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KC Tyagi Interview: बिहार में भाजपा के पास कोई नेता नहीं, जातिगत जनगणना कराएगी नीतीश सरकार

Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Wed, 17 Aug 2022 03:10 PM IST
सार

केसी त्यागी कहते हैं कि जद(यू) और राष्ट्रीय जनता दल दोनों ने अपनी इतिहास से सबक लिया है। पिछली गलतियों ने हम दोनों को काफी कुछ सिखाया है।

KC Tyagi
KC Tyagi - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

15 अगस्त 1947 के बाद से बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उन विरले और ऐतिहासिक नेताओं में से हैं, जिनकी पार्टी जद (यू) के सहयोगी दलों ने उनके साथ रहकर भी उनकी परेशानी बढ़ाई। इस वजह से नीतीश कुमार को रह-रहकर साथी बदलना पड़ा। यह भी इतिहास में दर्ज होगा कि 2005 से अब तक वह लगातार मुख्यमंत्री हैं और हर बार की सरकार उन्होंने विपरीत विचारधारा के दलों से मिलकर बनाई है। यह भी कम दिलचस्प नहीं है कि 2017 में राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने नीतीश कुमार को पलटूराम कहकर ताना मारा था। इस समय भाजपा इसी ताने को दोहरा रही है। राजनीति के जानकार इस 'कुटिल' नीति को अब भी कड़ी और बड़ी चुनौती मान रहे हैं। जद (यू) के प्रवक्ता और राष्ट्रीय महासचिव केसी त्यागी ने इसका बड़ी बेबाकी से जवाब दिया है।



कैसे निबटेंगे इस चुनौती से नीतीश कुमार?
71 साल के केसी त्यागी राजनीति की पाठशाला में काफी मंझे हुए खिलाड़ी हैं। जब उनसे भाजपा और राजद द्वारा नीतीश कुमार की इस नीति के और इसकी चुनौती के बारे में अमर उजाला संवाददाता ने पूछा तो उन्होंने बिना किसी लाग-लपेट के सीधा उत्तर दिया। त्यागी ने पहले माना कि कभी वर्तमान सहयोगी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने नीतीश कुमार के साथ ऐसा ही किया था। इसके कारण 2017 में मुख्यमंत्री ने (राजद) से नाता तोड़कर पुन: भाजपा से हाथ मिला लिया। 2017 में भाजपा के साथ सरकार बनाई। 2019 में लोकसभा और 2021 में विधानसभा चुनाव मिलकर लड़ा। लेकिन 2021 के विधानसभा चुनाव से भाजपा ने नीतीश कुमार के लिए परेशानी शुरू कर दी और 2022 में नीतीश कुमार ने भाजपा से नाता तोड़कर फिर राजद और कांग्रेस के साझे वाले महागठबंधन से मिलकर सरकार बनाई है।


जदयू और राजद ने अपने इतिहास से सबक लिया: केसी त्यागी
केसी त्यागी कहते हैं कि जद(यू) और राष्ट्रीय जनता दल दोनों ने अपनी इतिहास से सबक लिया है। पिछली गलतियों ने हम दोनों को काफी कुछ सिखाया है। समाज में जनता की जरूरतें, बिहार राज्य के समग्र विकास की प्रतिबद्धता ने हमें अपने निजी राजनीतिक हितों को दूर रखने के लिए प्रेरित किया है। हम इसके लिए मिलकर तालमेल बनाकर आगे बढ़ेंगे। केसी त्यागी कहते हैं कि राज्य में सांप्रदायिक सद्भाव, शांति के मूल्यों की स्थापना तथा उनकी मजबूती का बड़ा लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि हमारी महागठबंधन सरकार इन सभी लक्ष्यों को पूरा करेगी।

जातिगत जनगणना होगी, 15-20 साल से चल रहे विकास की रफ्तार को तेज करेंगे
केसी त्यागी ने महागठबंधन की सरकार की दो प्रमुख लक्ष्यों को बताया। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली राज्य सरकार जातिगत आधार पर जनगणना कराएगी। 15-20 साल से जारी राज्य के सतत विकास में तेजी लाई जाएगी। अतीत के अनुभवों से सीखकर हम लोगों की बेहतरी के लिए काम करेंगे। सामाजिक संरचना को मजबूत करेंगे। जद (यू) महासचिव का मानना है कि 2022 में बनी सरकार 2015 के चुनाव के बाद बनी सरकार से बिल्कुल अलग होगी।

भाजपा के पास स्थानीय नेता नहीं, वह अकेले चुनाव नहीं लड़ सकते
जद(यू) महासचिव का कहना है कि भाजपा ने अपने हाथ से अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारी है। उसने अपने स्थानीय नेताओं को पहले ही अलग-थलग कर घर बैठा दिया था। जिन दो लोगों को नीतीश की पिछली सरकार में उप मुख्यमंत्री बनाया था, वह खुद बिहार में अपनी पहचान के मोहताज हैं। पूरे बिहार में भाजपा के पास अब कोई स्थानीय नेता, चेहरा नहीं है। पूरी पार्टी अलग-थलग पड़ चुकी है। केसी त्यागी के मुताबिक, भाजपा अकेले दम पर बिहार विधानसभा या लोकसभा चुनाव नहीं लड़ सकती। 2015 में भाजपा ने इस प्रयोग को करके देख लिया है। तब उसे केवल 45 सीटें मिली थी। तब जद(यू) के खाते में 80 सीटें आई थी।

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