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भारत-चीन एलएसी विवाद: पूर्वी लद्दाख में जारी सैन्य तनाव लंबा चलेगा? सेना ने मांगे खास कपड़े और उपकरण

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Jeet Kumar Updated Fri, 18 Jun 2021 01:42 AM IST

सार

  • भारतीय आर्मी ने अपने जवानों की ठंड से रक्षा के लिए स्पेशल कपड़ों समेत 17 तरह के उपकरणों की इच्छा जताई है।
  • भारतीय सेना ने एक्सट्रीम कोल्ड वेदर क्लॉदिंग सिस्टम, स्लीपिंग बैग्स और पहाड़ों पर चढ़ाई में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की मांग की है।
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भारतीय सेना का जवान (फाइल फोटो)
भारतीय सेना का जवान (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
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विस्तार

लद्दाख के गलवां में भारत-चीन सेना के बीच हुई हिंसक झड़प के एक साल बीत जाने के बाद भी स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। एक साल बाद भी दोनों तरफ की सेनाएं दुर्गम उंचाई और विकट परिस्थितियों में पूरी तैयारी के साथ तैनात रहने को मजबूर है। अभी यह कहा नहीं जा सकता कि गतिरोध अभी और कितना लंबा चलेगा?
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दुश्मन और ठंड से लड़ने के लिए भारतीय सेना ने अपने जवानों की ठंड से रक्षा के लिए स्पेशल कपड़ों समेत 17 तरह के उपकरणों की मांग की है। यानी सेना पहले से ही आगे की तैयारी करके चल रही है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सेना 'मेक इन इंडिया' के तहत देसी कंपनियों को तरजीह देगी।


सेना ने 17 तरह के स्पेशल क्लोदिंग और पहाड़ों पर चढ़ाई वाले उपकरणों को आपूर्ति चाहती है। रिपोर्ट में रक्षा सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि सेना इन खास कपड़ों और उपकरणों के लिए 'मेक इन इंडिया' ते तहत देसी कंपनियों को तरजीह देगी। फिलहाल इनमें से ज्यादातर आइटम दूसरे देशों से आयात किए जाते हैं।

आर्मी की तरफ से जारी हालिया सूची के मुताबिक, उसे सालाना 50 हजार से 90 हजार तक एक्सट्रीम कोल्ड वेदर क्लॉदिंग सिस्टम (शून्य से काफी नीचे तापमान में कड़ाके की ठंड में पहने जाने वाले खास कपड़े) की जरूरत है। इतनी ही तादाद में स्लीपिंग बैग्स, रकसैक्स, बहुत ही ज्यादा ऊंचाई वाली जगहों पर पहने जाने वाले समर सूट, मल्टीपर्पज बूट और स्नो गॉगल्स की जरूरत है।

इसके अलावा आर्मी को 12,000 खास ऊनी मोजे, दो और तीन लेयर वाले करीब तीन लाख जोड़े दस्ताने, बहुत ही ज्यादा ठंड और ऊंचाई वाले इलाकों में तैनात सैनिकों को इमर्जेंसी इलाज देने में इस्तेमाल होने वाले खास तरह के 500 चैंबरों की जरूरत है। सेना को सालाना 3,000 से 5,000 एवलॉन्च एयरबैग्स और एवलॉन्ट विक्टिम डिटेक्टर्स की भी जरूरत है। एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने कहा कि इन उपकरणों का सियाचिन और दूसरे ऊंचाई वाले इलाकों में इस्तेमाल किया जाएगा।
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