इनसाइड स्टोरी : सीमा सील न हुई होती तो सचिन पायलट दिखा देते दमखम

शशिधर पाठक, नई दिल्ली Updated Mon, 13 Jul 2020 09:48 PM IST
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sachin pilot - फोटो : सोशल मीडिया

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सार

  • 12 विधायक से ज्यादा नहीं बढ़ पाई समर्थकों की संख्या
  • चार से छह विधायक जयपुर लौट भी गए
  • करीब दस विधायक नहीं आ सके, राजस्थान में ही रह गए 
  • गहलोत की सतर्कता ने बिगाड़ दिया सारा खेल

विस्तार

राजस्थान के युवा उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट में जोश की कमी नहीं है। लेकिन जोश में कभी कभी होश कमजोर पड़ जाता है। सचिन पायलट यहीं मात खा गए। बुजुर्ग मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पुराने जोश के धनी हैं। उनमें जोश कम लेकिन होश ज्यादा रहता है। इसी चतुराई के खेल में उन्होंने समय पर राजस्थान सीमा सील करने का निर्णय लेकर सचिन पायलट की योजना को चित्त कर दिया। सचिन पायलट दबाव ही नहीं बना पाए। साथ देने वाले विधायकों की संख्या भी 15 के आंकड़े को पार नहीं कर पाई।
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अशोक गहलोत की गुगली  
सूत्र बताते हैं कि अशोक गहलोत के अधीन आने वाले गृह मंत्रालय की पुलिस के अधीन आने वाले स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओपी) ने जब प्राथमिकी दर्ज करके जांच शुरू की तो किसी के समझ में नहीं आया। एंटी करप्शन ब्यूरो की एफआईआर, सचिन पायलट को नोटिस भी लोगों को समझ में नहीं आई। किसी को यह भी समझ में नहीं आया कि आखिर कोविड-19 का बहाना लेकर अचानक मुख्यमंत्री ने राज्य की सीमा को क्यों सील करने का निर्णय लिया। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी समेत तमाम नेता नहीं समझ पाए। अब इन सारी योजनाओं की पर्तें खुल रही हैं। बताते हैं यह सब सचिन पायलट के ऑपरेशन को ध्वस्त करने के लिए था।
समय पर लग गई थी भनक
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को राजस्थान पुलिस की खुफिया इकाई (राजनीतिक विंग) ने समय पर सूचना दे दी थी। मुख्यमंत्री को इस बारे में अपने कुछ विधायकों मंत्रियों से भी जानकारी मिल रही थी। राज्यसभा चुनाव में मतदान के दौरान भी वह कुछ चिंतित थे। लेकिन मतदान में कांग्रेस के प्रत्याशियों के पक्ष में 123 मत आने के बाद गहलोत की बांछें खिल गई थीं।

बताते हैं इस बीच मुख्यमंत्री के पास सचिन पायलट के दबाव बनाने, भाजपा द्वारा राजस्थान में विधायकों को टटोलने की सूचना मिली। उन्होंने तत्काल इसे गंभीरता से लिया। अपने करीबी चार-पांच नेताओं को सचिन पायलट के करीबी विधायकों पर पकड़ बनाने में लगाया। इस काम में कुछ और सहयोगी लगे। दूसरी तरफ राजस्थान पुलिस ने अपना काम शुरू कर दिया। तीसरा निर्णय मुख्यमंत्री ने समय रहते राजस्थान की सीमा सील करने का लिया। नतीजतन बगावत करने वाली गोल में शामिल होने वाले विधायकों का राज्य के बाहर का मूवमेंट बाधित हो गया। मुख्यमंत्री गहलोत यहीं नहीं रुके। उन्होंने सही समय चुनकर सरकार पर आसन्न खतरे को भी सार्वजनिक कर दिया।

फेल हो गए सचिन पायलट
बताते हैं मार्च 2020 से सचिन पायलट की घुटन कुछ ज्यादा बढ़ गई थी। ज्योतिरादित्य सिंधिया भी इसी महीने में भाजपाई हो गए थे। ज्योतिरादित्य और सचिन पायलट के बीच के संवाद सूत्र सक्रिय थे। अभी भी हैं। इससे सचिन पायलट की पीड़ा और बढ़ गई। उनके समर्थक पिछले के संवाद सूत्र ने बताया कि करीब 30 विधायक साथ आ सकते हैं। अचानक एसओजी का नोटिस पायलट के लिए बहाना बन गया।

कुछ विधायकों को उन्होंने मानेसर, गुड़गांव आने को कहा। भाजपा के कुछ नेताओं के संपर्क में मध्यस्थ पहले से ही थे। भाजपा भी राजस्थान में अपनी ताकत, साथ आने वाले विधायकों की संख्या का आकलन कर रही थी। सचिन पायलट भी दिल्ली में आकर जम गए। इस दौरान उन्होंने दो फ्रंट खोला। पहला कांग्रेस से वरिष्ठ नेताओं से बातचीत का और दूसरा भाजपा के नेताओं से पर्दे के पीछे से संपर्क का।
 
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लगा करारा झटका

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