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Maa Robot: दिव्यांग बेटी को भोजन कराने के लिए घर पर ही बना दिया रोबोट

एजेंसी, पणजी। Published by: Amit Mandal Updated Mon, 26 Sep 2022 01:56 AM IST
सार

यह रोबोट उस लड़की को उसके आवाज से मिले संदेश (वॉयस कमांड) के आधार पर उसे भोजन कराता है। वह लड़की अपनी विकलांगता के कारण अपना हाथ भी नहीं हिला सकती है।

प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pexels
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विस्तार

अपनी विकलांग बेटी के लिए गोवा के दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी बिपिन कदम ने एक ऐसा रोबोट बनाया है जो उसकी बेटी को आवाज के निर्देशों पर उसे भोजन कराता है। उसने इसे ‘मां रोबोट’ नाम दिया है। इससे भी बड़ी बात ये है कि कर्मचारी के पास न तो विशेष तकनीकी जानकारी है और इसके लिए उसने न ही किसी से सहयोग लिया है। गोवा राज्य नवाचार परिषद ने बिपिन की इस खोज के लिए उसकी सराहना की है और उन्हें मशीन पर आगे काम करने और इसके व्यावसायिक इस्तेमाल की संभावनाओं को खोजने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है।



भोजन को रोबोट में स्थापित एक प्लेट पर रखा जाता है। यह रोबोट उस लड़की को उसके आवाज से मिले संदेश (वॉयस कमांड) के आधार पर उसे भोजन कराता है। वह लड़की अपनी विकलांगता के कारण अपना हाथ भी नहीं हिला सकती है। वह रोबोट को संदेश देती है कि वह क्या भोजन करना चाहती है, जैसे सब्जी, दाल-चावल का मिश्रण या अन्य कुछ। कदम दक्षिण गोवा के बेथोरा गांव के निवासी हैं।  


पत्नी भी दो साल से बिस्तर पर
बिपिन ने बताया कि उनकी 14 वर्षीय बेटी दिव्यांग है और खुद कुछ करने में सक्षम नहीं है। वह इसके लिए पूरी तरह से अपनी मां पर निर्भर थी। करीब दो साल से मेरी पत्नी भी बीमार है और बिस्तर से उठ नहीं पाती। भोजन न मिलने से मेरी बेटी परेशान रहती थी। उसे भोजन कराने के लिए मुझे कार्यस्थल से बीच में घर आना पड़ता था। कदम की पत्नी ने उससे कहा कि उन्हें कुछ ऐसा करना चाहिए ताकि उनकी बेटी किसी पर निर्भर हुए बिना समय पर भोजन कर सके। लगभग एक साल पहले कदम ने ऐसा रोबोट खोजना शुरू किया, जो उसे भोजन करा सके, लेकिन ऐसा कोई रोबोट कहीं भी उपलब्ध नहीं था। इसलिए, कदम ने इसे खुद बनाने का फैसला किया। कदम ने इसके लिए ऑनलाइन माध्यमों से सॉफ्टवेयर की मूल बातें सीखीं।

12-12 घंटे किया काम, सीखी रोबोटिक्स
कदम ने बताया, मैंने इसके बिना रुके दिन में 12-12 घंटे काम किया। अपने बचे हुए समय को शोध और ये सीखने में लगाया कि रोबोट कैसे बनाया जाता है। मैंने चार महीने तक लगातार शोध किया और फिर इस रोबोट को डिजाइन किया। अब जब मैं काम से वापस आता हूं तो अपनी बेटी को मुस्कुराते हुए देखता हूं। ये देखकर मैं ऊर्जा से सराबोर हो जाता हूं। मां रोबोट उसे वॉयस कमांड से भोजन करा देता है। उन्होंने कहा, मैं इस रोबोट को पूरी दुनिया में पहुंचाना चाहता हूं।  

जरूरतमंदों की मदद कर सकती है डिवाइस
गोवा राज्य नवाचार परिषद के प्रोजेक्ट डायरेक्टर सुदीप फलदेसाई ने कहा, इस उत्पाद की बाजार में बहुत मांग हो सकती है। ये दुनियाभर में इसी प्रकार की समस्या से जूझ रहे तमाम जरूरतमंद लोगों की मदद कर सकता है। अभी इस उत्पाद के दाम निर्धारित नहीं किए गए हैं, ये काम अभी किया जाना बाकी है।

 

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