झारखंड की बुधनी कैसे बनीं 'नेहरू की पत्नी'!

बीबीसी Updated Wed, 02 Nov 2016 05:40 PM IST
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बुधनी
बुधनी - फोटो : BBC

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तारीख थी छह दिसंबर साल 1959  दिन-रविवार धनबाद जिले के खोरबोना गांव की बुधनी मंझिआईन काफी खुश थीं। उन्होंने अच्छी साडी पहनी प्रिंटेड ब्लाउज कान में झुमके और संथालियों के पारंपरिक हार उस वक्त उनकी उम्र महज 15 साल थी। झारखंड में दामोदर वैली कॉरपोरेशन (डीवीसी) के अफसरों ने उन्हें प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के स्वागत के लिए चुना था। उस दिन नेहरू झारखंड में बने पंचेत बांध का उद्घाटन करने आने वाले थे।
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पंचेत पहुंचने पर बुधनी मंझिआईन ने उनका पारंपरिक तरीके से स्वागत किया। उन्हें माला पहनाई गई। चंदन लगाकर आरती उतारी गई। प्रधानमंत्री नेहरू ने पंचेत बांध का उद्घाटन बुधनी से ही कराया। वे चाहते थे कि बांध के निर्माण में लगा मजदूर ही इसका उद्घाटन करे। इसलिए प्रधानमंत्री नेहरू की मौजूदगी में बुधनी ने बटन दबाकर पंचेत बांध का उद्घाटन किया।
इसके साथ ही वे सुर्खियों में आ गईं। कोलकाता से प्रकाशित 'स्टेट्समैन' और 'आनंद बाजार पत्रिका' समेत कई अखबारों ने प्रधानमंत्री नेहरू के साथ उनकी तस्वीरें और उद्घाटन की खबर पहले पन्ने पर प्रमुखता से छापीं। बुधनी मंझिआईन भारत की शायद पहली मजदूर होंगी, जिनके हाथों किसी परियोजना का उद्घाटन कराया गया।
 
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मैं नेहरू की पत्नी बन चुकी हूं

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