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Kerala: माकपा ने कहा- अगर सांप्रदायिक ताकतों को रोकना है, तो सबसे पहले RSS पर लगाएं प्रतिबंध

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 27 Sep 2022 06:46 PM IST
माकपा नेता एमवी गोविंदन
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सत्तारूढ़ माकपा (सीपीआईएम) ने मंगलवार को कहा कि किसी चरमपंथी संगठन या सांप्रदायिक ताकत पर प्रतिबंध लगाने से उसकी गतिविधियां खत्म नहीं होंगी। अगर इस तरह का कदम उठाना है तो सबसे पहले आरएसएस को प्रतिबंधित किया जाना चाहिए।   

माकपा के राज्य महासचिव एम. वी. गोविंदन का यह बयान तब आया है, जब इस तरह की रिपोर्ट्स सामने आईं कि केंद्र सरकार, पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) को आतंकी संगठनों की सूची में शामिल करने की योजना बना रही है। 

जेपी नड्डा ने क्या कहा था?

JP Nadda
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इससे एक दिन पहले भाजपा प्रमुख जेपी नड्डा ने आरोप लगाया था कि केरल अब आतंकवाद और अराजक तत्वों का केंद्र बन रहा है और यहां आम लोगों की जिंदगी सुरक्षित नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि वाम सरकार में आतंकियों को मौन समर्थन दिया जा रहा है। राज्य में लगातार सांप्रदायिकता बढ़ रही है। उसी के मद्देनजर माकपा नेता का यह बयान सामने आया है।
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प्रतिबंध लगाने से नहीं होगा समस्या का समाधान : गोविंदन

एमवी गोविंदन (फाइल)
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माकपा नेता ने कहा, अगर किसी संगठन को प्रतिबंधित करना है, तो उसे सबसे पहले आरएसएस को करना चाहिए। यह सांप्रदायिक गतिविधियों को अंजाम देने वाला मुख्य संगठन है। क्या इसे प्रतिबंधित किया जाएगा? एक चरमपंथी संगठन पर प्रतिबंध लगाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। आरएसएस को अतीत में प्रतिबंधित किया गया था। भाकपा (सीपीआई) पर भी प्रतिबंध लगाया गया था।

चरमपंथी संगठनों के खिलाफ जागरूकता फैलाने की जरूरत

Popular Front of India
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उन्होंने संवाददाताओं से कहा, 'किसी संगठन पर प्रतिबंध लगाने से वह या उसकी विचारधारा खत्म नहीं होगी। वे एक नए नाम या पहचान के साथ वापस आ जाएंगे। हमें ऐसे समूहों के खिलाफ जागरूकता पैदा करने व उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की जरूरत है।'
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भाकपा और आरएसएस पर पहले लग चुका प्रतिबंध

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ।
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भाकपा पर देश की आजादी के बाद साल 1950 में प्रतिबंध लगाया गया था। वहीं आरएसएस पर आजादी से पहले और बाद में प्रतिबंध लगाया गया था। माकपा नेता गोविंदन उसी का जिक्र कर रहे थे।
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