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Gujarat Election: 2017 में 30 सीटों पर NOTA ने बिगाड़ा था खेल, इनमें से 10 पर आज मतदान, कौन रहा था फायदे में?

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Thu, 01 Dec 2022 12:51 PM IST
सार

Gujarat Election 2022: पिछले चुनाव में 30 विधानसभा सीटों ऐसी थीं, जिनमें जीत-हार का अंतर नोटा को मिले वोटों से कम था। इसमें से 16 सीटों पर भाजपा तो 12 पर कांग्रेस को जीत मिली थी।  इसी तरह दो सीटों पर जीते निर्दलीय उम्मीदवारों को जितने वोट से जीत मिली, उस सीट पर उससे ज्यादा वोट नोटा को मिले थे। 

गुजरात चुनाव नोटा
गुजरात चुनाव नोटा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गुजरात में आज पहले चरण का चुनाव हो रहा है। सुबह 11 बजे तक 19 फीसदी से ज्यादा वोटिंग हो चुकी है। इस चुनाव में भी मतदाता के पास नोटा का इस्तेमाल करने का विकल्प है। 2017 की बात करें तो उस चुनाव में नोटा ने राज्य की 182 सीटों में से 30 सीटों पर जीत-हार का गणित बिगाड़ दिया था। इनमें से 10 सीटों पर पहले चरण में वोट पड़ रहे हैं। कपराडा, डांग्स, बोटाद, वंकानेर, तलाजा, पोरबंदर, राजकोट ग्रामीण, जमजोधपुर, वागरा और दसदा पहले चरण की वो सीटें हैं, जहां जीत-हार का गणित नोटा ने बिगाड़ा था। 

आइये जानते हैं उन 30 सीटों के बारे जहां नोटा ने जीत-हार का गणित बिगाड़ा था? इनमें से किन सीटों पर जीत-हार का अंतर एक हजार भी नहीं पहुंचा और नोटा पर हजारों में वोट पड़े? वो कौन सी सीटें थीं जहां के मतदाताओं ने सबसे ज्यादा नोटा का इस्तेमाल किया? साथ ही जानते हैं नोटा के इस्तेमाल की कहानी भी...

पहले चरण में इन सीटों पर नोटा ने बिगाड़ा था?
 2017 चुनाव में पहले चरण में दस सीट ऐसी थीं जहां नोटा ने उम्मीदवारों की जीत-हार का गणित बिगाड़ा था। ये दस सीट थीं कपराडा, डांग्स, बोटाड, वांकानेर, तलजा, पोरबंदर, राजकोट ग्रामीण, जामजोधपुर, वागरा एवं डसाडा। इन सीटों पर जीत-हार के अंतर से नोटा को अधिक वोट पड़े थे। इन दस सीट में से छह सीट तो ऐसी थीं जहां जीत-हार का अंतर 1,000 वोट से भी कम था। वहीं, चार सीट ऐसी थीं जहां उम्मीदवारों के किए जीत-हार का अंतर एक हजार से दो हजार वोट के बीच था जबकि, यहां नोटा को इससे अधिक वोट मिले थे। इन दस सीटों में से कांग्रेस के खाते में छह सीट गई थीं। वहीं, भाजपा ने नोटा द्वारा प्रभावित चार सीट पर विजय हासिल की थी।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अर्जुन मोडवाढिया की पोरबंदर सीट भी इसी तरह की सीटों में शामिल थी। यहां से मोडवाढिया को 1,855 वोट से हार का सामना करना पड़ा था। पोरबंदर सीट के 3,433 मतदाताओं ने नोटा का इस्तेमाल किया था। 

 

गुजरात चुनाव 2017 एवं नोटा
गुजरात चुनाव 2017 एवं नोटा - फोटो : अमर उजाला
2017 में कितनी सीटें ऐसी जहां जीत-हार के अंतर से ज्यादा वोट नोटा को मिले?
पिछले चुनाव में 30 विधानसभा सीटों ऐसी थीं, जिनमें जीत-हार का अंतर नोटा को मिले वोटों से कम था। इसमें से 16 सीटों पर भाजपा, 12 सीटों पर कांग्रेस और दो सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों को जीत मिली थी। सात सीटें ऐसी थीं जहां जीत-हार का अंतर एक हजार से भी कम रहा था। इन सभी सीटों पर नोटा पर पड़े वोट हजार से ज्यादा थे। तीन सीटों पर पर तो तीन हजार से ज्याद लोगों ने नोटा पर वोट डाला था। नौ सीटों पर जीत-हार का अंतर एक हजार से दो हजार के बीच था।  इनमें से आठ सीटों पर जीत-हार का अंतर नोटा पर पड़े वोट से कम था। वहीं, 11 सीटें ऐसी थीं जहां जीत-हार का अंतर दो से तीन हजार के बीच था। इन सभी सीटों पर नोटा पर पड़े वोट जीत हार के अंतर से ज्यादा थे। 
वहीं, छह सीटों जीत हार का अंतर तीन से चार हजार के बीच था। इनमें से तीन सीटों पर जीत-हार का अंतर उन सीटों पर नोटा पर पड़े वोट से कम था। मोरवा हडफ सीट पर निर्दलीय भूपेंद्रसिंह  खांत 4,366 वोट से जीते थे। उन्होंने भाजपा के विक्रमसिंह डिंडोर को हराया था। मोरवा हडफ सीट पर नोटा पर 4,962 वोट पड़े। यानी, अगर नोटा पर पड़े वोट भाजपा को उम्मीदवार को मिलते तो नतीजा बदल जाता।

