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हिंद-प्रशांत क्षेत्र: चीनी हरकतों पर क्वाड देश सैटेलाइट से रखेंगे नजर, टोक्यो में पीएम मोदी की मौजूदगी में एलान संभव

अमर उजाला ब्यूरो/एजेंसी, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Mon, 23 May 2022 02:39 AM IST
सार

हिंद-प्रशांत क्षेत्र को मुक्त और खुला बनाए रखने के उद्देश्य से क्वाड देश प्रशांत और हिंद महासागर में अपने आर्थिक और सुरक्षा हितों पर भी चर्चा करेंगे। सूत्रों का कहना है कि क्वाड देश हिंद प्रशांत क्षेत्र में अवैध मछली पकड़ने को रोकने के लिए सैटेलाइट आधारित समुद्री पहल लॉन्च कर सकते हैं।

टोक्यो में भारतीय समुदाय के बीच पीएम मोदी।
टोक्यो में भारतीय समुदाय के बीच पीएम मोदी। - फोटो : ANI
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विस्तार

जापान की राजधानी टोक्यो में मंगलवार को होने जा रहे क्वाड शिखर सम्मेलन में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती ‘दादागीरी’ पर लगाम लगाने के लिए बड़ा एलान किया जा सकता है। सूत्रों का कहना है कि इस क्षेत्र में बीजिंग की मनमानी रोकने के लिए सैटेलाइट तकनीक का इस्तेमाल कर एक ट्रैकिंग प्रणाली बनाई जा सकती है।



हिंद-प्रशांत क्षेत्र को मुक्त और खुला बनाए रखने के उद्देश्य से क्वाड देश प्रशांत और हिंद महासागर में अपने आर्थिक और सुरक्षा हितों पर भी चर्चा करेंगे। सूत्रों का कहना है कि क्वाड देश हिंद प्रशांत क्षेत्र में अवैध मछली पकड़ने को रोकने के लिए सैटेलाइट आधारित समुद्री पहल लॉन्च कर सकते हैं। दरअसल, दुनियाभर के प्राकृतिक संसाधनों पर ‘गिद्ध’ की तरह नजरें गड़ाए चीन हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चोरी-छिपे मछलियों का बड़े पैमाने पर शिकार कर रहा है। इस काम को अंजाम देने के लिए उसके पास एक बड़ा बेड़ा है। उसकी इस हरकत से कई देश परेशान हैं।




समुद्र में मछलियों के 95 फीसदी अवैध शिकार के लिए बीजिंग जिम्मेदार
क्वाड समेत इन देशों का कहना है कि समुद्र में मछलियों के 95 फीसदी अवैध शिकार के लिए बीजिंग ही जिम्मेदार है। इनका कहना है कि चीन के जहाज अक्सर उनके विशेेष आर्थिक जोन की सीमा में घुस आते हैं और पर्यावरण के साथ-साथ आर्थिक नुकसान भी पहुंचाते हैं। इतना ही नहीं, चीन हिंद-प्रशांत क्षेत्र में कई देशों पर अपना प्रभुत्व स्थापित कर सुरक्षा बेड़ा भी खड़ा कर रहा है, जो अन्य देशों के लिए सुरक्षा खतरा बन सकता है। 

चीनी जहाजों पर रखी जा सकेगी नजर
सैटेलाइट प्रणाली का इस्तेमाल सिंगापुर, भारत और प्रशांत महासागर में स्थित वर्तमान निगरानी केंद्रों को जोड़ने के लिए किया जाएगा। इससे हिंद महासागर से लेकर दक्षिण पूर्वी एशिया और दक्षिणी प्रशांत महासागर तक में अवैध तरीके से मछली पकड़ने पर निगरानी की जा सकेगी। इसकी मदद से अमेरिका और उसके सहयोगी देश चीन की हरकतों पर तब भी निगरानी कर सकेंगे जब मछली पकड़ने वाले जहाज अपने ट्रांसपोंडरों को भी बंद कर देंगे। ट्रांसपोंडरों का इस्तेमाल समुद्री जहाजों की निगरानी के लिए किया जाता है लेकिन अवैध मछली पकड़ने वाले अपनी नावों के ट्रांसपोंडर बंद कर देते हैं, जिससे उन्हें पकड़ना मुश्किल हो जाता है।

ऑस्ट्रेलियाई विशेषज्ञ चार्ल्स इडेल का कहना है कि चीन दुनिया का सबसे बड़ा अवैध मछली पकड़ने वाला अपराधी देश बन गया है। चीन ने समुद्र में मछलियों की संख्या बहुत ज्यादा कम कर दी है। इससे कई देशों की आजीविका को नुकसान पहुंचा है। यदि चीन पर अंकुश के लिए कोई भी कदम उठाया जाता है तो पर्यावरण व सुरक्षा को लेकर अच्छा असर होगा। 

रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को मजबूत करने का मौका: पीएम मोदी
क्वाड सम्मेलन में शामिल होने के लिए रवाना होने से पहले रविवार को पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह सम्मेलन समूह द्वारा उठाए गए कदमों की प्रगति की समीक्षा करने का अवसर उपलब्ध कराएगा। साथ ही हिंद-प्रशांत क्षेत्र के घटनाक्रमों के साथ ही परस्पर हितों से जुुड़े वैश्विक मुद्दों पर भी विचार साझा करने का मौका मिलेगा। उन्होंने कहा कि वह जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा के आमंत्रण पर टोक्यो जा रहे हैं। मार्च में उन्हें 14वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में पीएम किशिदा की आवभगत का सौभाग्य मिला था।

टोक्यो की यात्रा के दौरान वह दोनों देशों के विशेषकर रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को मजबूत करने के उद्देश्य से संवाद को जारी रखने के उत्सुक हैं। उन्होंने कहा कि मार्च शिखर सम्मेलन के दौरान पीएम किशिदा और उन्होंने जापान से भारत में अगले पांच सालों में सार्वजनिक और निजी निवेश तथा वित्त पोषण में पांच ट्रिलियन जापानी येन प्राप्त करने के अपने इरादे की घोषणा की थी। आगामी यात्रा के दौरान, वह इस लक्ष्य के अनुसरण में दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को और सुदृढ़ बनाने के ध्येय के साथ जापान के व्यापार जगत के शीर्ष व्यक्तियों के साथ मुलाकात करेंगे। जापान में भारतीय डायस्पोरा के लगभग 40,000 सदस्य हैं, जो जापान के साथ हमारे संबंधों में एक महत्वपूर्ण आधार हैं। वह उनके साथ बातचीत करने के लिए उत्सुक हैं।

बाइडन से द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने पर करेंगे चर्चा
उन्होंने कहा कि इस यात्रा के दौरान वह अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे, जिसमें दोनों नेता बहुआयामी द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने के उपायों पर चर्चा करेंगे। हम क्षेत्रीय विकास और समसामयिक वैश्विक मुद्दों पर भी संवाद करेंगे।

ऑस्ट्रेलिया की तरफ से नए पीएम होंगे शामिल
पीएम ने यह भी कहा कि ऑस्ट्रेलिया के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज पहली बार क्वाड नेताओं की शिखर वार्ता में हिस्सा लेंगे। वह उनके साथ द्विपक्षीय बैठक को लेकर उत्साहित हैं, जिसमें व्यापक रणनीतिक साझेदारी के तहत भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बहुआयामी सहयोग और परस्पर हित के क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होगी।

जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के नेता शामिल होंगे
उन्होंने कहा कि जापान में वह क्वाड नेताओं की आमने-सामने की दूसरी शिखर वार्ता में भी हिस्सा लेंगे। क्वाड सुरक्षा संवाद में भारत, जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के नेता शामिल होंगे।

जापानी कारोबारी नेताओं से आज मोदी करेंगे मुलाकात : संजय कुमार वर्मा
जापान में भारतीय राजदूत संजय कुमार वर्मा ने भरोसा जताया कि क्वाड बैठक में जापानी पीएम के साथ आपसी विचार विमर्श से दोनों देशों के बीच मजबूत रणनीतिक संबंधों को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही निवेश आकर्षित करने में भी मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि जापान भारत में अवसरों को लेकर काफी उत्साहित है, विशेष रूप से पीएलआई योजनाओं।

इसलिए उन्हें हमें बेहतर ढंग से समझने और हमें उन्हें बेहतर ढंग से समझाने की जरूरत है। उन्होंने राउंड टेबल में करीब 35 कारोबारी लीडर होंगे। साथ ही ये कारोबारी अलग से भी पीएम मोदी से मुलाकात करेंगे। चीन को लेकर उन्होंने कहा कि क्वाड बैठक का मुख्य उद्देश्य हिंद प्रशांत क्षेत्र को शांत, स्थिर और समृद्ध देखना है। साथ ही उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन की जंग से एनर्जी और खाद्य सुरक्षा पर असर पड़ा और इस वक्त ये प्रमुख वैश्विक मसले हैं।  

बाइडन, पीएम मोदी के बीच यूक्रेन मुद्दे पर भी होगी वार्ता 
अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने कहा कि जापान में क्वाड बैठक के इतर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को द्विपक्षीय बैठक करेंगे। इसमें दोनों नेता यूक्रेन के हालात पर ‘सार्थक और सीधी सपाट’ वार्ता करेंगे। यह पहले से ही जारी संवाद की निरंतरता होगी।

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