हॉट स्प्रिंग क्षेत्र से दोनों देशों की सेनाएं लौटीं, फिंगर एरिया में कम हुई चीन की मौजूदगी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 09 Jul 2020 09:46 PM IST
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पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर टकराव वाले तीन स्थानों से भारत और चीन की सेनाओं के पीछे हटने की प्रक्रिया गुरुवार को पूरी हो गई। आज पैट्रोलिंग प्वाइंट 17 (हॉट स्प्रिंग) एरिया में चीनी सेना करीब दो किलोमीटर पीछे हटी है। इसके साथ ही पीपी-14, पीपी-15 और पीपी-17 पर सेनाओं के पीछे हटने की प्रक्रिया पूरी हो घई। सेना के सूत्रों ने बताया कि फिंगर क्षेत्र में चीनी सेना की संख्या कम हो रही है। 
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चीन की सेना आपसी सहमति के बाद पीपी-14, पीपी-15, पीपी-17 और पीपी-17ए एरिया में टकराव वाले स्थानों से करीब दो किलोमीटर पीछे लौटी है। भारतीय सेना ने भी इन इलाकों से अपने सैनिकों को लगभग इतनी ही दूरी तक पीछे किया है। मई के पहले सप्ताह में जब चीन ने एलएसी पर निर्माण कार्य शुरू किया था तब भारतीय सेना ने यहां पैट्रोलिंग इकाइयां तैनात की थीं। 

गलवां में  मौजूद हैं चीन के हथियार लैस वाहन

हालांकि, चीन की भारी हथियारों से लैस वाहन अभी भी गलवां घाटी क्षेत्र में मौजूद हैं। लेकिन, भारतीय सेना इस पर पूरी नजर बनाए हुए है। ऐसा 15 जून को गलवां क्षेत्र में दोनों सेनाओं के बीच हुई हिंसक झड़प को देखते हुए किया जाएगा। यह झड़प इसलिए हुई थी क्योंकि चीन ने दोनों देशों के बीच छह जून को हुई सहमति को मानने से इनकार कर दिया था और अपने सैनिक पीछे नहीं हटाए थे। सूत्रों का कहना है कि इस बार भारत कोई जोखिम लेने के लिए तैयार नहीं है। 
15 जून को हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के बीच वार्ताओं का लंबा दौर चला, जिसमें यह फैसला लिया गया। सेनाओं के पीछे हटने की यह प्रक्रिया पूरी तरह समाप्त हो जाने के बाद आगे की रणनीति के लिए दोनों पक्ष फिर वार्ता करेंगे। वार्ता के दौरान दोनों देश इस बात पर सहमत हुए हैं कि सीमा पर शांति बहाली के लिए जो भी कदम जरूरी होंगे वह जल्द से जल्द उठाए जाएंगे। 

एनएसए डोभाल की वीडियो कॉल से बदला चीन 

बता दें कि पहले चीन एलएसी पर अपने कदम पीछे करने को तैयार नहीं था। इसे लेकर रविवार को सुबह 8.45 बजे सेनाध्यक्ष एमएम नरवणे ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को फोन किया। फिर दोनों देशों के राजनयिकों के बीच बातचीत हुई। शाम को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए बात हुई थी। इसके अगले दिन यानी सोमवार को चीन ने सेना पीछे हटाने के लिए सहमति दे दी थी। 
डोभाल और वांग यी के बीच लगभग दो घंटे तक यह वार्ता चली थी। गतिरोध और 15 जून की हिंसा के लिए किसे दोषी ठहराया जाए, इस बात पर असहमति थी। डोभाल ने वांग से कहा कि बीजिंग को शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए एलएलसी के चार बिंदुओं पर भारतीय सेना के गश्त अधिकारों को बहाल करने की आवश्यकता है। विश्लेषकों का कहना है कि इस बातचीत का ही नतीजा है कि सेना को पैंगोंग झील पर सेना को अपनी गश्ती के अधिकार वापस मिल गए हैं।

दोनों देशों के सैनिकों ने उठाए प्रभावी कदम : चीन

वहीं, चीन ने गुरुवार को इस मामले में कहा कि चीनी और भारतीय सैनिकों ने गलवां घाटी और पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास अन्य इलाकों से पीछे हटने के लिए प्रभावी कदम उठाए हैं तथा हालात स्थिर और बेहतर हो रहे हैं। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान का यह बयान ऐसे वक्त पर आया है जब चीनी सेना ने पूर्वी लद्दाख में गतिरोध वाले हॉट स्प्रिंग्स से सभी अस्थाई ढांचों को हटा दिया है और सारे सैनिकों को हटाने की कार्रवाई पूरी कर ली है।

झाओ ने कहा,‘कमांडर स्तर की बातचीत में बनी सहमति पर अमल करते हुए चीन और भारत सीमा सैनिकों ने गलवां घाटी तथा अन्य इलाकों में अग्रिम रेखा पर पीछे हटने के लिए प्रभावी कदम उठाए हैं।’ दोनों देशों के बीच आगे बातचीत के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष चीन-भारत सीमा मामलों पर ‘परामर्श और समन्वय के लिए कार्य तंत्र’ (डब्ल्यूएमसीसी)की बैठकों सहित सैन्य और राजनयिक माध्यम से बातचीत जारी रखेंगे।
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