सरकार का फैसला, पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई को जेड प्लस सुरक्षा

Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni
Updated Fri, 22 Jan 2021 04:59 PM IST
विज्ञापन
रंजन गोगोई: फाइल फाेटो
रंजन गोगोई: फाइल फाेटो - फोटो : PTI

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

ख़बर सुनें
भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई को केंद्र सरकार द्वारा जेड प्लस सुरक्षा उपलब्ध कराई गई है। उन्हें सुरक्षा का यह घेरा पूरे देश में दिया जाएगा। केंद्र सरकार ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) को रंजन गोगोई को सुरक्षा देने की जिम्मेदारी दी है। गौरतलब है कि अयोध्या भूमि विवाद पर फैसला सुनाने से पहले भी तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश गोगोई को जेड प्लस सुरक्षा दी गई थी।
विज्ञापन


राज्यसभा सदस्य गोगोई को पहले दिल्ली पुलिस सुरक्षा मुहैया करा रही थी। गोगोई नवंबर, 2019 में प्रधान न्यायाधीश के पद से सेवानिवृत्त हुए और बाद में सरकार ने उन्हें राज्यसभा का सदस्य मनोनीत किया। सूत्रों ने बताया कि सीआरपीएफ वीआईपी सुरक्षा ईकाई है और गोगोई 63वें व्यक्ति हैं जिन्हें बल द्वारा सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि सीआरपीएफ के 8 से 12 कमांडो का सशस्त्र सचल दस्ता यात्रा के दौरान पूर्व प्रधान न्यायाधीश की सुरक्षा करेगा। उनके घर पर भी ऐसी ही दस्ता सुरक्षा में तैनात रहेगा।


क्या होती है जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा
स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप की सुरक्षा के बाद जेड प्लस भारत की सर्वोच्च सुरक्षा श्रेणी है। इस श्रेणी में संबंधित विशिष्ट व्यक्ति की सुरक्षा में 36 जवान होते हैं। इसमें 10 से ज्यादा एनएसजी कमांडो के साथ दिल्ली पुलिस, आईटीबीपी या सीआरपीएफ के कमांडो और राज्य के पुलिसकर्मी शामिल होते हैं। हर कमांडो मार्शल आर्ट और निहत्थे युद्ध करने की कला में माहिर होता है। सुरक्षा में लगे एनएसजी कमांडो के पास एमपी 5 मशीनगन के साथ आधुनिक संचार उपकरण भी होता है। इसके अलावा इनके काफिले में एक जैमर गाड़ी भी होती है जो मोबाइल सिग्नल जाम करने का काम करती है। देश में चुनिंदा लोगों को ही जेड प्लस की सुरक्षा प्राप्त है।

किसे दी जाती है सुरक्षा?
देश के सम्मानित लोगों और राजनेताओं को जान का खतरा है। जेड प्लस, जेड, वाय और एक्स श्रेणी की सुरक्षा मंत्रियों को मिलने वाली सुरक्षा से अलग होती है। सामान्यत: ऐसी सुरक्षा के लिए सरकार के पास आवेदन देना होता है। जिसके बाद सरकार खुफिया एजेंसियों के जरिए होने वाले खतरे का अंदाजा लगाती हैं। खतरे की पुष्टि होने पर सुरक्षा उपलब्ध कराई जाती है। गृह सचिव, महानिदेशक और मुख्य सचिव की समिति ये तय करती है कि संबंधित लोगों को किस श्रेणी में सुरक्षा दी जाए।

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us

X

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00
X