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टाइमलाइन
Chandigarh Mayor Election: पीठासीन अधिकारी की बीमारी, चुनाव में गड़बड़ी के आरोप और दलबदल तक, कब क्या हुआ?
चंडीगढ़ मेयर चुनाव मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने कहा है कि वह चुनाव में पीठासीन अधिकारी अनिल मसीह द्वारा निशान लगाए गए बैलेट पेपर की जांच खुद करेगा। कोर्ट मामले की वीडियो फुटेज भी जांचेगा। कोर्ट ने कहा कि पीठासीन अधिकारी ने नियमों का पालन नहीं किया। उनके लगाए निशान को नजरअंदाज कर मंगलवार को वोटों की गिनती की जाएगी। इसके बाद यह स्पष्ट हो गया है कि मेयर चुनाव दोबारा नहीं होगा।
दरअसल, यहां 30 जनवरी को मेयर पद के लिए चुनाव हुए थे जिसमें भाजपा के मनोज सोनकर को विजयी घोषित किया गया था। हालांकि, गठबंधन में चुनाव लड़ने वाले दलों कांग्रेस और आप ने चुनाव में गड़बड़ी के आरोप लगाए थे। इसके साथ ही आप ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया। पहली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने 'लोकतंत्र की हत्या' जैसी बेहद गंभीर टिप्पणी की थी।
चंडीगढ़ मेयर चुनाव में क्या हुआ था? चुनाव में गड़बड़ी के आरोप क्यों लगे? मामला अदालत तक कैसे पहुंचा? अभी क्या हो रहा है? सब कुछ टाइमलाइन के जरिए जानते हैं...
18 जनवरी:
चंडीगढ़ में हर साल मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पद के लिए चुनाव होते हैं। इनका कार्यकाल एक साल का ही होता है। 18 जनवरी को तीनों पद के लिए चुनाव होने थे। चुनाव के लिए सत्ताधारी भाजपा की ओर से मनोज सोनकर मेयर पद के उम्मीदवार बने। वहीं, सीनियर डिप्टी मेयर पद के लिए कुलजीत संधू तो डिप्टी मेयर पद के लिए राजिंदर शर्मा को भाजपा ने अपना उम्मीदवार बनाया।
इन चुनावों से पहले विपक्षी इंडिया गठबंधन के दलों कांग्रेस और आप ने गठबंधन किया। इस समझौते के अनुसार, मेयर की सीट के लिए आप की तरफ से कुलदीप कुमार टीटा उम्मीदवार बने। वहीं, कांग्रेस के गुरप्रीत सिंह गैबी और निर्मला देवी क्रमशः वरिष्ठ डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के पद के लिए चुनाव मैदान में उतारे गए।
18 जनवरी को चंडीगढ़ नगर निगम के पार्षदों को मेयर पद के उम्मीदवारों के लिए वोट डालना था। इसके बाद सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पद के लिए मतदान होना था, लेकिन पीठासीन अधिकारी अनिल मसीह की तबीयत खराब होने की खबर आई। इसके चलते अगली सूचना तक चुनाव को स्थगित कर दिया गया। इससे पहले तीनों पदों के लिए संबंधित उम्मीदवारों ने 13 जनवरी को नामांकन दाखिल किया था।
30 जनवरी:
18 जनवरी को स्थगित होने के बाद 30 जनवरी को चुनाव कराए गए। इस दिन हुए चुनाव को बाद भाजपा के उम्मीदवार मनोज सोनकर को मेयर घोषित कर दिया गया। आप और कांग्रेस के साझा उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा। मनोज सोनकर ने INDIA गठबंधन के उम्मीदवार कुलदीप टीटा को 4 वोटों से हरा दिया। पीठासीन अधिकारी ने 8 वोट अमान्य करार दिए। इस पर आप और कांग्रेस ने पीठासीन अधिकारी अनिल मसीह पर कई वोटों के साथ छेड़छाड़ के आरोप लगाए। कांग्रेस और आप ने एक वीडियो साझा कर आरोप लगाया कि अनिल मसीह वीडियो में कई वोटों पर पेन चलाते हुए नजर आए हैं। दावा किया गया कि वीडियो में भी इसके सबूत हैं।
5 फरवरी:
वीडियो के आधार पर आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने भाजपा पर चुनाव में धांधली का आरोप लगाया। आम आदमी पार्टी के पार्षद व मेयर उम्मीदवार कुलदीप कुमार पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट पहुंचे लेकिन यहां कोई राहत नहीं मिली। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। 5 फरवरी को चंडीगढ़ मेयर चुनाव मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की। इस दौरान कोर्ट ने रिटर्निंग अधिकारी को कड़ी फटकार लगाई। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि यह स्पष्ट है कि रिटर्निंग अधिकारी ने मतपत्रों को नष्ट किया है। कोर्ट ने सवाल पूछा कि क्या इसी तरह से चुनाव का आयोजन होता है? यह लोकतंत्र का मजाक है। यह जनतंत्र की हत्या है। पूरे मामले से हम हैरान हैं। इस अधिकारी पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए। क्या यह रिटर्निंग अधिकारी का व्यवहार है? इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 19 फरवरी तय की।
18 फरवरी:
19 फरवरी को चंडीगढ़ मेयर चुनाव में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई तय थी। इससे पहले चंडीगढ़ की सियासत में बड़ी उठापटक हो गई। 18 फरवरी की शाम भाजपा की ओर से नवनिर्वाचित मेयर मनोज सोनकर ने इस्तीफा दे दिया। वहीं, रात में आम आदमी पार्टी के तीन पार्षद भाजपा में शामिल हो गए। पार्षद पूनम देवी, नेहा मुसावत और गुरचरण काला दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े की मौजूदगी में पार्टी में शामिल हुए।
चंडीगढ़ नगर निगम 35 सदस्यीय है। इन चुनावों में चंडीगढ़ के सभी 35 पार्षदों के साथ चंडीगढ़ की सांसद किरण खेर भी वोट डालती हैं। 18 फरवरी के पहले नगर निगम का सियासी समीरकरण आप और कांग्रेस के गठबंधन की वजह से भाजपा के खिलाफ था। इसके पास 14 पार्षद के साथ एक सांसद का वोट था। वहीं आप के पास 13 पार्षदों के वोट थे। इसके बाद कांग्रेस के सात तो अकाली दल का एक पार्षद है।
अब आप के तीन पार्षदों के भाजपा में शामिल होने से समीरकरण बदल गया है। अब भाजपा के पास 14 की जगह 17 पार्षद हो गए हैं और एक वोट भाजपा सांसद का पार्टी के खाते में होगा। ऐसे में नए सिरे से चुनाव होने पर समीकरण भाजपा के पक्ष में होंगे।
19 फरवरी:
मेयर चुनाव विवाद में सुप्रीम कोर्ट में सोमवार (19 फरवरी) को सुनवाई हुई। चुनाव में पीठासीन अधिकारी पर गड़बड़ी के आरोप लगाए गए हैं। पंजाब के महाधिवक्ता गुरमिंदर सिंह ने बताया कि अदालत ने पीठासीन अधिकारी का बयान दर्ज किया है। इसके अलावा, अदालत ने कहा है कि पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाए। जिसे मंगलवार दोपहर 2 बजे सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखा जाएगा। दूसरे पक्ष ने सुझाव दिया कि चूंकि मेयर ने इस्तीफा दे दिया है, इसलिए नए सिरे से चुनाव कराए जाने चाहिए। अदालत ने इस पर विचार किया और यह भी कहा कि चुनाव उस चरण से फिर से शुरू किए जा सकते हैं जहां अवैधता हुई थी।
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