किसानों के साथ दुविधा में सरकार : करे सख्त कार्रवाई या अपनाए नरम रुख

Dev Kashyap शशिधर पाठक, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप
Updated Wed, 27 Jan 2021 01:46 AM IST

सार

  • किसानों के साथ सॉफ्ट कार्नर ने बांध रखे हैं हाथ।
  • लाल किला पर निहंग और सिक्ख युवाओं की करतूत पैदा कर रही है टीस।
  • कई राज्यों के मुख्यमंत्री आए सामने, उठाया सवाल, की शांति की अपील।
  • राजनीतिक दलों की घेरेबंदी बढ़ी।
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लाल किले पर प्रदर्शन करते किसान
लाल किले पर प्रदर्शन करते किसान - फोटो : पीटीआई

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विस्तार

केंद्र सरकार को दिल्ली में किसान आंदोलन, ट्रैक्टर मार्च और उपद्रव के घटनाक्रम पच नहीं रहे हैं। लाल किला में घोड़े पर सवार निहंग की तलवार के जोर पर घुसे प्रदर्शनकारियों की करतूत भी टीस बनकर चुभ रही है, लेकिन प्राप्त जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार के हाथ बंधे हैं। सरकार दुविधा में है।
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उसे समझ में नहीं आ रहा है कि सीमा पर डेढ़ लाख से अधिक की संख्या में डटे किसानों के साथ सख्ती से निबटे या नरम रुख अपनाए, लेकिन गृहमंत्री के घर हुई उच्चस्तरीय बैठक से साफ है कि लाल किला पर लोकतंत्र को अपमानित करने जैसी कार्रवाई पर केंद्र किसी को बख्शने के मूड में नहीं है। दूसरी तरफ स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्यों के मुख्यमंत्री और राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी केंद्र सरकार को घेरना शुरू कर दिया है।




दिल्ली पुलिस कमिश्नर एसएन श्रीवास्तव ने किसानों से शांति बनाए रखने, सीमा पर लौट जाने की अपील की है। किसानों के उपद्रव को देखते हुए अर्धसैनिक बलों की दस कंपनियां तैनात कर दी गई हैं। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने अपने आवास पर गृह मंत्रालय के अधिकारियों, दिल्ली पुलिस के कमिश्नर एसएम श्रीवास्तव के साथ उच्च स्तरीय बैठक की है। समझा जा रहा है कि गृहमंत्री इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मंत्रणा करेंगे। फिलहाल सरकार अभी स्थितियों की समीक्षा कर रही है और किसान आंदोलन के समापन के विकल्पों पर भी विचार तेज हो गया है।

घोड़े पर सवार निहंग को देख पुलिस ने खाली कर दिया रास्ता
डेढ़ बजे के करीब किसानों का जत्था लाल किला पहुंचा। चश्मदीद से प्राप्त जानकारी के अनुसार उस समय लाल किला के भीतर जाने वाला गेट बंद था। वहां कुछ प्रदर्शनकारी किसान इकट्ठा थे। इस बीच हाथ में तलवार लिए निहंग का घोड़ा पहुंचा। उसके पीछे कुछ और थे। बताते हैं निंहग को देखते ही पुलिस के जवानों ने रास्ता दे दिया। निहंग के पीछे-पीछे पूरी भीड़ लाल किला के अंदर दाखिल हो गई। इसके बाद युवक लाल किला की प्राचीर पर स्वतंत्रता दिवस मनाए जाने वाले स्थल पर पहुंच गए। वहां तिरंगा झंडा पहले से लहरा रहा था। प्रदर्शनकारियों ने उसे नहीं छुआ। कुछ प्रदर्शनकारियों के हाथ में किसान संगठनों के झंडे थे। कुछ निशान साहिब का झंडा लिए थे। इसके बाद जो हुआ उसे पूरे देश ने देखा।  

किसानों ने तोड़ा केंद्र सरकार और पुलिस का भरोसा
केंद्र सरकार के एक बड़े अफसर (सचिव) ने कहा कि किसानों ने ट्रैक्टर परेड के नाम पर सरकार और दिल्ली पुलिस का भरोसा तोड़ा है। किसान नेता शांतिपूर्वक सिंघु, टीकरी और गाजीपुर बार्डर पर प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन गणतंत्र दिवस के दिन जो हुआ है, उसे अच्छा नहीं कहा जा सकता। केंद्र सरकार लगातार किसानों के साथ अच्छा व्यवहार कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं किसानों के हित को लेकर संवेदनशील रहते हैं। जो हुआ अफसोसजनक है।

उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह का कहना है कि पुलिस के साथ किसान संगठनों की बातचीत, ट्रैक्टर परेड का रूट तय हो जाने के बाद दिल्ली पुलिस निंश्चिंत हो गई थी। उसने स्थितियों को देखकर सुरक्षा के इंतजाम और रूट प्लान को तैयार किया था। ऐसे में किसानों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन की शर्त को बनाए रखना चाहिए था। प्रकाश सिंह कहते हैं कि केंद्र सरकार किसानों से संवाद कर रही थी और लगातार सॉफ्ट कार्नर लेकर चलना चाह रही थी। सरकार की मंशा कहीं भी किसानों पर बल प्रयोग करने की नहीं थी, लेकिन किसानों ने सरकार और दिल्ली पुलिस के इस विश्वास को झटका दे दिया। नरम रुख का गलत लाभ ले लिया। प्रकाश सिंह भी इस मामले में गृह मंत्रालय, दिल्ली पुलिस और सुरक्षा इंतजाम में खामी को नहीं मानते।

पवार ने दी नसीहत, शिवसेना ने कसा तंज
एनसीपी नेता शरद पवार का दिल्ली में हिंसा को लेकर आया बयान काफी महत्वपूर्ण है। शरद पवार ने कहा कि हिंसा को उकसाने वाले कारणों की तरफ देखना होगा। शरद पवार ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा और कहा कि केंद्र सरकार ने अपनी जिम्मेदारियां ठीक ढंग से नहीं निभाई। कृषि मामलों के पारंगत नेता ने कहा कि किसान शांतिपूर्ण तरीके से बैठे थे और फिर वो क्रोधित हो गए। शरद पवार ने कहा कि दिल्ली में हुई हिंसा का किसी कीमत पर समर्थन नहीं किया जा सकता, लेकिन इसके साथ उन्होंने केंद्र सरकार को भी नसीहत दी। पवार ने कहा कि सरकार को परिपक्वता दिखानी चाहिए और सही निर्णय करना चाहिए।

कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा कि हिंसा किसी समस्या का हल नहीं है। चोट किसी को भी लगे, नुकसान हमारे देश को होगा। देश हित के लिए कृषि विरोधी कानून वापस लो।

शिवसेना नेता संजय राउत ने दिल्ली में किसानों के प्रदर्शन और हिंसा के बाद जोरदार तंज कसा। संजय राउत ने कहा कि कानून किसके लिए बनाए जाते हैं। जब इससे लोग खुश नहीं हैं तो ये कानून किसके लिए हैं? आज हुई हिंसा का जिम्मेदार कौन है? संजय राउत ने कहा कि कोई और सरकार होती तो उससे कानून व्यवस्था के नाम पर इस्तीफा मांगा जाता। संजय राउत ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा अब ममता बनर्जी या उद्धव ठाकरे से इस्तीफा मांगे।

ममता बनर्जी और कैप्टन अमरिंदर सिंह का बयान
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने दिल्ली में हुई हिंसा को किसानों की भावना के खिलाफ बताया। कैप्टन ने कहा कि वह दिल्ली के दृश्यों से हतप्रभ हैं। कुछ तत्वों द्वारा की गई हिंसा बर्दाश्त नहीं की जा सकती। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने तीनों कृषि कानूनों को पूरी तरह से गलत बताया और केन्द्र सरकार से किसानों की मांग मान लेने की अपील की।

उन्होंने ध्वजारोहण के बाद इसे देश के संघीय ढांचे के विरुद्ध बताया। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ट्वीट करके कहा कि केंद्र सरकार बिना किसानों को विश्वास में लिए तीनों कृषि कानून लेकर आई। ममता ने कहा कि पूरे भारत में और दिल्ली में किसान दो महीने से डेरा डाले हैं। किसानों के विरोध के बावजूद वे (केन्द्र सरकार) उनसे निबटने में लापरवाह हैं। उन्हें किसानों से जुड़ना चाहिए और इन कानूनों को निरस्त करना चाहिए।  

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