विकास दुबे एनकाउंटर : कैदी को हथकड़ी लगाने या न लगाने पर बहस, क्या कहता है सुप्रीम कोर्ट

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 10 Jul 2020 07:45 PM IST
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विकास दुबे
विकास दुबे - फोटो : सोशल मीडिया

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सार

कुख्यात अपराधी विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद अपराधियों को हथकड़ी लगाने या न लगाने पर बहस छिड़ गई है। एक ओर यह सवाल है कि पुलिस ने दुबे को हथकड़ी क्यों नहीं लगाई थी तो दूसरी ओर सु्प्रीम कोर्ट के वो निर्देश हैं जिनमें उसने हथकड़ी लगाने को अमानवीय, गैरजरूरी और कठोर तरीका करार दिया है। वहीं, पुलिस अपराधियों को हथकड़ी लगाने के समर्थन में दलीलें देती आई है। 

विस्तार

इस संबंध में पुलिस का कहना है कि हथकड़ी लगाने से यह सुनिश्चित होता है कि अपराधी उनकी गिरफ्त से भाग न सके। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट समय-समय पर अपराधी या आरोपी व्यक्ति को हथकड़ी न लगाने जाने की प्रक्रिया को लेकर दिशानिर्देश जारी करती रही है। कोर्ट का कहना है कि यह सुनिश्चित करने के लिए कि व्यक्ति फरार न हो सके, हथकड़ी लगाया जाना अनिवार्य नहीं है। 

पुलिस का दावा, भागने की कोशिश में मारा गया दुबे

दुबे को मध्यप्रदेश के उज्जैन में गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में पुलिस ने बताया है कि उसे उज्जैन से कानपुर लाया जा रहा था। इसी दौरान कानपुर में भौती के पास पुलिस की गाड़ी पलट गई। जिसके बाद दुबे ने एक पुलिसकर्मी की पिस्तौल लेकर भागने की कोशिश की। उसे आत्मसमर्पण के लिए कहा गया लेकिन वह नहीं माना और आत्मरक्षा में की गई फायरिंग में वह घायल हो गया और अस्पताल में उसकी मौत हो गई।

आवाजाही की स्वतंत्रता नहीं रोक सकते : सुप्रीम कोर्ट

बता दें कि साल 1995 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हथकड़ी लगाकर या ऐसा कोई अन्य तरीका अपनाकर आवाजाही की स्वतंत्रता पर रोक नहीं लगाई जा सकती है। अदालत ने साफ तौर पर न्यायिक अनुमति के बिना हथकड़ी लगाने को अवैध बताया था। हालांकि, अदालत ने यह भी कहा था कि ऐसे मामलों में अगर पुलिस या जेल अधिकारियों को कैदी के भागने की पक्की आशंका हो तो उसे मजिस्ट्रेट के सामने पेश कर हथकड़ी लगाने की अनुमति ली जा सकती है।

 

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