कोरोना की दूसरी लहर: 15 महीने में सरकारों के आठ बड़े दावे, जमीन पर सब फेल

एजेंसी, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Thu, 06 May 2021 07:16 AM IST

सार

  • ऑक्सीजन, कोरोना की लहर और थर्मल स्कैनिंग तक पर किए थे बड़े-बड़े दावे, फिर भी फैलती गई महमारी
कोरोना मरीज(फाइल फोटो)
कोरोना मरीज(फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई
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विस्तार

बीते 15 महीने से देश कोरोना महामारी लड़ रहा है। इसे रोकने के लिए पहले दिन से लेकर अब तक सरकारों ने बड़े-बड़े दावे किए। सरकार ने अस्पतालों में बिस्तर की उपलब्धता, ऑक्सीजन, जांच विदेश से आने वालों की निगरानी को लेकर कई दावे किए। 
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हाल ही में अधिकारियों ने कहा, देश के कुछ हिस्सों में महामारी की दूसरी लहर कम होने के संकेत मिले हैं। कहा गया कि 30 अप्रैल को सबसे ज्यादा मरीज मिले, लेकिन उसके बाद कमी देखने को मिर रही है। जबकि, हकीकत यह थी जांच में ही तीन चार लाख की कमी कर दी गई। सरकार के ऐसे ही दावों और हकीकत पर पेश है परीक्षित निर्भय की रिपोर्ट...


1- एक भी मामला नहीं 

 हकीकत - मार्च में लॉकडाउन 

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ . हर्षवर्धन ने 21 पहली प्रेस कान्फ्रेंस में कहा कि देश में अभी कोरोना वायरस का कोई मामला सामने नहीं आया है , लेकिन एहतियात के तौर पर राज्यों को स्वास्थ्य संसाधनों की तैयारी करने के निर्देश दिए हैं । 17 से 28 जनवरी 2020 तक मंत्रालय की प्रेस विज्ञप्तियों में यही दावा बार - बार किया गया , लेकिन मार्च के पहले हफ्ते में एक ही दिन में जब 500 मामले मिले तो लॉकडाउन करना पड़ा , ताकि इलाज के लिए संसाधन तैयार किए जा सकें।


2- विदेश से आने वालों की स्क्रीनिंग

हकीकत - पैरासिटामॉल खा पहुंचे घर
2 फरवरी 2020 तक देश में कोरोना के तीन मामले सामने आ चुके थे । इस दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ . हर्षवर्धन ने कहा कि विदेशों से आने वाले यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग की जा रही है । किसी भी प्रकार के लक्षण मिलने पर उन्हें तत्काल आइसोलेट किया जा रहा है । हमारा पूरा प्रयास है कि इस बीमारी को भारत में अंदर आने से रोका जाए । स्वास्थ्य मंत्री के इस दावे का असर कुछ दिन दिखाई दिया , लेकिन फरवरी के ही दूसरे सप्ताह में पता चला कि लोग पैरासिटामॉल का सेवन करके थर्मल स्क्रीनिंग से बचकर निकलने लगे । स्वदेश पहुंचे लोग अपने शहर और कस्बों तक भी पहुंच गए।

3- मई तक घटेगा पहला पीक

हकीकत - सितंबर तक खिंचा

नीति आयोग के सदस्य डॉ . वीके पॉल ने  दावा किया कि कोरोना का पहला पीक 16 मई से नीचे शुरू हो जाएगा। बाद में उन्होंने अपने दावे पर सफाई भी दी जब मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ा लेकिन हकीकत में पहला पीक 16 और 17 सितंबर को दर्ज किया गया।

4-  ऑक्सीजन किल्लत नहीं 

हकीकत- चौतरफ हाहाकार
अमर उजाला ने  सबसे पहले बताया था कि ऑक्सीजन का संकट हो सकता है इस पर संज्ञान लेते हुए स्वास्थ्य  मंत्रालय ने ग्रीन कॉरिडोर इत्यादि के आदेश तो दिए लेकिन दावा किया कि देश में ऑक्सीजन की कमी नहीं है। आज स्थिति सबके सामने है। शीर्षकोर्ट तक इस पर संज्ञान ले चुकी है।

5- फरवरी में कम होंगे मामले

हकीकत- सक्रिय केस में वृद्धि
केंद्र की ही विशेषज्ञों ने मिलकर दावा किया था कि फरवरी 2021 तक देश में सक्रिय मामले 20 हजार से भी कम हो जाएंगे। लेकिन वास्तव में ऐसा हुआ नहीं। हालांकि, इसी सुपर मॉडल में यह भी कहा कि देश की 70 फीसदी से अधिक आबादी संक्रमण के खतरे में भी है।

6- सामुदायिक प्रसार नहीं 

हकीकत- पूरा देश चपेट में
करीब आठ महीने से सरकारें कोरोना वायरस का देश में सामुदायिक प्रसार होने से इंकार कर रही हैं। अभी दूसरी लहर में कोई भी अधिकारी इस विषय पर बात नहीं कर रहा है। लेकिन मंत्रालय के ही आंकड़े बता रहे है कि देश में 28 राज्य और आठ केंद्रशासित संघ में सक्रिय मरीज हैं।

7- देश में पर्याप्त बेड

हकीकत- इलाज नहीं
मार्च में मंत्री समूह के बैठक हुई। इस बैठक में दावा किया गया कि देश में पर्याप्त बिस्तर हैं और इलाज में कोई समस्या नहीं है। लेकिन अप्रैल से देश के ज्यादातर राज्यों में बिस्तरों का संकट शुरू हो गया। लोगों की मौते इलाज समय पर न मिलने की वजह से सबसे ज्यादा हो रही है।

8- कम हो रहे मामले 

हकीकत- जांच हुई कम

स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने हाल ही में दावा किया कि दिल्ली, महाराष्ट्र सहित कुछ राज्यों में नए मामले कम हो रहे हैं। दूसरी ओर कोरोना की कम होती जांच पर उन्होंने कुछ नहीं कहा। 

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