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दुनिया के 42 देशों ने किया 60 भगोड़ों का प्रत्यर्पण, ब्रिटेन ने अब तक एक भी नहीं सौंपा

अनिल पाण्डेय, नई दिल्ली Updated Wed, 17 Jul 2019 06:12 AM IST
इनके प्रत्यर्पण का है इंतजार
इनके प्रत्यर्पण का है इंतजार - फोटो : रोहित झा
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खास बातें

  • यूएई से हुए सबसे ज्यादा प्रत्यर्पण
  • ब्रिटेन के पास 131 आरोपियों की सूची
  • हाथ लगने वालों में हत्या के आरोपी ज्यादा 
  • हत्या के आरोपी 14 साल में हुए प्रत्यर्पित। 
  • 10 आरोपी आतंक फैलाने व बम धमाकों के हैं
भगोड़ों के प्रत्यर्पण का मुद्दा पिछले काफी समय से चर्चा में रहा है। इसके कड़े नियम अपराधियों को कानून के कटघरे में खड़ा करने में बाधा पैदा करते हैं। कोई आरोपी एक देश में अपराध को अंजाम देकर दूसरे देश जा पहुंचता है और उसे वापस लाकर सजा देना बेहद मुश्किल हो जाता है। खासतौर पर भारत जैसा देश इसे खासा भुगत रहा है। विजय माल्या, मेहुल चोकसी, नीरव मोदी, ललित मोदी और जाकिर नाइक जैसे कई आरोपी कमजोर प्रत्यर्पण कानून की आड़ में अब तक बचे हुए हैं। 

माल्या-चोकसी-जाकिर का मामला

ब्रिटेन की कोर्ट ने विजय माल्या को भारत प्रत्यर्पण किए जाने के खिलाफ अपील करने की इजाजत दे दी है। वहीं एंटीगुआ में मेहुल चोकसी की नागरिकता खत्म करने की बात कही जा रही है, लेकिन प्रत्यर्पण पर भी बातचीत जारी है। मलेशिया सरकार ने भी भारत को आश्वस्त किया है कि जाकिर नाइक के प्रत्यर्पण पर विचार हो रहा है।
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बॉम्बे उच्च न्यायालय ने भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या की याचिका को खारिज कर दिया था। उसने अपील की थी कि सरकारी एजेंसियों को उसके या संपत्तियों के खिलाफ कार्रवाई से तब तक रोका जाए जब तक कि भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने के मामले में उच्च न्यायालय का फैसला आए। ब्रिटेन की स्थानीय कोर्ट ने माल्या को इस बात की इजाजत दी थी कि वह भारत को प्रत्यर्पण किए जाने के खिलाफ अपील कर सकता है।

वहीं जांच एजेंसियों ने सरकार के सामने ललित मोदी के भी प्रत्यर्पण की मांग रखी है। इसी तरह पंजाब नेशनल बैंक से करीब 14 हजार करोड़ रुपए की धोखाधड़ी करने वाले हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी के मामले में भी एंटीगुआ सरकार ने नागरिकता को खारिज करने का फैसला किया है। इसके बाद भगोड़े हीरा कारोबारी को भारत लाने की कार्रवाई में तेजी आ गई है और उसे जल्द ही भारत में लाया जाएगा।

इस बीच मलेशिया सरकार ने भारत को सूचित किया है कि अपील पर विचार किया जा रहा है। हालांकि अब तक सरकार के प्रयासों पर प्रत्यर्पण का इतिहास भारी नजर आ रहा है। भारत की जिन 42 देशों के साथ ऐसी संधि है, वहां से पिछले 14 साल में सिर्फ 60 ही आरोपी हमारी जांच एजेंसियों को सौंपे गए हैं। इतना ही नहीं ब्रिटेन ने तो 1993 में करार के बाद से अब तक कोई हाई-प्रोफाइल आरोपी भारत को नहीं सौंपा।

संसद में बिल पास

आर्थिक अपराध को अंजाम देने के बाद देश छोड़कर भागने वाले अपराधियों को रोकने के लिए संसद ने पिछले साल एक बिल पास किया था। तत्कालीन रेलमंत्री (वित्त मंत्रालय के प्रभार के साथ) रहे रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था कि हमारी सरकार विश्व के सारे देशों के साथ प्रत्यर्पण संधि को लेकर सहयोग की ओर अग्रसर है।

उन्होंने कहा था कि इस तरह के मामलों को रोकने के लिए हमारी 48 देशों के साथ पहले से ही प्रत्यर्पण संधि है लेकिन दुनिया के अन्य देशों के साथ ही इस प्रकार की संधि करने के लिए सरकार अग्रसर है। पीयूष गोयल ने कहा था कि केंद्र सरकार इस प्रयास में लगी हुई है कि जो आर्थिक अपराधी देश छोड़कर विदेश में है उसका किसी प्रकार जल्द प्रत्यर्पण किया जा सके।
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ये देश के बड़े भगोड़े

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