आंदोलन को नई धार देने के लिए किसानों को पढ़ा रहे हैं धैर्य-अहिंसा का पाठ, कानूनों के विरोध की वजह भी बता रहे हैं नेता

सार

26 जनवरी की घटना के बाद से ही आम लोग और पुलिस लगातार किसान संगठनों के अनुशासन पर सवाल खड़े कर रहे हैं। बॉर्डर पर सुरक्षाकर्मियों के साथ हुई छोटी-मोटी घटनाओं के बाद से देशभर में ये संदेश भी जा रहा है कि किसान उग्र हो रहे हैं...

विज्ञापन
Harendra Chaudhary राहुल संपाल, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary
Updated Fri, 19 Feb 2021 04:00 PM IST
गाजीपुर बॉर्डर पर किसान
गाजीपुर बॉर्डर पर किसान - फोटो : अमर उजाला (फाइल)

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹299 Limited Period Offer. HURRY UP!

ख़बर सुनें

विस्तार

नए कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली की सीमाओं पर पिछले 80 दिनों से अधिक समय से किसान संगठनों का विरोध प्रदर्शन जारी है। बड़ी संख्या में फिर से किसान प्रदर्शन स्थलों पर जुटने लगे हैं। आंदोलन के कारण आम लोगों को कोई परेशान नहीं हो इसलिए अब संगठन किसानों को अनुशासन का पाठ पढ़ा रहे हैं। इसमें खासकर पुलिस और सुरक्षाकर्मियों से किसान कैसे कैसे पेश आएं ये बताया जा रहा है।
विज्ञापन


हरियाणा के किसान नेता रविंद्र राणा ने अमर उजाला से कहा कि 26 जनवरी की घटना के बाद से ही आम लोग और पुलिस लगातार किसान संगठनों के अनुशासन पर सवाल खड़े कर रहे हैं। बॉर्डर पर सुरक्षाकर्मियों के साथ हुई छोटी-मोटी घटनाओं के बाद से देशभर में ये संदेश भी जा रहा है कि किसान उग्र हो रहे हैं। इन्हीं वजहों को देखते हुए किसानों से अनुशासन में रहने की अपील की जा रही है ताकि आम लोगों के मन में किसानों के प्रति गलत धारणा नहीं बन सके।

मंच से अपील कर और बांट रहे हैं पर्चे

किसानों को अनुशासन सिखाने की जिम्मेदारी वरिष्ठ किसान नेताओं के साथ-साथ युवा किसानों ने भी अपने हाथों में ले रखी है। किसान संगठन ने सभी किसान नेताओं को निर्देश दिया है कि वे अपने भाषण को कृषि कानूनों तक ही सीमित नहीं रखें। भाषण में किसानों को ये भी जरूर बताएं कि कैसे अनुशासन में रहें और अनुशासन हमारे आंदोलन के लिए क्यों जरूरी है।

किसान संगठनों ने नेताओं से यह भी कहा है कि वे अपने भाषण में किसानों को ये भी विश्वास दिलाएं कि अनुशासन में रहकर ही इस लड़ाई को जीता जा सकता है। इसके अलावा हर नेता भाषण से पहले और भाषण के बाद किसानों से 'शांत रहेंगे तो जीतेंगे, हिंसक होंगे तो मोदी जीत जाएगा' जैसे नारे लगाने की भी अपील कर रहे हैं।

युवा किसान भी अपने तरीके से किसानों को अनुशासन सिखा रहे हैं। इसके लिए एक टीम तैयार की गई है जो किसानों को पुलिस और आम लोगों से बात कैसे करना है, ये सिखा रही है। पंजाब से आए युवा किसान तेजिंदर सिंह ने अमर उजाला से कहा, वॉलंटियर्स किसानों के बीच जाकर उन्हें पुलिस और आम लोगों के साथ कैसे बर्ताव करना है, ये बता रहे हैं। उन्हें ये भी बताया जा रहा है कि अगर पुलिस अच्छा बर्ताव न भी करे तो भी हमें उनके साथ सलीके से ही पेश आना है। किसी भी तरह का विवाद नहीं करना है। इसके अलावा हम लोगों ने कुछ पर्चे भी छपवाए हैं, जो किसानों को बांटे जा रहे हैं। इनमें कानून के विरोध की वजहों से संबंधित सारी जानकारी दी गई है।

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us

X

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00
X