गतिरोध दूर, किसान आंदोलन खत्म होने के आसार, आधी बन गई बात, अब हल का पल

Gaurav Pandey हरि वर्मा, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Thu, 21 Jan 2021 02:13 AM IST
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किसान आंदोलन
किसान आंदोलन - फोटो : अमर उजाला

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प्रकाश उत्सव पर वाहे गुरु की कृपा से किसान आंदोलन में आधी बात बन गई है। आधी पर फैसला गुरुवार और शुक्रवार को होने के आसार हैं। आंदोलन के 56वें दिन बुधवार को दसवें दौर की वार्ता सबसे सकारात्मक रही। सब कुछ ठीक रहा, तो किसान गणतंत्र दिवस पर पंजाब के साथ-साथ अपने-अपने घरों में ही ट्रैक्टर रैली निकालकर जीत का जश्न मनाएंगे।
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सकारात्मक प्रस्ताव
सरकार तीनों कृषि कानूनों के अमल पर डेढ़ साल के लिए रोक लगाने का सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देने को तैयार है। इसके बाद जरूरत पड़ने पर अमल पर रोक आगे भी बढ़ाई जा सकती है। इस बीच सुप्रीम कोर्ट से इतर एक नई कमेटी बनेगी जिसमें किसान संगठनों के प्रतिनिधियों, कृषि विशेषज्ञों और सरकार के प्रतिनिधि होंगे। यही कमेटी तीनों कृषि कानूनों के पहलुओं के साथ-साथ न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर चर्चा करेगी। इसी के हिसाब से आगे कृषि कानूनों में संशोधन किए जाएंगे। आंदोलन के दौरान किसानों पर दर्ज सभी मामले वापस लिए जाएंगे। एनआईए समन ठंडे बस्ते में डाल निर्दोषों पर कार्रवाई नहीं होगी।


अब आगे क्या
सरकार से मिले इन सकारात्मक प्रस्तावों पर गुरुवार की सुबह पंजाब के सभी किसान संगठन ताजा चर्चा करेंगे। फिर दोपहर में दूसरे दौर की चर्चा संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में होगी। इसमें ज्यादातर संगठनों की राय के हिसाब से जो नतीजे आएंगे, उससे सरकार को अवगत कराया जाएगा। 22 जनवरी को 12 बजे विज्ञान भवन में सरकार और आंदोलनकारी किसान संगठनों के बीच बातचीत में हल के आसार हैं। संयुक्त किसान मोर्चा की सकारात्मक स्वीकृति पर सुप्रीम कोर्ट से इन सहमतियों पर अंतिम मुहर लग जाएगी। इसके बाद किसान संगठन 26 जनवरी को अपने-अपने घर लौटकर ही गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर रैली निकालकर जीत का जश्न मनाएंगे।

शुरू में कड़वाहट
दसवें दौर की वार्ता में एनआईए समन और ट्रैक्टर रैली को लेकर शुरुआत में कड़वाहट रही। सरकार ने ट्रैक्टर रैली न निकालने की अपील की। किसान संगठनों ने कहा, रैली निकलेगी। मंगलवार के बाद बुधवार की सुबह विज्ञान भवन में दिल्ली पुलिस से ट्रैक्टर रैली पर चर्चा हुई। आउटर रिंग रोड बनाम केएमपी के वैकल्पिक रोडमैप चर्चा चली। सहमति नहीं बनी। इसे गुरुवार पर टाला गया। तय हुआ अब सरकार से वार्ता की जाए। सरकार से सकारात्मक वार्ता के बाद ट्रैक्टर रैली पर गुरुवार को दिल्ली पुलिस से होने वाली चर्चा फिलहाल स्थगित कर दी गई। बैठक में एनआईए समन का मुद्दा उठा। तल्खी बढ़ी। किसान संगठनों ने पुरजोर विरोध जताया। सरकार ने भरोसा दिया कि यदि एनआईए ने निर्दोषों को समन किया है, तो उनके नाम दें, कार्रवाई नहीं होगी। संकेत यह हैं कि हल की ओर सकारात्मक दिशा में बात बढ़ी तो एनआईए समन को ठंडे बस्ते में डाला जा सकता है। अब गुरुवार को सरकार से मिले इन नये प्रस्तावों पर किसानों की आपसी माथापच्ची होने जा रही है।