किन सीटों पर सबसे ज्यादा मतदाताओं ने नोटा पर डाला वोट?
  1. दंता: बनासकांठा जिले की दंता विधानसभा सीट ऐसी थी जहां के मतदाताओं ने सबसे ज्यादा नोटा का इस्तेमाल किया। 2017 में इस सीट के 6,461 मतदाताओं ने नोटा पर वोट डाला था। दंता से कांग्रेस के कांतिभाई खराड़ी 24 हजार से ज्यादा वोट से जीते थे।   
  2. जेतपुर: जिन सीटों पर सबसे ज्यादा नोटा पर वोट पड़े उनमें दूसरे नंबर पर जेतपुर सीट थी। यहां के 6,155 मतदाताओं ने नोटा पर वोट डाला था। इस सीट से कांग्रेस के सुखराम भाई रठावा  3,052 वोट से जीते थे। उनकी जीत का अंतर नोटा को मिले वोट से कम था। 
  3.  हलोल: पंचमहल जिले हलोल सीट पर भी नोटा का जमकर इस्तेमाल हुआ था। यहां के  6,052 मतदाताओं ने नोटा का इस्तेमाल किया था। हालांकि, नोटा का असर जीत-हार पर नहीं पड़ा था। यहां से भाजपा के जयद्रथ सिंह परमार ने कांग्रे के उदे सिंह राणा को 57 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था। 

गुजरात विधानसभा चुनाव 2022
गुजरात विधानसभा चुनाव 2022 - फोटो : अमर उजाला
कब से शुरू हुआ नोटा का इस्तेमाल?
भारत में नोटा का इतिहास एक दशक भी पुराना नहीं है। दरअसल, 27 सितंबर 2013 को, सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को ईवीएम मशीनों में एक बटन प्रदान करने का आदेश दिया था। आदेश के माध्यम से कोर्ट ने कहा था कि चुनावों में "उपरोक्त में से कोई नहीं" वोट डालने का अधिकार लागू होना चाहिए।
आदेश के पालन में चुनाव आयोग ने वोटरों को NOTA का प्रयोग करने की अनुमति देने के लिए 'NOTA' विकल्प के लिए एक विशेष चिह्न पेश किया। यह चिह्न सभी ईवीएम के अंतिम पैनल में दिखाई देता है। पहली बार इसका प्रयोग 2013 में नवंबर दिसंबर में हुए पांच राज्यों मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मिजोरम एवं दिल्ली के विधानसभा चुनाव में हुआ। हालांकि, नोटा पर सबसे ज्यादा वोट पड़ने पर भी दूसरे नंबर पर रहने वाला उम्मीदवार जीता हुआ माना जाता है। यानी, नोटा प्रत्याशियों की जीत पर असर नहीं डालता।

वो तीस सीटें जहां जीत-हार का अंतर नोटा से भी कम रहा  
 
विधानसभा कौन जीता कितने वोट से जीत नोटा को मिले वोट
कपराडा कांग्रेस 170 3868
गोधरा भाजपा 258 3050
ढोलका भाजपा 327 2347
मनसा कांग्रेस 524 3000
डांग कांग्रेस 768 2184
बोटाड भाजपा 906 1334
देवदार कांग्रेस 972 2988
छोटा उदेपुर कांग्रेस 1,093 5870
विजापुर भाजपा 1,164 1280
वांकानेर कांग्रेस 1,361 3170
मोडासा कांग्रेस 1,640 3681
हिम्मतनगर भाजपा 1,712 3334
तलजा कांग्रेस 1,779 2918
पोरबंदर भाजपा 1,855 3433
उमरेठ भाजपा 1,883 3710
धनेरा कांग्रेस 2,093 2341
राजकोट ग्रामीण भाजपा 2,179 2559
खंभात भाजपा 2,318 2731
सोजित्रा कांग्रेस 2,388 3112
मातर भाजपा 2,406 4090
जामजोधपुर कांग्रेस 2,518 3214
प्रांतिज भाजपा 2,551 2907
वागरा भाजपा 2,628 2807
फतेपुरा भाजपा 2,711 4573
दभोई भाजपा 2,839 3046
विसनगर भाजपा 2,869 2992
जेतपुर कांग्रेस 3,052 6155
लूनावाडा निर्दलीय 3,200 3419
दसाडा कांग्रेस 3,728 3796
मोरवा हदफ निर्दलीय 4,366 4962
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