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MOM: आठ साल बाद भारत के मंगलयान की बैट्री और ईंधन हुआ खत्म, 2013 में किया गया था प्रक्षेपित

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Sun, 02 Oct 2022 08:40 PM IST
सार

24 सितंबर 2014 को मंगल पर पहुंचने के साथ ही भारत विश्व में अपने प्रथम प्रयास में ही सफल होने वाला पहला देश तथा सोवियत रूस, नासा और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के बाद दुनिया का चौथा देश बन गया था।

मंगलयान
मंगलयान - फोटो : ट्विटर/मार्स ऑर्बिटर
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विस्तार

5 नवम्बर 2013 को प्रक्षेपण और 24 सितंबर 2014 को मंगल की कक्षा में प्रवेश करने के बाद लगभग आठ साल बाद भारत के ऐतिहासिक मार्स ऑर्बिटर मिशन (एमओएम) यानी मंगलयान की बैट्री और ईंधन खत्म हो गया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के सूत्रों इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मंगलयान से संपर्क खत्म हो गया है। हालांकि, इसरो ने इस बारे में अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं जारी किया है। 



सूत्रों के अनुसार, इसरो मंगलयान की कक्षा में सुधार के जरिए उसकी बैटरी की जिंदगी बढ़ाने की कोशिश कर रहा था। यह इसलिए भी जरूरी था कि लंबे ग्रहण के दौरान भी मंगलयान को ऊर्जा मिलती रहे, लेकिन हाल में कई ग्रहण के बाद कक्षा में सुधार नहीं हो पाया जिसके कारण यह निस्तेज हो गया, क्योंकि लंबे ग्रहण के दौरान बैटरी इसका साथ छोड़ सकती थी। उन्होंने बताया कि चूंकि उपग्रह बैटरी को केवल एक घंटे और 40 मिनट की ग्रहण अवधि के हिसाब से डिज़ाइन किया गया था, इसलिए लंबा ग्रहण लग जाने से बैटरी लगभग समाप्त हो गई। इसरो के अधिकारियों के मुताबिक, मार्स ऑर्बिटर यान को छह महीने की क्षमता के अनुरूप बनाया गया था।


भारत का प्रथम मंगल अभियान
मंगलयान (मार्स ऑर्बिटर मिशन), भारत का प्रथम मंगल अभियान है और यह भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की एक महत्वाकांक्षी अन्तरिक्ष परियोजना है। इस परियोजना के अन्तर्गत साढ़े चार सौ करोड़ रुपये की लागत वाला ‘मार्स ऑर्बिटर मिशन’ (एमओएम)  5 नवम्बर 2013 को 2 बजकर 38 मिनट पर छोड़ा गया था। मंगल ग्रह की परिक्रमा करने हेतु छोड़ा गया उपग्रह आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसऍलवी) सी-25 के द्वारा सफलतापूर्वक छोड़ा गया था। इसके साथ ही भारत भी अब उन देशों में शामिल हो गया, जिन्होंने मंगल पर अपने यान भेजे हैं।

24 सितंबर 2014 को मंगल पर पहुंचने के साथ ही भारत विश्व में अपने प्रथम प्रयास में ही सफल होने वाला पहला देश तथा सोवियत रूस, नासा और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के बाद दुनिया का चौथा देश बन गया था। इसके अतिरिक्त ये मंगल पर भेजा गया सबसे सस्ता मिशन भी था। भारत एशिया का भी ऐसा करने वाला प्रथम पहला देश बन गया था, क्योंकि इससे पहले चीन और जापान अपने मंगल अभियान में असफल रहे थे। प्रतिष्ठित 'टाइम' पत्रिका ने मंगलयान को 2014 के सर्वश्रेष्ठ आविष्कारों में शामिल किया था।

