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कोरोना : तो एक बार फिर बदलेगा वैक्सीन देने का समय, समिति कर रही विचार

आशीष तिवारी, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Sun, 13 Jun 2021 04:49 PM IST

सार

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक कोविड के टीके कोविशील्ड के इंटरवल को एक बार फिर से रिव्यू किया जा रहा है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

कोविड की वैक्सीन लगवाने के समय (टाइमिंग) को बदलने के लिए एक बार फिर से टीके के अंतराल (इंटरवल) की समीक्षा (रिव्यू) की जाने लगी है। इसके लिए कोरोना के टीके पर नजर रखने वाली समिति (कमेटी) ने शुरुआत कर दी है। बीते कुछ समय में कोविशील्ड के लंबे अंतराल को लेकर तमाम तरह के सवाल उठ रहे हैं।
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक कोविड के टीके कोविशील्ड के इंटरवल को एक बार फिर से रिव्यू किया जा रहा है। अभी इस टीके के इंटरवल का टाइम 3 से 4 महीने का कर दिया गया है। जब से इस टीके के इंटरवल की समयावधि बढ़ाई गई है तब से ना सिर्फ देश बल्कि पूरी दुनिया में तमाम तरह के शोध और इंटरवल की लंबी टाइमिंग को लेकर सवाल उठ रहे हैं। 


देश में टीके की व्यवस्था को देखने वाली कमेटी के एक वैज्ञानिक ने बताया देश के अलग-अलग राज्यों में वैक्सीन की टाइमिंग को लेकर शोध शुरू किया जा चुका है। वो कहते हैं कि आने वाले कुछ दिनों में परिणाम आ जाएंगे। उसके बाद एक बार फिर तय किया जाएगा कि कुछ फेरबदल किया जाए या नहीं। इस शोध से जुड़े टीम के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने बताया कि जरूरत पड़ी तो टाइमिंग को कम किया जा सकता है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक ब्रिटेन में फाइजर के टीके का इंटरवल 3 महीने का है। ऐसे ही दक्षिणी अमेरिका के कुछ मुल्कों में कई टीकों का इंटरवल 3 से 4 महीने का है। टीकों पर रिसर्च करने वाले वैज्ञानिकों का कहना है कि हर देश में अपने-अपने हिसाब से और वैज्ञानिक शोध के मुताबिक ही टीके का इंटरवल तय किया जाता है। ऐसे में अपने देश में जो कोविशिल्ड का टीका लगाया जा रहा है उसकी टाइमिंग आज के मुताबिक बिल्कुल सही है। 

देश में टीके के इंटरवल की टाइमिंग को लेकर दुनिया के बहुत सारे वैज्ञानिकों ने सवाल उठाए। अमेरिका के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक का कहना है कि अगर टीके के इंटरवल की टाइमिंग ज्यादा हो जाएगी तो यह खतरनाक है। उनका तर्क है कि वायरस बहुत जल्दी स्वरूप बदल रहा है ऐसे में बेहतर है टीके की दूसरी डोज जल्द और समय पर लग जाए। 

हालांकि इसको लेकर अपने देश में वैज्ञानिकों में कई मत हैं। इन वैज्ञानिकों का कहना है कई देश ऐसे हैं जो भारत में लगाई जाने वाली कोविशील्ड जिसको दुनिया के अलग-अलग देशों में एस्ट्रेजनेका के नाम से जाना जाता है, उसका इस्तेमाल तक नहीं किया जा रहा है। ऐसे देश बिना शोध किए ही टीके के अंतराल को लेकर टिप्पणी कर रहे हैं।    

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