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कोरोना की दूसरी लहर में चीन का खेल: दवाओं के कच्चे माल को रोका, एंटीबायोटिक की हो सकती है किल्लत

Rahul Sampal राहुल संपाल
Updated Thu, 06 May 2021 09:36 PM IST

सार

चीन से आपूर्ति नहीं मिलने और दवाओं के कच्चे माल के बढ़ते दामों को देखते हुए कई मैन्यूफैक्चर एसोसिएशन ने सरकार के सामने अपनी परेशानी रखी है। एसोसिएशन ने सरकार से कहा है, कोरोना काल में सामान्य सी एंटीबायोटिक दवाईयों की ब्रिकी भी तीन से चार गुना बढ़ गई है। चीन से कच्चा माल नहीं आ रहा है। देश में भी कच्चे माल के दाम लगातार बढ़ रहे है। अगर कंपनियों को समय से दवाओं का कच्चा माल नहीं मिलता है तो वे दवाईयां उपलब्ध नहीं करवा पाएंगी। जिससे दवाईयों की किल्लत होना स्वाभाविक है। 
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सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पिक्साबे

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विस्तार

कोरोना वायरस की दूसरी लहर में देशभर में ऑक्सीजन के साथ ही जीवन रक्षक दवाइयों की भी कमी देखने को मिल रही है। कोरोना के मरीजों के इलाज में अक्सर प्रयोग होने वाली कई दवाओं की सामग्री इन दिनों महंगी हो गई है। प्रमुख दवा सामग्री की कीमतों में 25 से 280 फीसदी की वृद्धि देखने को मिल रही है। दामों में बढ़ोतरी की वजह बाजार में अचानक से दवाओं की बढ़ती मांग और चीन से होने वाली धीमी आपूर्ति बताई जा रही है। हालांकि, खुदरा स्तर पर इसकी कोई कमी की आशंका नहीं है, क्योंकि बड़ी कंपनियां कुछ महीने की इन्वेंट्री रखकर चलती हैं।
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फार्मा उद्योग से जुड़े दीपांकर अग्रवाल ने अमर उजाला को बताया कि इन दिनों पैरासिटामॉल, एजिथ्रोमाइसिन, डॉक्सीसाइक्लीन, आइवरमेक्टिन की दवा सामग्री की कीमतें बढ़ गई हैं। ये एंटीबायोटिक, एनाल्जेसिक दवाएं हैं जिनका इस्तेमाल कोविड-19 के इलाज में आजकल हो रहा है। आमतौर पर बुखार और सिरदर्द में ली जाने वाली पैरासिटामॉल की दवा सामग्री दिसंबर 2020 के 450-480 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 580-750 रुपये प्रति किलोग्राम तक हो गई है। इसमें करीब 60 फीसदी की तेजी हुई है। वहीं कोविड मरीज और उनके परिजन जिस आइवरमेक्टिन दवा का उपयोग करते हैं, इसकी कीमतों में भी करीब 180 फीसदी की बढ़त देखी जा रही है। ये 18 हजार रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 52 हजार रुपए प्रति किलोग्राम हो गई है।  


अग्रवाल ने आगे कहा कि पहले आसानी से कस्टम से माल एक से दो दिन में क्लियर हो जाता था। लेकिन कोविड के चलते माल को क्लियर होने में करीब पांच से छह दिन लग रहे हैं। अगर चीन से समय से कच्चा माल नहीं आता है तो बाजार में 15 से 20 मई के बाद दवाइयों की किल्लत बढ़ जाएगी। इससे कई महत्वपूर्ण दवाइयां लोगों को मिलने में दिक्कत हो सकती है।  

इंडियन ड्रग मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमर उजाला से कहा कि करीब 10 दिन पहले चीन की सरकारी विमानन कंपनी सिचुआन एयरलाइंस ने भारत में 15 दिनों के लिए माल ढुलाई सेवाओं को निलंबित करने का फैसला लिया था। लेकिन हमें उम्मीद है दो से चार दिनों में सबकुछ ठीक हो जाएगा। इसके अलावा लॉजिस्टिक्स से जुड़ी भी कुछ दिक्कतें हैं। थोड़ी बहुत आपूर्ति तो आ रही है लेकिन इसकी रफ्तार बेहद धीमी है। अगर ये स्थिति नहीं सुधरती है तो फिर दवाओं की सप्लाई में परेशानी आ सकती है। हालांकि समुद्री मार्ग से सप्ताह भर के अंदर बड़ी खेप भारत पहुंचने की उम्मीद है।

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