जिनके कारण देश को रिकॉर्ड समय में मिले कोरोना वैक्सीन, मिलिए उन शख्सियतों से

Dev Kashyap एजेंसी, पुणे/ हैदराबाद Published by: देव कश्यप
Updated Sun, 17 Jan 2021 05:52 AM IST

सार

  • भारत बायोटेक- किसान के बेटे ने 12 करोड़ में शुरू की कंपनी। 
  • खेती करना चाहते थे लेकिन आज बना रहे हैं वैक्सीन।
  • 1966 में पुणे में स्थापित हुई सीरम इंस्टीट्यूट।
  •  1500 करोड़ टीके का उत्पादन हर साल, 1964 में डब्ल्यूएचओ ने भी लाइसेंस दिया।
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Founders of Bharat Biotech Suchitra & Krishna Ella
Founders of Bharat Biotech Suchitra & Krishna Ella - फोटो : Twitter

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विस्तार

हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक के प्रबंध निदेशक कृष्णा एला (51) किसान परिवार से हैं। मूल रूप से तमिलनाडु के थिरूथानी गांव के हैं। कृषि की पढ़ाई करने के बाद आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए बेयर कैमिकल्स एंड फार्मास्यूटिकल्स कंपनी के कृषि विभाग में काम करना शुरू किया। इसी बीच इन्हें स्कॉलरशिप मिली। मॉलिक्यूलर बायोलॉजी में अमेरिका के हवाई विश्वविद्यालय से मास्टर्स की डिग्री ली। इसके बाद यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉनसिन-मेडिसिन से पीएचडी करने के बाद 1995 में भारत लौटे। 
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1996 में शुरू की कंपनी 
मां के कहने पर पत्नी सुचित्रा के साथ भारत लौटे कृष्णा ने 12.5 करोड़ की लागत से हैदराबाद में 1996 में भारत बायोटेक की स्थापना की। तीन साल के भीतर इनकी कंपनी ने हेपेटाइटिस-बी का टीका तैयार किया जिसको तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने वर्ष 1996 में लॉन्च किया। 


देश को हेपेटाइटिस-बी टीकाकरण अभियान के लिए दस रुपये प्रति डोज के हिसाब से टीका मुहैया कराया। उस समय अंतर्राष्ट्रीय बाजार में हेपेटाइटिस-बी के टीके की एक डोज 1400 रुपये की थी।  

दुनिया के 150 देशों को यूनिसेफ और गावी के तहत विभिन्न टीकों की 300 करोड़ डोज मुहैया करा रहे हैं। इनकी कंपनी के पास कुल 160 पेटेंट हैं और कंपनी के पास स्वयं के 16 तरह के टीके हैं।
 
बढ़ते कदम...
1996 में भारत बायोटेक की स्थापना।
1999 में हेपेटाइटिस-बी का टीका लॉन्च।
2002 में गेट्स फाउंडेशन की ओर से मदद।
2006- रेबीज का टीका लॉन्च किया।
2010- स्वाइनफ्लू का टीका लेकर आए।
2013- टायफॉयड का टीका पेश किया।
2014- जेई का स्वदेशी टीका देश को मिला।
2015- मेड इन इंडिया अभियान के तहत सबसे पहले रोटावायरस वैक्सीन तैयार की।
2020- कोरोना के टीके पर अध्ययन, 2021 में मिली मंजूरी
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सीरम का ध्येय: सब स्वस्थ रहें, इसलिए सस्ता टीका, पर गुणवत्ता से समझौता नहीं

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