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ईडी का खुलासा: मस्जिदों से जकात मिलने के दावे झूठे, जिन नमाजियों से दान मिलने का दावा पीएफआई ने किया वही मुकरे

एजेंसी, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Thu, 29 Sep 2022 05:30 AM IST
सार

छापों में केंद्रीय एजेंसियों ने पाया कि खाड़ी देशों में पीएफआई के हजारों सक्रिय कार्यकर्ता हैं। इन्हीं के जरिये पैसा जुटाया जाता है।

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI
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विस्तार

आतंकवाद के आरोप में प्रतिबंधित संगठन पीएफआई का दावा था कि उसके कार्यकर्ता रमजान महीने में मस्जिदों में जाकर नमाजियों से नकद जकात लेते थे। पीएफआई फंडिंग की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) में पाया, नमाजियों ने रमजान नहीं, बल्कि दूसरे महीनों में ज्यादा जकात दी। यह व्यावहारिक तौर पर संभव नहीं लगा।



ईडी अधिकारियों ने जकात देने वालों की सूची से कुछ लोगों के नाम छांटे और उनसे घर जाकर बात की। इन लोगों ने मस्जिद में बताई तारीख पर जकात देने से साफ इन्कार किया। कई ने तो कहा, उनकी जकात देने की हैसियत भी नहीं थी।


इस बोगस दान से पीएफआई के फंडिंग घपले की कई परतें खुलीं, आपराधिक साजिश सामने आए। ईडी को पीएफआई की दिल्ली यूनिट के कार्यालय सचिव और आरोपी अब्दुल मुतीक ने बताया, दान देने वाले नमाजियों को रसीद दी जाती है। रसीदों की जांच हुई, तो अधिकतर में अधूरी जानकारियां मिलीं। इससे दान देने वालों का पता नहीं चल सकता था। मुतीक ने कहा था, मस्जिद से मिले पैसे की रसीद  वहां के इमाम को दी जाती। 

कार्यकर्ताओं के बैंक खातों से गई अवैध रकम
पीएफआई के कार्यकर्ताओं के खातों में जो निश्चित राशि जमा करवाई जाती, वही पीएफआई के खातों में ट्रांसफर की जाती। ईडी ने पाया, खाताधारकों को इसकी भनक तक नहीं थी। अधिकतर तो इतना पैसा भेजने की हैसियत भी नहीं रखते थे। पीएफआई कार्यकर्ता इन खातों का इस्तेमाल विदेशी फंडिंग को वैध दिखाने में करते थे। इस रास्ते से पीएफआई ने अवैध व अज्ञात स्रोतों से अर्जित अघोषित और काले धन को कानूनी जामा पहनाया।

खाड़ी देशों में मौजूद हजारों कार्यकर्ताओं से आया पैसा
छापों में केंद्रीय एजेंसियों ने पाया कि खाड़ी देशों में पीएफआई के हजारों सक्रिय कार्यकर्ता हैं। इन्हीं के जरिये पैसा जुटाया जाता है। पीएफआई का दावा था कि वह विदेशों से दान नहीं लेती है। एफसीआरए में विदेशी दान के लिए पंजीकृत नहीं होने के बावजूद खाड़ी देशों से पैसा हासिल कर हवाला के जरिये भारत लाए।

सीधे पीएफआई के खातों में नहीं आता था पैसा  
पीएफआई के पदाधिकारी केए राउफ ने माना, पैसा सीधे पीएफआई या 8 सहयोगी संगठनों के खातों में नहीं जाता था। पैसा कार्यकर्ताओं, व कम पढ़े-लिखे मुस्लिमों के खातों में जाता। फिर वहां से पीएफआई तक पहुंचाया जाता।

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