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Coronavirus: कोरोना से मौतों की संख्या सात गुना ज्यादा होने का दावा सरकार ने नकारा, गिनाए ये कारण

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दीप्ति मिश्रा Updated Sun, 13 Jun 2021 08:48 AM IST

सार

एक खबर में दावा किया गया था कि देश में कोरोना से मरने वालों की संख्या आधिकारिक आंकड़ों से पांच से सात गुना तक अधिक है। वहीं  भारत सरकार ने इन खबरों का खंडन किया है। सरकार ने कहा कि यह आकलन महामारी विज्ञान संबंधी सुबूतों के बिना महज कयासों पर आधारित है।
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कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर)
कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

देश में कोरोना महामारी की दूसरी लहर का प्रकोप जारी है। अब तक कोरोना वायरस ने करोड़ों लोगों को अपना शिकार बनाया है और लाखों लोगों की जिंदगियां लील ली हैं। इस बीच, एक खबर में दावा किया गया था कि देश में कोरोना से मरने वालों की संख्या आधिकारिक आंकड़ों से पांच से सात गुना तक अधिक है। वहीं  भारत सरकार ने इन खबरों का खंडन किया है। सरकार ने कहा कि यह आकलन महामारी विज्ञान संबंधी सुबूतों के बिना महज कयासों पर आधारित है।
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बयान जारी कर बिना नाम लिए खबर प्रकाशित करने के लिए प्रकाशक की निंदा की, जिसमें दावा किया गया है कि 'भारत में कोविड-19 से होने वाली मौतें आधिकारिक आंकड़ों से पांच से सात गुना अधिक हैं।'


मंत्रालय ने दि इकोनॉमिस्ट की खबर को कयास लगाने वाला और बिना किसी आधार वाला एवं भ्रामक करार दिया है। बयान में कहा गया कि यह अनुचित विश्लेषण महामारी विज्ञान के सबूतों के बिना केवल आंकड़ों के आकलन पर आधारित है। पत्रिका में जिस अध्ययन का इस्तेमाल मौतों का अनुमान लगाने के लिए किया गया है, वह किसी भी देश या क्षेत्र के मृत्युदर का पता लगाने के लिए वैध तरीका नहीं है।

इसके साथ ही मंत्रालय ने कई कारण गिनाए जिनकी वजह से जिस अध्ययन का इस्तेमाल प्रकाशक द्वारा किया गया उस पर विश्वास नहीं किया जा सकता है। मंत्रालय ने कहा कि वैज्ञानिक डाटाबेस जैसे पबमेड, रिसर्च गेट आदि में इंटरनेट पर इस अनुसंधान पत्र की तलाश की गई, लेकिन यह नहीं मिला। अध्ययन करने के तरीके की जानकारी भी पत्रिका ने उपलब्ध नहीं कराई। बयान में कहा गया, एक और सबूत दिया गया कि यह अध्ययन तेलंगाना में बीमा दावों के आधार पर किया गया, लेकिन एक बार फिर समीक्षा किया गया वैज्ञानिक आंकड़ा ऐसे अध्ययन को लेकर नहीं है।

चुनाव विश्लेषण करने वाले समूहों के आंकड़े दिए
सरकार के बयान के मुताबिक, लेख में चुनाव विश्लेषण करने वाले समूहों 'प्राशनम' और 'सी वोटर' द्वारा किए गए दो अन्य अध्ययनों को हवाला दिया गया है। ये दोनों समूह चुनाव नतीजों का पूर्वानुमान और विश्लेषण के लिए जाने जाते हैं। वे कभी भी जन स्वास्थ्य अनुसंधान से जुड़े नहीं हैं। यहां तक कि उनके अपने चुनाव विश्लेषण के क्षेत्र में नतीजों का पूर्वानुमान लगाने के लिए जिस पद्धति का इस्तेमाल होता है, वे कई बार गलत साबित होते हैं।'
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पत्रिका ने भी अनुमान को अस्पष्ट बताया है

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