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India-EU: असम में नियमित प्रवास और रोजगार बढ़ाने की नई पहल, MEA ने बताया कैसे काम करेगा ये माइग्रेशन मॉडल
Mon, 16 Feb 2026 06:14 PM IST
हिमांशु चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, असम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, असम
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Mon, 16 Feb 2026 06:14 PM IST
सार
भारत और यूरोपीय संघ ने गुवाहाटी में संयुक्त कार्यक्रम कर नियमित प्रवास और रोजगार अवसर बढ़ाने की दिशा में नई पहल शुरू की है। विदेश मंत्रालय, ईयू और असम सरकार के साथ आयोजित इस कार्यक्रम का लक्ष्य सुरक्षित और कानूनी माइग्रेशन को बढ़ावा देना है। योजना के तहत अवैध प्रवास रोकने और उत्तर-पूर्व को अंतरराष्ट्रीय मोबिलिटी नेटवर्क से जोड़ने पर खास जोर दिया गया है।
विदेश मंत्रालय (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : ANI
भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रवास और रोजगार के अवसरों को व्यवस्थित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। विदेश मंत्रालय ने यूरोपीय संघ और असम सरकार के साथ मिलकर गुवाहाटी में एक अहम कार्यक्रम आयोजित किया। इस पहल का मकसद नियमित माइग्रेशन को बढ़ावा देना और अवैध प्रवास पर रोक लगाना है। कार्यक्रम को उत्तर-पूर्व क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय मोबिलिटी नेटवर्क से जोड़ने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रवास और रोजगार के अवसरों को व्यवस्थित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। विदेश मंत्रालय ने यूरोपीय संघ और असम सरकार के साथ मिलकर गुवाहाटी में एक अहम कार्यक्रम आयोजित किया। इस पहल का मकसद नियमित माइग्रेशन को बढ़ावा देना और अवैध प्रवास पर रोक लगाना है। कार्यक्रम को उत्तर-पूर्व क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय मोबिलिटी नेटवर्क से जोड़ने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
ये भी पढ़ें- असम की बदलती सियासत: भूपेन बोरा ने कुछ ही घंटों में क्यों लिया यू-टर्न? जानें इस्तीफा वापस लेने की पूरी कहानी
क्या है भारत-ईयू माइग्रेशन अवसर?
विदेश मंत्रालय ने 12 फरवरी 2026 को गुवाहाटी में भारत-ईयू माइग्रेशन अवसर और उत्तर-पूर्व मार्ग शीर्षक से स्टेट एंगेजमेंट प्रोग्राम आयोजित किया। यह कार्यक्रम भारत ईयू माइग्रेशन और मोबिलिटी सहयोग एवं संवाद ढांचे के तहत रखा गया। इसका मुख्य उद्देश्य भारत और यूरोपीय संघ के बीच नियमित प्रवास, कौशल आधारित रोजगार और कानूनी मोबिलिटी के रास्तों को मजबूत करना है। इसके जरिए उत्तर-पूर्व क्षेत्र को भी इस अंतरराष्ट्रीय माइग्रेशन ढांचे से जोड़ने पर जोर दिया गया।
किन संस्थाओं की भागीदारी?
यह कार्यक्रम भारत-ईयू सहयोग और संवाद ऑन माइग्रेशन एंड मोबिलिटी परियोजना के तहत आयोजित हुआ। इस परियोजना को भारतीय परिषद विश्व मामलों, इंटरनेशनल सेंटर फॉर माइग्रेशन पॉलिसी डेवलपमेंट और इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन मिलकर लागू कर रहे हैं। यह पूरी पहल भारत और यूरोपीय संघ द्वारा 2016 में अपनाए गए माइग्रेशन और मोबिलिटी के साझा एजेंडा के समर्थन में चलाई जा रही है। इसका फोकस कानूनी और सुरक्षित माइग्रेशन चैनल को मजबूत करना है।
अवैध माइग्रेशन रोकने पर जोर क्यों?
इस कार्यक्रम का मकसद भारत-ईयू कॉरिडोर पर प्रवास को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाना है। इसके तहत नियमित प्रवास के अवसर बढ़ाने, रोजगार के वैध रास्ते खोलने और अवैध माइग्रेशन को रोकने के लिए सहयोग बढ़ाया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, इससे कौशल आधारित कामगारों को सही प्लेटफॉर्म मिलेगा और अनियमित प्रवास के जोखिम कम होंगे। उत्तर-पूर्व भारत को इस ढांचे से जोड़ना क्षेत्रीय विकास और अंतरराष्ट्रीय अवसरों के लिहाज से अहम कदम माना जा रहा है।
अन्य वीडियो-
भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रवास और रोजगार के अवसरों को व्यवस्थित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। विदेश मंत्रालय ने यूरोपीय संघ और असम सरकार के साथ मिलकर गुवाहाटी में एक अहम कार्यक्रम आयोजित किया। इस पहल का मकसद नियमित माइग्रेशन को बढ़ावा देना और अवैध प्रवास पर रोक लगाना है। कार्यक्रम को उत्तर-पूर्व क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय मोबिलिटी नेटवर्क से जोड़ने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
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क्या है भारत-ईयू माइग्रेशन अवसर?
