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दावा : 1965 की जंग के बाद शुरू हुआ पूर्वी पाकिस्तान अलग करने का विचार, वाइस एडमिरल चावला ने कही यह बात

पीटीआईए बंगलूरू Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Sat, 23 Oct 2021 11:09 PM IST
सार

उप नौसेना प्रमुख चावला ने 1971 की जंग के 50 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में यह बात कही। 
 

वाइस एडमिरल अनिल कुमार चावला
वाइस एडमिरल अनिल कुमार चावला - फोटो : ANI
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विस्तार

वाइस एडमिरल अनिल कुमार चावला ने दावा किया है कि 1965 के भारत-पाक युद्ध के बाद ही पूर्वी पाकिस्तान को अलग करने की सोच शुरू हो गई थी। इसका उद्देश्य भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में उग्रवाद को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई की मदद रोकना था। 1971 के भारत-पाक युद्ध के बाद पूर्वी पाकिस्तान अलग हुआ और बांग्लादेश का गठन हुआ। 



दक्षिणी नौसेना कमान के कमांडिंग-इन-चीफ फ्लैग आफिसर चावला शनिवार को बंगलूरू के येलहंका एयरबेस पर वायु सेना के सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। यह कार्यक्रम 1971 के युद्ध में भारत की जीत के 50 साल पूरे होने के मौके पर रखा गया था। वायु सेना इसे  'स्वर्णिम विजय वर्ष' के रूप में मना रही है। दरअसल 1971 में  पूर्वी पाकिस्तान को आजाद कराने के लिए बांग्लादेश मुक्ति वाहिनी ने पाकिस्तानी सेना के खिलाफ युद्ध छेड़ा था। भारतीय वायु सेना ने बांग्लादेश मुक्ति वाहिनी का समर्थन किया था। इस युद्ध में पाकिस्तान की करारी हार हुई थी और बांग्लादेश का गठन हुआ था।


भारत के लिए कठिन घड़ी थी वह
वाइस एडमिरल चावला ने कहा कि पूर्वोत्तर में आईएसआई का उग्रवाद को सहयोग पहुंचाना वाकई चटगांव की पहाड़ियों से हो रहा था और वहीं से हमने जैसे को तैसा जवाब देने का काम शुरू किया। हमने मुक्त वाहिनी को प्रशिक्षित किया। तब भारत बहुत कमजोर था। यदि आप चीजें याद करें तो पाएंगे कि कांग्रेस बंट चुकी थी और इंदिरा गांधी मुश्किल से प्रधानमंत्री बन पाई थीं और उस सरकार के लंबे समय तक चलने की उम्मीद नहीं थी। 

30 जनवरी 1971 को किया गया भारतीय विमान का अपहरण
दस्तावेज स्पष्ट रूप से बताते हैं कि कुछ कश्मीरी अलगाववादियों ने 30 जनवरी,1971 को इंडियन एयरलाइंस के विमान का अपहरण करके लाहौर ले जाने की घोषणा की। इसके बाद भारत सरकार ने उड़ान सुविधाएं बंद कर दीं और इससे पाकिस्तान पर पूर्वी पाकिस्तान में हथियार जुटाने में रोक लगी एवं उसे कोलंबो के रास्ते जाना पड़ा जो उसके लिए मुश्किल एवं महंगा साबित हुआ। तब पाकिस्तान में शेख मुजीबुर रहमान, जो बाद में बांग्लादेश के संस्थापक बने के चुनाव जीतने के बाद भी याह्या खान (जो बाद में पाकिस्तानी जनरल राष्ट्रपति बने)  द्वारा उन्हें प्रधानमंत्री नहीं बनने देने से चीजें सामने आने लगीं। आखिरकार मार्च, 1971 में मुजीबुर रहमान ने बांग्लादेश की स्वतंत्रता की घोषणा कर दी तो उन्हें पश्चिमी पाकिस्तान ले जाया गया, तब भारत ने अप्रैल में युद्ध में कदम रखा। भारत का जवाब बहुत ही ठोस था। 

गहरे हैं भारत-बांग्लादेश के रिश्ते
कार्यक्रम में वीडियो कांफ्रेंस के जरिये शामिल हुए विदेश सचिव हर्ष वर्धन श्रृंगला ने कहा कि भारत बांग्लादेश की आर्थिक प्रगति और समृद्धि में एक प्रतिबद्ध भागीदार बना हुआ है और दोनों देशों के बीच संबंध किसी भी अन्य रणनीतिक साझेदारी से ज्यादा गहरे हैं। गत वर्षों में भारत और बांग्लादेश के रिश्ते और परिपक्व हुए हैं। मुक्तियोद्धा आज भी दोनों देशों के बीच पुल का काम कर रहे हैं। दोनों देशों के सुरक्षा बलों के बीच नियमित आदान-प्रदान हमारे साझा सुरक्षा विचारों का प्रतिबिंब है।

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