ऐसे बन रही बात
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को फार्मूला सुझाया था कि हल तक क्यों न कानून के अमल पर रोक लगा दी जाए। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान खुद तत्काल रोक लगा भी दी। इससे भी बात नहीं बनी तो अब सरकार थोड़ा और नरम पड़ी। कानूनों के अमल पर आगे एक-डेढ़ साल तक की रोक लगाने का प्रस्ताव दिया। कमेटी से बातचीत में हल में देर की सूरत में अमल पर रोक को और आगे बढ़ाने का आश्वासन दिया। इससे पहले पर्दे के पीछे मध्यस्थता कर रहे राजनाथ सिंह ने कानूनों को आजमाने के लिए किसानों को भरोसा दिया था। लक्खा बाबा की कोशिश भी रंग लाई। इससे पहले बुधवार की सुबह सुप्रीम कोर्ट ने भी ट्रैक्टर रैली को लेकर सरकार और दिल्ली पुलिस के पाले में गेंद डाल दी। सुप्रीम कोर्ट ने भले अपने बनाए गए पैनल पर सवाल उठाए जाने को लेकर चिंता जताई और कहा कि पैनल में न जाएं लेकिन तोहमत न लगाएं। सरकार की ओर से भी शुरू से यह कोशिश रही कि 11 सदस्यीय कमेटी बनाकर वार्ता की राह खोली जाए। किसान संगठनों ने दसवें दौर की वार्ता में भी सरकार को दो टूक संदेश दे दिया कि सुप्रीम कोर्ट की कमेटी के सामने वे अपना पक्ष नहीं रखेंगे। हालांकि सरकार और किसान संगठनों की नई कमेटी बनाने पर अब कृषि कानूनों के अमल पर सरकार की ओर से रोक के प्रस्ताव के बाद विचार करने का मन बना है। दरअसल, आम लोगों में किसान संगठनों के अड़ियल रवैये को लेकर भ्रांतियां बढ़ीं। 

हल की पहल से उम्मीद
सुबह 11 बजे दिल्ली पुलिस के साथ बैठक बेनतीजा। दोपहर 12 सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट आदेश नहीं। दो बजे से सरकार से वार्ता। करीब तीन घंटे बातचीत। ट्रैक्टर रैली और एनआईए समन पर एक घंटा गरमागरमी। लंच ब्रेक के बाद फिर माहौल सामान्य। सरकार की ओर से पूछा गया, आप लोगों की ओर से कोई विकल्प। फिर कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर, पीयूष गोयल सोमपाल (मंत्री समिति) के पिटारे से एक-एक कर कई कदम। तोमर ने कहा, सरकार ने कई कदम बढ़ा दिए, आप भी कुछ बढ़ाएं। सरकार की ओर से कहा गया, अब तो यहीं तय कर बता दें। बैठक के बाद अलग से किसान संगठनों ने वहीं बैठक की। कहा गया इन प्रस्तावों पर किसान संगठन आपस में अगले दिन मंत्रणा कर शुक्रवार को बता देंगे। अब सरकार और किसान संगठनों को भी लग रहा है कि यह सकारात्मक प्रस्ताव है। भाकियू डकौंदा के बूटा सिंह बुर्जगिल समेत कई नेता मानते हैं कि इसे हल की पहल मान सकते हैं। ऐसे में यदि सब कुछ सामान्य रहा तो 26 जनवरी को गणतंत्र का जश्न और बढ़ जाएगा। ट्रैक्टर रैली बैक गियर में होगी, किसान अपने-अपने घरों पर होंगे। अब इंतजार कीजिए, इस पल का।

गतिरोध दूर करने के लिए नया प्रस्ताव
  • कृषि कानूनों के अमल पर डेढ़ साल तक रोक का सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देगी सरकार
  • सुप्रीम कोर्ट से इतर किसान संगठनों के साथ सरकार और विशेषज्ञों की बनाई जाएगी नई कमेटी
  • यही कमेटी तीनों कृषि कानूनों और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर चर्चा करेगी
  • डेढ़ साल के बाद जरूरत पड़ी तो आगे भी रोक का भरोसा
  • कमेटी की बातचीत के आधार पर हर संशोधन-बदलाव की गुंजाइश को राजी
  • गुरुवार को सुबह पंजाब के किसान संगठनों और दोपहर संयुक्त किसान मोर्चा की चर्चा होगी
  • सहमति के आधार पर शुक्रवार को सरकार को 22 को अगली वार्ता में किसान संगठन देंगे जवाब
  • सब कुछ ठीक रहा तो किसान पंजाब समेत घरों में  26 जनवरी को जीत पर करेंगे ट्रैक्टर रैली
  • सकारात्मक उम्मीद में गुरुवार को ट्रैक्टर रैली को लेकर दिल्ली पुलिस से होने वाली बातचीत स्थगित 
  • सरकार ने एनआईए के नोटिस पर संयुक्त किसान मोर्चा से निर्दोषों के नाम मांगे, मामले वापस होंगे

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