विदेश मंत्रालय ने 12 फरवरी 2026 को गुवाहाटी में भारत-ईयू माइग्रेशन अवसर और उत्तर-पूर्व मार्ग शीर्षक से स्टेट एंगेजमेंट प्रोग्राम आयोजित किया। यह कार्यक्रम भारत ईयू माइग्रेशन और मोबिलिटी सहयोग एवं संवाद ढांचे के तहत रखा गया। इसका मुख्य उद्देश्य भारत और यूरोपीय संघ के बीच नियमित प्रवास, कौशल आधारित रोजगार और कानूनी मोबिलिटी के रास्तों को मजबूत करना है। इसके जरिए उत्तर-पूर्व क्षेत्र को भी इस अंतरराष्ट्रीय माइग्रेशन ढांचे से जोड़ने पर जोर दिया गया।
किन संस्थाओं की भागीदारी?
यह कार्यक्रम भारत-ईयू सहयोग और संवाद ऑन माइग्रेशन एंड मोबिलिटी परियोजना के तहत आयोजित हुआ। इस परियोजना को भारतीय परिषद विश्व मामलों, इंटरनेशनल सेंटर फॉर माइग्रेशन पॉलिसी डेवलपमेंट और इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन मिलकर लागू कर रहे हैं। यह पूरी पहल भारत और यूरोपीय संघ द्वारा 2016 में अपनाए गए माइग्रेशन और मोबिलिटी के साझा एजेंडा के समर्थन में चलाई जा रही है। इसका फोकस कानूनी और सुरक्षित माइग्रेशन चैनल को मजबूत करना है।
अवैध माइग्रेशन रोकने पर जोर क्यों?
इस कार्यक्रम का मकसद भारत-ईयू कॉरिडोर पर प्रवास को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाना है। इसके तहत नियमित प्रवास के अवसर बढ़ाने, रोजगार के वैध रास्ते खोलने और अवैध माइग्रेशन को रोकने के लिए सहयोग बढ़ाया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, इससे कौशल आधारित कामगारों को सही प्लेटफॉर्म मिलेगा और अनियमित प्रवास के जोखिम कम होंगे। उत्तर-पूर्व भारत को इस ढांचे से जोड़ना क्षेत्रीय विकास और अंतरराष्ट्रीय अवसरों के लिहाज से अहम कदम माना जा रहा है।
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विस्तार
भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रवास और रोजगार के अवसरों को व्यवस्थित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। विदेश मंत्रालय ने यूरोपीय संघ और असम सरकार के साथ मिलकर गुवाहाटी में एक अहम कार्यक्रम आयोजित किया। इस पहल का मकसद नियमित माइग्रेशन को बढ़ावा देना और अवैध प्रवास पर रोक लगाना है। कार्यक्रम को उत्तर-पूर्व क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय मोबिलिटी नेटवर्क से जोड़ने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रवास और रोजगार के अवसरों को व्यवस्थित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। विदेश मंत्रालय ने यूरोपीय संघ और असम सरकार के साथ मिलकर गुवाहाटी में एक अहम कार्यक्रम आयोजित किया। इस पहल का मकसद नियमित माइग्रेशन को बढ़ावा देना और अवैध प्रवास पर रोक लगाना है। कार्यक्रम को उत्तर-पूर्व क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय मोबिलिटी नेटवर्क से जोड़ने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
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क्या है भारत-ईयू माइग्रेशन अवसर?
विदेश मंत्रालय ने 12 फरवरी 2026 को गुवाहाटी में भारत-ईयू माइग्रेशन अवसर और उत्तर-पूर्व मार्ग शीर्षक से स्टेट एंगेजमेंट प्रोग्राम आयोजित किया। यह कार्यक्रम भारत ईयू माइग्रेशन और मोबिलिटी सहयोग एवं संवाद ढांचे के तहत रखा गया। इसका मुख्य उद्देश्य भारत और यूरोपीय संघ के बीच नियमित प्रवास, कौशल आधारित रोजगार और कानूनी मोबिलिटी के रास्तों को मजबूत करना है। इसके जरिए उत्तर-पूर्व क्षेत्र को भी इस अंतरराष्ट्रीय माइग्रेशन ढांचे से जोड़ने पर जोर दिया गया।
किन संस्थाओं की भागीदारी?
