विवाद के बाद भी परिषद 21 बहादुर बच्चों को देगी राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार 2018

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 19 Jan 2019 04:02 AM IST
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Indian Council for child welfare will give bravery awards on its own

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स्वयंसेवी संगठन भारतीय बाल कल्याण परिषद (इंडियन काउंसिल फॉर चाइल्ड वेलफेयर) अपने स्तर पर 21 बच्चों को राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार, 2018 देगा। दरअसल परिषद पर वित्तीय गड़बड़ी के आरोप हैं और दिल्ली हाईकोर्ट में केस चल रहा है। केंद्र सरकार ने इस बार पुरस्कार का नाम बदलकर प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार कर दिया है। इसके लिए 26 बच्चे अलग अलग वर्ग जैसे इनोवेशन, सोशल सर्विस, स्कालेस्टिक, आर्ट एंड कल्चर, स्पोर्ट्स, बहादुरी में चुने गए हैं। 
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बाल विकास मंत्रालय ने खुद को परिषद से अलग कर लिया है। परिषद के चुने 21 बच्चे गणतंत्र दिवस परेड में शामिल नहीं होंगे। प्रधानमंत्री पुरस्कार वाले 26 बच्चे परेड में शामिल होंगे। यह बात सामने आने पर परिषद ने शुक्रवार को प्रेस वार्ता कर अपनी बात रखी। परिषद की अध्यक्ष गीता सिद्धार्थ ने कहा कि भारतीय बाल कल्याण परिषद केवल बहादुरी के लिए पुरस्कार देती थी। जबकि सरकार द्वारा चयनित 26 बच्चों में सभी का चयन बहादुरी के लिए नहीं है।
आईटीओ स्थित भारतीय बाल कल्याण परिषद कार्यालय में 21 बहादुर बच्चों से मीडिया को रू-ब-रू करवाया गया। गीता का आरोप है कि केंद्र सरकार ने उन्हें अलग से राष्ट्रीय बाल पुरस्कार देने की जानकारी नहीं दी थी। वर्ष 1957 से परिषद ही देशभर में बहादुरी का काम करने वाले बच्चों के नामों का चयन करते हुए पुरस्कार देती थी। इसमें केंद्र सरकार सहयोग करती थी और गणतंत्र दिवस की परेड में उक्त बहादुर बच्चों को शामिल किया जाता रहा है। पिछले 61 सालों में 963 बच्चों को राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। 
सरकार की ओर से गणतंत्र दिवस परेड से पहले होनहार बच्चों को राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री से मिलने का मौका मिलता था। पुरस्कार पाने वाले बच्चों की पढ़ाई, ट्रेनिंग आदि का पूरा खर्चा परिषद ही देती थी, जिसमें कभी केंद्र सरकार से मदद नहीं मांगी गयी थी। राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार 2018  में खुद को अलग करने के फैसले के बाद से दिल्ली सरकार भी पीछे हट गयी है। शुक्रवार को उक्त छात्रों को उपराज्यपाल अनिल बैजल से मिलना था, लेकिन बाद में उपराज्यपाल कार्यालय की ओर से तय कार्यक्रम रद्द कर दिया गया।

सरकार के सहयोग के बगैर भी देते रहेंगे पुरस्कार
गीता का कहना है कि केंद्र सरकार ने बेशक अदालत में वित्तीय अनियमतिता के केस के चलते  राष्ट्रीय  वीरता पुरस्कार 2018 में खुद को अलग कर लिया है, लेकिन एनजीओ बहादुर बच्चों को यह पुरस्कार देता रहेगा। गीता से जब उनके एनजीओ पर वित्तीय अनियमितता का सवाल पूछा गया तो कहा उनका कहना था कि मामला अदालत में विचाराधीन है। इसलिए इस संबंध में मैं कुछ नहीं कह सकती हूं। 
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विवाद के बाद भी परिषद 21 बहादुर बच्चों को देगी राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार

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