13 राज्यों के 46 जिलों में कोरोना के सक्रिय मामले राष्ट्रीय दर की तुलना में लगभग दोगुना

न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Tanuja Yadav Updated Fri, 12 Jun 2020 08:24 AM IST

सार

  • देश में कोरोना के सक्रिय मामलों से ठीक होने वाले मरीजों की दर ज्यादा
  • 13 राज्यों में 46 जिलों में कोरोना के सक्रिय मामले सबसे ज्यादा
  • इन जिलों में सक्रिय मामलों की दर राष्ट्रीय दर 5.7 फीसदी की तुलना में 10 फीसदी
13 राज्यों के 46 जिले कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित
13 राज्यों के 46 जिले कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित - फोटो : पीटीआई
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विस्तार

कोरोना वायरस की देश में दस्तक होने के बाद से अब कोरोना संक्रमित मामलों में ठीक होने वाले मरीजों की दर सक्रिय मामलों से ज्यादा है। लेकिन केंद्र सरकार कुछ इलाकों को लेकर काफी चिंतित है। देश में 46 जिले ऐसे हैं जहां कोविड-19 के टेस्ट पर सक्रिय मामलों की दर 10 फीसदी है जो राष्ट्रीय दर 5.70 फीसदी से काफी ज्यादा है।

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कैबिनेट सचिव राजीव गौबा की बैठक में इन जिलों की पहचान की गई। गौबा ने बैठक में लॉकडाउन में छूट देने के बाद से लेकर नौ जून तक कोरोना मामलों की स्थिति कितनी बदली, इस पर एक विस्तृत रिपोर्ट दी। गौबा ने बताया कि कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य महाराष्ट्र है और महाराष्ट्र के 12 जिले- मुंबई, पुणे, ठाणे, पालघर, औरंगाबाद, रायगढ़, सोलापुर, नासिक, अकोला, ओसमानबाद, गोंडिया और जालगांव है।




दिल्ली में 11 में से नौ जिले बुरी तरह प्रभावित हैं। इनमें उत्तर-पश्चिमी दिल्ली, केंद्रीय, दक्षिण-पू्र्वीय दिल्ली, पश्चिमी दिल्ली, उत्तरी दिल्ली, शाहदरा, दक्षिण पश्चिमी दिल्ली और उत्तर-पूर्व दिल्ली शामिल हैं। तेलंगाना में चार जिले हैदराबाद, मेडचल मल्काजगिरी, रंगारेड्डी और सूर्यापेट सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।

इसी तरह तमिलनाडु में चेन्नई, चेंगलपट्टू. थीरूवल्लर, अरियालुर में कोरोना के संक्रमित मामले सबसे ज्यादा हैं। बिहार में खगड़िया, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर, मध्यप्रदेश में खरगोन, बुरहानपुर, नीमच. उत्तर प्रदेश में चित्रकूट और फिरोजाबाद, असम में होजाई और दीमा हस्सो, गुजरात में अहमदाबाद और बड़ोदरा, त्रिपुरा में सेपाहिजला, उत्तराखंड में टिहरी, पश्चिम बंगाल में हावड़ा और राजस्थान में पाली सबसे ज्यादा प्रभावित जिले हैं।


झारखंड और बिहार में कोरोना संदिग्ध की जांच करने और उसे क्वारंटीन में भेजने पर 14 दिन का समय लग रहा है। झारखंड के स्वास्थ्य सचिव नितिन कुलकर्णी ने बताया कि ये देरी इसलिए हो रही है क्योंकि स्वाब के जरिए टेस्ट करने में अचानक बढ़ोतरी हो गई है।

कैबिनेट सचिव ने बताया कि कोरोना के दोगुनी दर 14,1 दिनों से बढ़कर 16.9 हो गई है लेकिन राष्ट्रीय मृत्युदर तीन फीसदी ही है। कैबिनेट सचिव ने बताया कि नए जिलों में कोरोना के मामले उतने तेजी से नहीं बढ़ रहे हैं और वहां स्थिति नियंत्रण में है। उन्होंने बताया कि कुछ जिले ऐसे भी हैं जहां कोविड-19 के मामलों में गिरावट आई है, जिसका मतलब यह है कि इन जिलों में लॉकडाउन का फायदा मिला है।

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