उत्तराखंड से लेकर केरल तक बारिश: जानें अक्तूबर के अंत में क्यों बिगड़ रहा मौसम, क्यों है भारत के लिए यह चिंता की बात?

रिसर्च डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Tue, 19 Oct 2021 06:38 PM IST

सार

माना जाता है कि भारत में मानसून सामान्य तौर पर अगस्त तक पूरी तरह छा जाता है। इसके बाद सितंबर मध्य में इसके वापस लौटने की प्रक्रिया भी शुरू हो जाती है। इस प्रक्रिया को मानसून विड्रॉल कहते हैं, लेकिन इस साल मानसून के सितंबर तक सक्रिय रहने की वजह से इसके लौटने में भी देर हो रही है। 
उत्तराखंड से लेकर केरल तक जबरदस्त बारिश।
उत्तराखंड से लेकर केरल तक जबरदस्त बारिश। - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

दुनियाभर में जारी जलवायु परिवर्तन का असर अब भारत में भी दिखने लगा है। इस साल जिस तरह मानसून की गति असामान्य रही है, उससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। इस साल तो अक्तूबर के अंत तक कई राज्यों में भारी बारिश हो रही है। केरल में पहले ही बारिश अपना कहर दिखा रही है। यहां सभी बांध सीमा से ऊपर तक भर चुके हैं और कई जिलों में बाढ़ से लोगों की मौत तक हो चुकी है। उधर उत्तराखंड में भी भारी बारिश के चलते रेड अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के मुताबिक, जिस तरह की परिस्थितियां बन रही हैं, वह 2012 जैसी है, जब केदारनाथ में आपदा आई थी। यह चिंता की बात है। हिमाचल प्रदेश में भी बारिश पिछले तीन महीने से लगातार कहर बरपा रही है और अक्तूबर में एक बार फिर यहां अलर्ट जारी हुआ है। 
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अब तक क्या रहा है मानसून का रवैया?

क्या है मानसून विड्रॉल और क्या है इसका अक्तूबर की बारिश से कनेक्शन?

माना जाता है कि भारत में मानसून सामान्य तौर पर अगस्त तक पूरी तरह छा जाता है। इसके बाद सितंबर मध्य में इसके वापस लौटने की प्रक्रिया भी शुरू हो जाती है। मानसून के इसी लौटने की प्रक्रिया को मानसून विड्रॉल (निकासी) कहते हैं। राजस्थान से मानसून के लौटने की तारीख पारंपरिक तौर पर 17 सितंबर से मानी जाती है। इस दौरान बारिश खत्म होने के साथ ही नमी में कमी दर्ज की जाती है और देश के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों में भी बारिश का धीरे-धीरे कम होना जारी रहता है। सामान्य तौर पर पूरे भारत में मानसून विड्रॉल 15 अक्तूबर तक पूरा हो जाना चाहिए।

मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, इस साल सितंबर में मानसून के एक्टिव रहने का असर इसके लौटने की प्रक्रिया पर पड़ा है। यह प्रक्रिया कम से कम तीन हफ्ते की देरी से शुरू हुई। आईएमडी ने अक्तूबर की शुरुआत में एलान किया था कि भारत के पश्चिमी हिस्से से मानसून का लौटना 6 अक्तूबर तक शुरू हो गया। यानी सामान्य तारीख से करीब 20 दिन देरी से। इसके चलते अब मानसून विड्रॉल पूरा होने की तारीख नवंबर तक चली गई है। इस देरी का असर पूरे देश में अक्तूबर के मध्य और अंत में जबरदस्त बारिश के रूप में देखा जा रहा है। 

देश में इस साल ज्यादा बारिश का रेड अलर्ट क्यों?

1. मौसम विभाग के मुताबिक, उत्तर भारत, केरल-तमिलनाडु और कर्नाटक-आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में मानसून विड्रॉल के साथ ही जबरदस्त बारिश होती है। आमतौर पर यह सितंबर के अंत तक खत्म हो जाती है। लेकिन इस बार मानसून के लौटने में हो रही देरी की वजह से जहां उत्तर भारत में अक्तूबर मध्य तक बारिश जारी रहने की संभावना है, वहीं दक्षिण के राज्यों में बारिश की अवधि अक्तूबर के अंत तक बढ़ गई है। 

2. आईएमडी के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्रा ने हाल ही में कहा था कि उत्तरी केरल और कर्नाटक के तटों से लगे दक्षिण-पूर्व अरब सागर में कम दबाव वाला क्षेत्र बनने की वजह से भी मानसून के लौटने में देरी हो रही है। आसान शब्दों में समझें तो कम दबाव वाले क्षेत्र अरब सागर से हवाएं केरल की तरफ चल रही हैं और इसके चलते मानसून अब समुद्री क्षेत्र तक लौट पाने की बजाय केरल के ऊपर ठहर चुका है और यहां जबरदस्त बारिश का कारण बना है। अगर अरब सागर में यही कम दबाव वाला क्षेत्र मानसून सीजन की शुरुआत (मई-जून) में बनता है, तो इसके आगे बढ़ने की गति तेज हो जाती है। हालांकि, कम दबाव वाले क्षेत्र से चक्रवातों के पैदा होने का खतरा भी सबसे ज्यादा रहता है। 

तेजी से हो रहे जलवायु परिवर्तन को दर्शा रहा मानसून का देर से विड्रॉल

भारत के लिए मानसून का देर से लौटना एक बड़ी चिंता की बात है। यह 11वां साल है, जब मानसून अपने तय समय से देरी से वापस जा रहा है। 
  • 2020 में मानसून विड्रॉल 28 सितंबर को शुरू हुआ।
  • 2019 में यह तारीख 9 अक्टूबर थी। 
  • 2018 में मानसून की वापसी 29 सितंबर रही थी।
  • 2017 में मानसून विड्रॉल 27 सितंबर को शुरू हुआ था। 
  • 2016 में मानसून के लौटने की प्रक्रिया 15 सितंबर को शुरू हुई थी।

जलवायु परिवर्तन भी एक वजह

मानसून के देर से लौटने की एक वजह जलवायु परिवर्तन भी है। दरअसल, कार्बन उत्सर्जन की वजह से पृथ्वी पर ग्लोबल वॉर्मिंग का असर बढ़ता जा रहा है। इसका असर आर्कटिक क्षेत्र में सबसे ज्यादा पड़ रहा है, क्योंकि यहां बर्फ काफी तेजी से पिघल रही है। इससे पश्चिमी यूरोप और पूर्वोत्तर चीन में समुद्र में उच्च दबाव का क्षेत्र बन जाता है और प्लेनेटरी वेव्स (भ्रमणकारी लहरें) अपनी पूर्व की दिशा बदलकर दक्षिण-पूर्व की तरफ चलने लगती हैं। यह लहरें मानसून सीजन के खत्म होने के दौरान भारत में एंट्री लेती हैं और समुद्र के ऊपरी वायुमंडल में गड़बड़ियां पैदा करती हैं, जिससे सितंबर में भारी बारिश की घटनाएं दर्ज की जाती हैं।
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