लोकप्रिय और ट्रेंडिंग टॉपिक्स

विज्ञापन
Hindi News ›   India News ›   Colonel Ashutosh Sharma bravery and his tenacity to join Indian Army

सेना में जाने की कैसी जिद थी कर्नल आशुतोष की...दोस्त ने सुनाए कुछ पुराने किस्से

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Fri, 08 May 2020 09:58 PM IST
शहीद कर्नल आशुतोष
शहीद कर्नल आशुतोष

जम्मू कश्मीर में शहीद हुए कर्नल आशुतोष शर्मा की शहादत पर आज पूरा देश गर्व कर रहा है। शहादत के बाद अब उनसे जुड़े कई किस्से सामने आ रहे हैं। अमर उजाला डॉट कॉम ने कर्नल आशुतोष के करीबी दोस्त राहुल शर्मा से बात की और जानने की कोशिश की कि वह किस तरह की शख्सियत थे। सेना के प्रति उनका क्या जज्बा था। 



देश सेवा की उनमें कैसी जिद थी, इस सवाल पर राहुल शर्मा ने कहा- कर्नल आशुतोष जिस तरह की शख्सियत थे वैसा आयाम कम ही लोगों में देखने को मिलता था। जब हम स्कूल जाते थे तब भी उन्हें लगता था कि उन्हें देश सेवा करनी है। सेना में भर्ती होने के लिए वह फॉर्म भरते थे, उनके प्रेरणा स्रोत पिताजी थे जो हमेशा कहते थे कि लगे रहो। उनमें एक जिद थी कि मुझे सेना में ही जाना है।   


उन्हें दो बार सेना मेडल से सम्मानित किया गया था। मैंने अपने जीवन में उनसे बहादुर व्यक्ति नहीं देखा। ऐसा कहते हैं कि कश्मीर में उन्हें टाइगर के नाम से जाना जाता था। छोटी से छोटी बातों को भी वह ध्यान से सुनते थे। बहुआयामी योजना लेकर चलते थे इसलिए उनके अंदर का डर खत्म हो गया था। किसी भी टास्क को पूरा जरूर करते थे। इसलिए उनके सीनियर उनसे बहुत खुश थे।

कर्नल आशुतोष ने जवानों को ही अपना परिवार मान लिया था, इस सवाल पर राहुल शर्मा ने कहा- वह पूरी बटालियन के लिए पितातुल्य थे। 1500 जवानों का बटालियन वह संभालते थे। एक सैनिक का लक्ष्य यही होता है कि देश सबसे पहले। उन्होंने देश सेवा के लिए ही सेना को चुना था। सेना में अफसरों की पत्नियों का भी बहुत बड़ा योगदान होता है। जब हमारे शेर युद्धभूमि में जाते हैं और दुश्मनों पर टूट पड़ते हैं तो हमारी शेरनियां अपने-अपने घरों में परिवारों की रक्षा करती हैं। ये शेर तभी बनते हैं जब शेरनियां अपने घरों में बाकी काम पूरे करती हैं। 

12 बार चयन न होने पर भी हिम्मत नहीं हारी और 13वीं बार सफल हुए, इस सवाल पर राहुल शर्मा ने कहा- उनकी सोच इतनी मजबूत थी कि मैं हारूंगा नहीं। आशुतोष को लगता था कि मैं सेना के लिए ही बना हूं, लेकिन अभी स्वीकार नहीं किया जा रहा हूं। उन्होंने बार बार कोशिश की। 13वीं बार जब आखिरी कोशिश की तो बहुत नर्वस थे। वो सेना की हरी वर्दी पहनने के लिए ही बने थे और जिस तरह से वह आगे बढ़े पूरे देश ने देखा है। 

उनसे कई बार पूछा जाता था कि 12 बार चयनित नहीं हुए तो वह एक ही जवाब देते थे कि मैं पूरी कोशिश कर रहा हूं लेकिन तकनीकी सवालों में थोड़े बहुत अंतर से रह गया हूं। ये सही भी था और वह 13 प्रयास में सफल भी रहे। उन्हें हमेशा लगता था कि अगर मैं ये नहीं कर पाया तो क्या कर पाऊंगा। ये मेरा आखिरी मौका है, नहीं कर पाया तो क्या करूंगा।
विज्ञापन

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

एप में पढ़ें
जानिए अपना दैनिक राशिफल बेहतर अनुभव के साथ सिर्फ अमर उजाला एप पर
अभी नहीं

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00