछताछ के लिए तलब किया है।

मृत किसान परिवारों की मदद में 50-50 हजार रुपये देने, कई एनआरआई, कई आढ़तियों व ट्रांसपोटर, पेट्रोल पंप संचालकों, लंगर-खिदमत से जुड़े कुल सौ लोगों को अबतक नोटिस थमाए जा चुके हैं। पहले आयकर-ईडी ने पड़ताल की थी। अब एनआईए नोटिस के बाद जांच की सूई फंडिंग व अन्य 'लिंक' की तरफ घूम गई है। संदेह 'खलिस्तान-पाकिस्तान घुसपैठ' की ओर है। एनआरआई की आर्थिक मदद को भी परखा जा रहा है।

ट्रैक्टर परेड पर चर्चा
पंजाब के 32 किसान संगठनों की शनिवार की बैठक में 26 जनवरी के ट्रैक्टर परेड के तीन विकल्पों पर चर्चा हुई। तय हुआ कि सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के हिसाब से रणनीतिक बदलाव संभव है। फिलहाल तय हुआ कि संयुक्त किसान मोर्चा विधिवत रोडमैप के साथ दिल्ली पुलिस से ट्रैक्टर परेड की लिखित अर्जी देकर अनुमति मांगेगा। दूसरा विकल्प यह है कि अनुमति नहीं मिलने पर दिल्ली बॉर्डर रिंग रोड पर ही परेड किया जाए। तीसरा सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर निर्भर करेगा।

टकराव टालने के लिए ट्रैक्टर परेड पर अदालत से रोक लगाई जा सकती है। पंजाब के किसान संगठनों के इस खाके व तमाम मुद्दों पर संयुक्त किसान मोर्चा की रविवार की बैठक में देशभर के किसान संगठनों में सहमति बनेगी। इसके बाद रणनीतिक घोषणा होगी। हां, 26 जनवरी के ट्रैक्टर परेड का 'गियर' 18 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और 19 जनवरी को सरकार से 'वार्ता' के हिसाब से बदल सकता है। फिलहाल, ट्रैक्टर 'न्यूट्रल गियर' में है।

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