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किसान आंदोलन पर खालिस्तानियों-वामपंथियों का कब्जा, आईबी ने केंद्र को किया अलर्ट

अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Sat, 12 Dec 2020 05:20 AM IST
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किसान आंदोलन
किसान आंदोलन - फोटो : एएनआई

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केंद्रीय खुफिया ब्यूरो (आईबी) ने किसान आंदोलन को अतिवादी वाम संगठनों और खालिस्तानी संगठनों की घुसपैठ के प्रति अलर्ट किया है। आईबी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि किसान आंदोलन के बहाने अतिवादी वाम संगठनों और खालिस्तान से जुड़े संगठन नागरिकता संशोधन कानून और विभिन्न मामलों में जेल में बंद अतिवादी वाम संगठनों के नेताओं के समर्थन में आवाज उठा रहे हैं। आईबी ने इस आंदोलन के बहाने व्यापक हिंसा की आशंका जताई है।
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आईबी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि किसान आंदोलन के बहाने अतिवादी वाम संगठनों ने किसानों को भड़काने की मुहिम शुरू की है। इस आंदोलन के बहाने कोरेगांव यलगार परिषद केस से जुड़े लोगों को रिहा करने की मांग की जा रही है।


आंदोलन स्थल पर इस मामले में जेल में बंद लोगों के समर्थन में आवाज उठाई जा रही है। बीते कुछ दिनों में इस मामले में जेल में बंद माओवादी नेता वरवर राव, गौतम नवलखा जैसी कई हस्तियों को रिहा करने की मांग उठी है। जबकि सीएए आंदोलन के दौरान देशविरोधी टिप्पणी करने वाले शरजील इमाम के पक्ष में टिकरी बॉर्डर पर पोस्टर लगाए गए।

आईबी ने अपनी रिपोर्ट में किसान आंदोलन के बहाने सीएए विरोधी आंदोलन को पुनर्जीवित करने और कोरेगांव हिंसा मामले में जेल में बंद लोगों के पक्ष में माहौल तैयार करने की साजिश रचने का अंदेशा जताया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कई खालिस्तानी संगठन भी इस आंदोलन के सहारे पंजाब में कानून व्यवस्था की समस्या को बिगाड़ने की मुहिम पर काम कर रहे हैं।



रिपोर्ट में टिकरी बॉर्डर पर शरजील इमाम और उमर खालिद की रिहाई की मांग संबंधी पोस्टर लगाने का जिक्र किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जब मीडिया ने इन पोस्टरों के संबंध में भारतीय किसान संगठन उगराहा के दर्शनपाल सिंह से सवाल पूछा तो उन्होंने कहा कि हमारे संगठनों के बीच एक व्यापक सहमति बनी है।

तय हुआ है कि जिन पर एनआरसी और सीएए के खिलाफ आंदोलन के दौरान झूठे आरोप लगे हैं, उसके खिलाफ आवाज उठानी है। इसे झूठे केस के रूप में प्रचारित करना है।

सरकार इस पर चुप
हालांकि सरकार की ओर से किसान आंदोलनों पर कोई टिप्पणी नहीं की गई। शुक्रवार को कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने जरूर शरजील इमाम के समर्थन पर लगे पोस्टर पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यह किसान आंदोलन है। इसमें इमाम का समर्थन जैसी बात समझ से परे है। यह खतरनाक ही नहीं बल्कि किसान आंदोलन की प्रासंगिकता पर भी सवाल खड़ा करेगा। 

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