कुलभूषण जाधव को फांसी पर भारत का पलटवार, पाक कैदियों को नहीं करेंगे रिहा

एजेंसी/नई दिल्ली Updated Mon, 10 Apr 2017 10:25 PM IST
India's strong execution on Execution of Kulbhushan Jadhav
- फोटो : s jaishankar
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भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान की अदालत में मौत की सजा सुनाए जाने के फैसले के बाद भारत ने फैसला किया है कि अब वह पाकिस्तान के कैदियों को रिहा नहीं करेगा। भारतीय जेलों में बंद लगभग एक दर्जन पाकिस्तानी कैदियों को बुधवार को रिहा किया जाना था।
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सरकारी सूत्रों ने बताया कि सरकार महसूस करती है कि पाकिस्तानी कैदियों को रिहा करने का यह सही वक्त नहीं है। भारत और पाकिस्तान की जेलों में बंद एक-दूसरे देशों के नागरिकों की सजा पूरी होने के बाद उन्हें रिहा करना दोनों देशों के नीतिगत फैसले का हिस्सा है। 


जाधव को मौत की सजा सुनाने के फैसले की पुष्टि के बाद गुस्साए भारत ने कहा कि पाकिस्तान यदि कानून और न्याय के बुनियादी नियमों को ताक पर रखकर मौत की सजा बरकरार रखता है तो वह इसे पूर्व नियोजित हत्या करार देगा। 

पाक राजदूत को तलब कर भारत ने जताया कड़ा विरोध

पाकिस्तान में पूर्व भारतीय नौसेना अधिकारी कुलभूषण जाधव के सजा-ए-मौत के फैसले पर विदेश सचिव एस. जयशंकर ने भारत स्थित पाकिस्तानी उच्चायुक्त अब्दुल बासित के समक्ष कड़ी प्रतिक्रिया जताई है। विदेश सचिव ने बासित को तलब कर उन्हें डिमार्च थमाया जिसमें कहा गया है कि जाधव के खिलाफ बिना किसी भरोसेमंद साक्ष्य के उन्हें मौत की सजा सुनाना हास्यास्पद है। 

उन्होंने कहा कि जाधव को पिछले साल ईरान से अगवा कर लिया गया था और पाकिस्तान में उनकी लगातार मौजूदगी का कभी विश्वसनीय तरीके से जिक्र नहीं किया गया है। पाकिस्तान का दावा है कि उसके सुरक्षा बलों ने जाधव को पिछले साल 3 मार्च को तनावग्रस्त क्षेत्र बलूचिस्तान के मशकेल से गिरफ्तार किया था जब वह ईरान के रास्ते वहां पहुंचा था।

पाक का यह भी दावा है कि वह भारतीय नौसेना का अधिकारी रह चुका है। पाकिस्तान की सेना ने जाधव की गिरफ्तारी के बाद उनके कबूलनामे का एक वीडियो जारी किया है। भारत ने माना है कि जाधव नौसेना में काम कर चुके हैं लेकिन सरकार के साथ किसी अन्य तरह के ताल्लुक से इनकार किया है।  

डिमार्च में कहा गया है कि इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग की ओर से अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार कई बार राजनयिक स्तर पर जाधव से संपर्क करने की कोशिश की गई और 25 मार्च 2016 से लेकर 31 मार्च 2017 तक 13 बार औपचारिक अनुरोध किया गया। लेकिन पाकिस्तानी प्रशासन ने इसकी अनुमति नहीं दी। डिमार्च के मुताबिक, जाधव को किसी भरोसेमंद साक्ष्य के बगैर मौत की सजा सुनाने का फैसला हास्यास्पद है और भारतीय उच्चायोग को भी उसके ट्रायल की जानकारी नहीं दी गई। इस मामले में जाधव को अपना पक्ष तक रखने का मौका नहीं मिला और पाकिस्तान के कोर्ट ने उनके खिलाफ सजा सुना दी।
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