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महाराष्ट्र: बीजेपी-शिवसेना के फैसले पर सबकी निगाहें, मिलकर लड़े तो मिल सकती है ऐतिहासिक जीत

रवि बुले, अमर उजाला, मुंबई Updated Sun, 22 Sep 2019 02:11 AM IST
आदित्य ठाकरे-देवेंद्र फडणवीस-उद्धव ठाकरे (फाइल फोटो)
आदित्य ठाकरे-देवेंद्र फडणवीस-उद्धव ठाकरे (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
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खास बातें

  • मिलकर लड़े तो 220 सीटों पर फहर सकता है भगवा
  • कांग्रेस-एनसीपी को चाहिए कोई उत्साह फूंकने वाला
  • पहले की तरह उतना मुखर नहीं है शिवसेना
  • विधायकों की टूट से असमंजस में कांग्रेस-एनसीपी
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव की तारीख घोषित होने के बाद अब सबकी नजर बीजेपी-शिवसेना गठबंधन पर टिक गई है। सीट बंटवारे को लेकर दोनों लोकसभा चुनाव के वक्त से कह रहे है आमचं ठरलंय, यानी हमारा तय है। मगर अभी तक कोई अधिकृत बयान दोनों ही तरफ से नहीं आया।
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सिर्फ सीट बंटवारे के नए-नए फॉर्मूले आ रहे हैं। वहीं, कांग्रेस-एनसीपी ने 125-125 सीटों पर लड़ने की घोषणा कर दी है। 38 सीटें उन्होंने अपने सहयोगी दलों के लिए रखी है। जिनमें क्षेत्रीय दलों के साथ सपा भी शामिल हैं।

लोकसभा चुनाव में प्रकाश आंबेडकर के भारिप बहुजन महासंघ और ओवैसी के एआईएम मिलकर वंचित बहुजन अघाड़ी झंडे तले मैदान में थे। विधानसभा चुनाव से पहले ये बंधन टूट गया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस इसके टूटने से पहले अघाड़ी को राज्य में नंबर दो और कांग्रेस-एनसीपी को नंबर तीन बता रहे थे।

महाराष्ट्र में लोकसभा चुनाव न लड़ने वाली आप विधानसभा में मैदान में उतरेगी जबकि उस वक्त सिर्फ बीजेपी-शिवसेना के विरुद्ध प्रचार करने वाले मनसे प्रमुख राज ठाकरे सोच में पड़े हैं कि विधानसभा में ताल ठोंकें या नहीं। हालांकि उनकी पार्टी के सूत्र 100 उम्मीदवारों के चुनाव में उतरने का दावा कर रहे हैं। मनसे को उम्मीद थी की कांग्रेस-एनसीपी उसे अपने गठजोड़ में शामिल करेंगी मगर कांग्रेस इसके बिल्कुल पक्ष में नहीं है।


मिलकर लड़े तो 220 सीटों पर फहर सकता है भगवा

बीजेपी-शिवसेना-कांग्रेस और एनसीपी 2014 के चुनाव में अलग-अलग लड़े थे। तब बीजेपी को 122, शिवसेना को 63, कांग्रेस को 42, एनसीपी को 41 और अन्य को 20 सीटें मिली थी। इस बार बीजेपी-शिवसेना के अंदरूनी सर्वे मिलकर लड़ने पर 220 से ज्यादा सीटों का आंकड़ा छू रहे हैं।

मगर समस्या 2014 वाली ही है, सीट बंटवारे पर खींचतान। शिवसेना सीटों का 50-50 बंटवारा और जीतने पर पांच में से ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद चाहती है। जबकि जमीनी हालात बीजेपी को बिग ब्रदर बताते हैं।

मुख्यमंत्री फडणवीस चालाकी से बीते पांच साल में उद्धव ठाकरे को बड़ा भाई कह कर विश्वास में लिए रहे। जबकि पीएम मोदी ने इस महीने मुंबई यात्रा पर उद्धव को अपना छोटा भाई कहा। इस बीच संबंध बनाए रखने की परस्पर कोशिश में यह जरूर हुआ कि दोनों ने अपने-अपने नेताओं की बेवजह बयानबाजी पर लगाम लगाए रखी।
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पहले की तरह उतनी मुखर नहीं है शिवसेना

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