मंगल अभियान ,कब क्या हुआ 
  • मिशन की शुरुआत 5 नवंबर 2013 को हुई जब श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से रॉकेट ने उड़ान भरी और 44 मिनट बाद रॉकेट से अलग हो कर उपग्रह पृथ्वी की कक्षा में आ गया। 
  • 7 नवंबर 2013 को मंगलयान की कक्षा बढ़ाने की पहली कोशिश सफल रही।
  • 8 नवंबर 2013 को मंगलयान की कक्षा बढ़ाने की दूसरी कोशिश सफल रही।
  • 9 नवंबर 2013 को मंगलयान की एक और कक्षा सफलतापूर्वक बढ़ाई गई।
  • 11 नवंबर 2013मंगलयान की कक्षा बढ़ाने की चौथी सफल कोशिश।
  • 12 नवंबर 2013 मंगलयान की कक्षा बढ़ाने की पांचवीं कोशिश सफल रही।
  • 16 नवंबर 2013 मंगलयान को आखिरी बार कक्षा बढ़ाई गई।
  • 1 दिसंबर 2013 को मंगलयान ने सफलतापूर्वक पृथ्वी की कक्षा छोड़ दी और मंगल की तरफ बढ़ चला।
  • 4 दिसंबर 2013 को मंगलयान पृथ्वी के 9.25 लाख किलोमीटर घेरे के प्रभावक्षेत्र से बाहर निकल गया।
  • 11 दिसंबर 2013को अंतरिक्षयान में पहले सुधार किए गए।
  • 22 सितंबर 2014 को मंगलयान अपने अंतिम चरण में पहुंच गया. मंगलयान ने मंगल के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में प्रवेश कर लिया।
  • 24 सितंबर 2014 को मंगल की कक्षा में प्रवेश करने के साथ ही मंगलयान भारत के लिए ऐतिहासिक पल लेकर आया। इसके साथ ही भारत पहली ही बार में मंगल मिशन में सफलता हासिल करने वाला दुनिया का पहला देश बन गया।
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ऐसे मिशन वाले हम विश्व के चौथे देश

अमेरिका, रूस और यूरोपीय संघ के बाद भारत ऐसा मिशन भेजने वाला चौथा और एशिया का पहला देश बना था। पहली बार में सफलता तो केवल भारत को मिली। पिछले महीने ही मंगलयान ने आठ साल पूरे किए थे।इसरो के अनुसार, इसने कई उपलब्धियां हासिल कीं। मिशन का उद्देश्य तकनीकी था। इसमें मिशन डिजाइन, मंगल की परिक्रमा करने की क्षमता युक्त यान तैयार करना व भेजना, मंगल की कक्षा में प्रवेश और परिक्रमा शामिल था।

बेहद किफायती होने से यह मिशन सराहा गया। अंतरिक्ष पर बनीं कई हॉलीवुड फिल्मों का बजट इससे ज्यादा था तो अमेरिका में इस तरह के मिशन पर 10 से 15 गुना तक ज्यादा खर्च आने की बात कही गई। आज भी इससे सस्ता मिशन कोई नहीं भेज सका है।
  • इसके जरिये वैज्ञानिकों ने 2015 में मंगल ग्रह सोलर कोरोना का अध्ययन किया। सूर्य की कई बातें समझने में मदद मिली।
  • 28 सितंबर, 2014 को यान ने मंगल की पहली पूर्ण तस्वीर भेजी। एक साल पूरे होने पर इसरो ने मार्स का 120 पृष्ठों का एटलस जारी किया। 2019 तक यह 2 टीबी का डाटा भेजा था।
  • 1 जुलाई, 2020 को उसने मंगल के चंद्रमा फोबोस की तस्वीर भेजी जो करीब 4.2 हजार किमी दूर से ली गई थी।
  • 24 मार्च, 2015 को अपने जीवन काल के छह महीने पूरे किए तो इसरो ने कहा था यह छह महीने और काम करेगा पर इसने आठ साल पूरे कर इस मिशन को बेहद सफल बनाया।
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