यह कार्यक्रम भारत-ईयू सहयोग और संवाद ऑन माइग्रेशन एंड मोबिलिटी परियोजना के तहत आयोजित हुआ। इस परियोजना को भारतीय परिषद विश्व मामलों, इंटरनेशनल सेंटर फॉर माइग्रेशन पॉलिसी डेवलपमेंट और इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन मिलकर लागू कर रहे हैं। यह पूरी पहल भारत और यूरोपीय संघ द्वारा 2016 में अपनाए गए माइग्रेशन और मोबिलिटी के साझा एजेंडा के समर्थन में चलाई जा रही है। इसका फोकस कानूनी और सुरक्षित माइग्रेशन चैनल को मजबूत करना है।
अवैध माइग्रेशन रोकने पर जोर क्यों?
इस कार्यक्रम का मकसद भारत-ईयू कॉरिडोर पर प्रवास को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाना है। इसके तहत नियमित प्रवास के अवसर बढ़ाने, रोजगार के वैध रास्ते खोलने और अवैध माइग्रेशन को रोकने के लिए सहयोग बढ़ाया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, इससे कौशल आधारित कामगारों को सही प्लेटफॉर्म मिलेगा और अनियमित प्रवास के जोखिम कम होंगे। उत्तर-पूर्व भारत को इस ढांचे से जोड़ना क्षेत्रीय विकास और अंतरराष्ट्रीय अवसरों के लिहाज से अहम कदम माना जा रहा है।
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भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रवास और रोजगार के अवसरों को व्यवस्थित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। विदेश मंत्रालय ने यूरोपीय संघ और असम सरकार के साथ मिलकर गुवाहाटी में एक अहम कार्यक्रम आयोजित किया। इस पहल का मकसद नियमित माइग्रेशन को बढ़ावा देना और अवैध प्रवास पर रोक लगाना है। कार्यक्रम को उत्तर-पूर्व क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय मोबिलिटी नेटवर्क से जोड़ने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
ये भी पढ़ें- असम की बदलती सियासत: भूपेन बोरा ने कुछ ही घंटों में क्यों लिया यू-टर्न? जानें इस्तीफा वापस लेने की पूरी कहानी
क्या है भारत-ईयू माइग्रेशन अवसर?
विदेश मंत्रालय ने 12 फरवरी 2026 को गुवाहाटी में भारत-ईयू माइग्रेशन अवसर और उत्तर-पूर्व मार्ग शीर्षक से स्टेट एंगेजमेंट प्रोग्राम आयोजित किया। यह कार्यक्रम भारत ईयू माइग्रेशन और मोबिलिटी सहयोग एवं संवाद ढांचे के तहत रखा गया। इसका मुख्य उद्देश्य भारत और यूरोपीय संघ के बीच नियमित प्रवास, कौशल आधारित रोजगार और कानूनी मोबिलिटी के रास्तों को मजबूत करना है। इसके जरिए उत्तर-पूर्व क्षेत्र को भी इस अंतरराष्ट्रीय माइग्रेशन ढांचे से जोड़ने पर जोर दिया गया।
किन संस्थाओं की भागीदारी?
यह कार्यक्रम भारत-ईयू सहयोग और संवाद ऑन माइग्रेशन एंड मोबिलिटी परियोजना के तहत आयोजित हुआ। इस परियोजना को भारतीय परिषद विश्व मामलों, इंटरनेशनल सेंटर फॉर माइग्रेशन पॉलिसी डेवलपमेंट और इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन मिलकर लागू कर रहे हैं। यह पूरी पहल भारत और यूरोपीय संघ द्वारा 2016 में अपनाए गए माइग्रेशन और मोबिलिटी के साझा एजेंडा के समर्थन में चलाई जा रही है। इसका फोकस कानूनी और सुरक्षित माइग्रेशन चैनल को मजबूत करना है।
अवैध माइग्रेशन रोकने पर जोर क्यों?
इस कार्यक्रम का मकसद भारत-ईयू कॉरिडोर पर प्रवास को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाना है। इसके तहत नियमित प्रवास के अवसर बढ़ाने, रोजगार के वैध रास्ते खोलने और अवैध माइग्रेशन को रोकने के लिए सहयोग बढ़ाया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, इससे कौशल आधारित कामगारों को सही प्लेटफॉर्म मिलेगा और अनियमित प्रवास के जोखिम कम होंगे। उत्तर-पूर्व भारत को इस ढांचे से जोड़ना क्षेत्रीय विकास और अंतरराष्ट्रीय अवसरों के लिहाज से अहम कदम माना जा रहा है।
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